भोपाल के जिस 90 डिग्री एंगल वाले रेलवे ओवरब्रिज ने देशभर में मध्य प्रदेश की किरकिरी कराई, उस मामले में सस्पेंड सभी 7 इंजीनियरों को बहाल कर दिया गया है। इनमें दो चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं। हैरानी की बात ये है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली वाली नोटशीट पर अपनी टीप भी लिखी है। इसमें सिर्फ इतना लिखा कि ‘23 जून 2025 से ये सस्पेंड चल रहे हैं, इन्हें बहाल कर दो।’ पूर्व में सस्पेंड होने के बाद दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर ईएनसी ऑफिस में अटैच किए गए थे। बाकी इंजीनियर भोपाल में मैदानी ऑफिस में अटैच थे। बहाल होने के बाद सभी इंजीनियरों को ईएनसी ऑफिस में पदस्थ किया जाएगा। पूर्व में आरोप पत्र जारी हो चुके विभागीय सूत्रों के अनुसार, सस्पेंड 7 इंजीनियरों को पूर्व में आरोप पत्र जारी हुए हैं। सभी ने जवाब पेश कर दिए। इसमें डिजाइन विंग से जुड़े इंजीनियरों ने गलती नहीं मानी है, लिहाजा जवाब का परीक्षण करने के बाद उन्हें बिना किसी कार्यवाही के बहाल किया गया है। 90 डिग्री एंगल वाले ब्रिज का ड्रोन व्यू… इन्हें किया गया था सस्पेंड 4-5 माह चलेगी विभागीय जांच विभागीय जांच के आदेश के बाद अब अधिकारी की नियुक्ति होगी। जो बयान, साक्ष्य और जवाब का परीक्षण करेगा। इसमें 4 से 5 माह का वक्त लग सकता है। बहाली के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीडब्ल्यूडी के ब्रिज डिवीजन में तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, तत्कालीन एसडीओ रवि शुक्ला और तत्कालीन उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के बारे में साफ किया गया है कि उनकी पदस्थापना के साथ-साथ विभागीय जांच भी चलेगी। बाकी पर कोई विभागीय जांच नहीं होगी। रेलवे के साथ मिलकर फिर री-डिजाइन किया भोपाल के ऐशबाग में बने 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज का टर्निंग वाला हिस्सा फिर से बन रहा है। पीडब्ल्यूडी रेलवे के साथ मिलकर ब्रिज को रीडिजाइन कर रहा है। हालांकि, यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस कारण हजारों लोग हर रोज परेशान हो रहे हैं। मंत्री राकेश सिंह ने ही कराई थी जांच मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से जांच करवाई थी। एनएचएआई ने ब्रिज को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें 35-40 किमी प्रति घंटा से अधिक गति से गाड़ी नहीं चलाने का सुझाव दिया गया है। इससे अधिक स्पीड में गाड़ी चली तो हादसा होने का खतरा है। सोशल मीडिया पर मीम्स भी बने भोपाल में बना इस रेलवे ओवरब्रिज को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर मीम्स भी बनाए थे। लोगों ने सवाल उठाए थे कि यहां वाहन कैसे टर्न लेंगे? वाहनों के या तो ब्रिज की दीवारों से या फिर आपस में टकराने का खतरा बना रहेगा। क्रॉसिंग बंद होने से ब्रिज की जरूरत ब्रिज के निर्माण के समय रेलवे ने भी 90 डिग्री की इस टर्निंग पर आपत्ति की थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने यहां जगह कम होने का हवाला देते हुए कहा था कि और कोई विकल्प नहीं है। ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद इस इलाके के लिए आरओबी एक बड़ी जरूरत है। इसलिए कम जगह में भी इसे बनाना होगा। 18 महीने में बनकर तैयार होना था इस ब्रिज का निर्माण मई 2022 में शुरू हुआ था और इसे 18 महीने में पूरा करना था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसकी लागत 18 करोड़ रुपए है। 648 मीटर लंबे और 8 मीटर की चौड़ाई वाले ब्रिज का 70 मीटर हिस्सा रेलवे का है।
