जबलपुर के बरगी पटेल तिराहा पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान दुकानदार गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन ने दुकानों को तोड़ दिया। इसी दौरान निगरी निवासी दुकानदार मंटू अग्रवाल की मौके पर ही तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अटैक आ गया। उन्हें अपोलो हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां सदमे के कारण उनकी मौत हो गई। दुकानदार की मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी और मौके पर चल रही चार जेसीबी मशीनों को हटा लिया। मृतक के परिजन, पीड़ित पक्ष और ग्रामवासी थाने का घेराव किया। वहीं पास में ही रजनीश पटेल की भी दुकान दी थी। जिनकी कार्रवाई के दौरान तबीयत बिगड़ी है, इलाज के लिए उन्हें भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है। थाना घेराव से जुड़ी चार तस्वीरें देखिए दुकान हटाने की कार्रवाई के दौरान बिगड़ी तबीयत सीएसपी अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि गुरुवार शाम जिला प्रशासन के निर्देश पर बरगी तहसीलदार के साथ सरपंच, सचिव और अन्य कर्मचारी बरगी बाजार की मुख्य सड़क पर स्थित अतिक्रमण हटा रहे थे। इसी दौरान कपड़ा व्यापारी मनोज अग्रवाल के भाई मंटू अग्रवाल भी मौके पर मौजूद थे। दुकान हटाने की कार्रवाई के दौरान अचानक मंटू की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए बरगी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि प्रशासनिक टीम ने उन्हें परेशान किया, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। सीएसपी ने बताया कि मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले में बरगी सरपंच, सचिव और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। देर रात को बड़ी संख्या में लोगों ने बरगी थाने का घेराव किया था, जिन्हें समझाइश दी गई तो वह मान गए है। शव को शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। अचानक पहुंची प्रशासनिक टीम, दुकान हटाने का दिया निर्देश मृतक के भाई मनोज अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को अचानक बरगी तहसीलदार, सरपंच और सचिव टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सीधे दुकान हटाने का निर्देश दे दिया। इस दौरान उनके भाई मंटू ने सभी से निवेदन किया कि थोड़ा समय दे दिया जाए, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। मनोज ने बताया कि तहसीलदार और अन्य अधिकारी कह रहे थे कि सिर्फ 5 मिनट का समय है, जल्द से जल्द दुकान खाली कर लो। इसी दौरान मंटू घबरा गए और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। वह वहीं गिर पड़े। इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए बरगी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मनोज अग्रवाल का कहना है कि मंटू की मौत के लिए तहसीलदार, सरपंच और सचिव जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की प्रताड़ना के कारण उनके भाई की हालत बिगड़ी और मौत हो गई। मनोज ने कहा कि वे दुकान खाली करने से मना नहीं कर रहे थे, लेकिन उन्हें बिल्कुल समय नहीं दिया गया। प्रशासन की टीम अचानक मौके पर पहुंची और जबरन दुकान खाली करवाने लगी। इसी दौरान उनके भाई की तबीयत बिगड़ी। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने स्टे से संबंधित दस्तावेज तहसीलदार को देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें लेने से मना कर दिया गया। तहसीलदार बोलीं- अतिक्रमणकारियों को पहले ही दिए जा चुके थे नोटिस बरगी तहसीलदार पूर्णिमा खानदायत का कहना है कि लगातार अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दिए जा रहे थे। तीन बार बेदखली को लेकर भी नोटिस दिया गया था। इसके बाद गुरुवार को सरपंच, सचिव और पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान मनोज अग्रवाल की दुकान हटाने को लेकर उनके भाई मंटू अग्रवाल भी मौके पर पहुंच गए। सभी लोग मिलकर दुकान का सामान हटा रहे थे। तभी अचानक मंटू की तबीयत बिगड़ गई। इलाज के लिए उन्हें जबलपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कुछ ही घंटे बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
