पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक और रुंझ परियोजनाओं के कारण अपनी जमीन और घर खो रहे आदिवासी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। अपनी जमीन, जल और जंगल को बचाने की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इस आंदोलन को कांग्रेस का भी साथ मिला है और झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया खुद आदिवासियों के साथ जमीन पर डटे हुए हैं। वे शाम 4 बजे से शाम 7 बजे तक लोगों के बीच विरोध कर रहे हैं। आंदोलन की मुख्य वजह सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और कुछ ग्रामीणों की गिरफ्तारी है। प्रदर्शन में शामिल दिव्या आदिवासी ने गंभीर आरोप लगाया कि पुलिस ने रात 3 बजे बिना महिला पुलिस बल के उनके घरों में दबिश दी। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ बदसलूकी और मारपीट की, जो सरासर गलत है। विकास या विनाश? विधायक भूरिया ने उठाए सवाल झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विकास के नाम पर 25 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं और 7 हजार परिवारों को बेघर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि रात के अंधेरे में आदिवासियों को पीटना कौन सा न्याय है? उन्होंने मांग की है कि प्रभावितों को ‘जमीन के बदले जमीन’ और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। भूरिया ने इन गिरफ्तारियों को सरकार की एक सोची-समझी साजिश बताया। आदिवासियों की मुख्य मांगें गिरफ्तार किए गए अमित भटनागर और अन्य ग्रामीणों को तुरंत रिहा किया जाए। विस्थापितों को उचित मुआवजे के साथ ‘जमीन के बदले जमीन’ दी जाए। रात में बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो। परियोजना से प्रभावित आदिवासियों का सही तरीके से पुनर्वास किया जाए। प्रशासन ने लगाई पाबंदी, एसपी दफ्तर पर तनाव जैसे ही आंदोलन तेज हुआ, प्रशासन ने पन्ना नगर की सीमा में रैली, पदयात्रा और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है। एसडीएम संजय कुमार नागवंशी ने आदेश जारी कर कहा कि डायमंड चौराहा सहित शहर के व्यस्त इलाकों में धरना-प्रदर्शन नहीं होगा। प्रशासन का तर्क है कि इन प्रदर्शनों की वजह से सरकारी काम में रुकावट आ रही है और शांति व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है। फिलहाल, एसपी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है। दूसरी तरफ, आदिवासी अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नारों के साथ डटे हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक एसपी खुद आकर उनसे बात नहीं करतीं, वे वहां से नहीं हटेंगे।
