देश के वन प्रबंधन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दक्षिण पन्ना वनमंडल ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ‘एरियल फायर फाइटिंग’ का प्रायोगिक परीक्षण किया। यह परीक्षण रविवार, 10 मई को शाहनगर वन परिक्षेत्र में ड्रोन और फायर रिटार्डेंट (अग्नि रोधक) की मदद से किया गया। इसे देश में अपनी तरह का पहला और अभिनव प्रयास माना जा रहा है। डीएफओ अनुपम शर्मा के अनुसार, यह परीक्षण राज्य वन अनुसंधान संस्थान (SFRI) के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ। प्रयोग के दौरान, ड्रोन के जरिए दुर्गम वन क्षेत्र में ‘मोनो अमोनियम फॉस्फेट’ (MAP) आधारित मिश्रण का नियंत्रित छिड़काव किया गया। यह रसायन आग की तीव्रता को कम करने और उसे फैलने से रोकने में बेहद प्रभावी माना जाता है। भीषण गर्मी के दौरान अक्सर दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में आग लग जाती है। ऐसे क्षेत्रों में वन कर्मचारियों का समय पर पहुंचना और जान जोखिम में डालकर आग बुझाना एक बड़ी चुनौती होती है। वर्तमान में आग बुझाने के लिए ‘फायर बीटिंग’ और ‘लीफ ब्लोअर’ जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग किया जाता है। ड्रोन से दुर्गम क्षेत्रों रोकेंगे आग डीएफओ शर्मा ने बताया कि ड्रोन तकनीक के उपयोग से दुर्गम क्षेत्रों में आग पर त्वरित पहुंच बनाना और शुरुआती स्तर पर ही उस पर काबू पाना सरल हो जाएगा। इससे वन कर्मचारियों को भीषण लपटों के सीधे संपर्क में आने से भी बचाया जा सकेगा। डीएफओ के अनुसार, यह केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि एक गहन वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा है। आने वाले समय में इसके कई स्तरों पर परीक्षण होंगे। इनमें मिट्टी और जल के विश्लेषण से पारिस्थितिक तंत्र पर रसायनों के प्रभाव की जांच तथा अलग-अलग मौसमी परिस्थितियों में ड्रोन की सटीकता का आकलन शामिल है। एक गेम-चेंजर योजना यदि यह तकनीक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से सफल साबित होती है, तो भविष्य में संवेदनशील वन्यजीव आवासों और भीषण वनाग्नि की स्थितियों में यह एक गेम-चेंजर साबित होगी। पन्ना वनमंडल का यह कदम न केवल वनों को बचाने की दिशा में एक आधुनिक पहल है, बल्कि यह वन प्रबंधन में ‘स्मार्ट तकनीक’ के उपयोग के लिए पूरे देश के सामने एक मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है।
