भीषण गर्मी के इस सीजन में जिस गुपचुप के पानी को आप ‘चटाखेदार’ समझकर पी रहे हैं या जो ‘खिला-खिला’ आम आपको लुभा रहा है, वह आपको सीधा अस्पताल पहुंचा सकता है। रायपुर के बाजारों में अधिक मुनाफे के लालच में दुकानदार ग्राहकों की सेहत से सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि चटपटे पानी में धनिया-पुदीने की जगह हरा केमिकल घोला जा रहा है, वहीं गंदे पानी से बनी बर्फ और एक्सपायर्ड ब्रेड धड़ल्ले से बेची जा रही है। इतना ही नहीं, सब्जियों को हरा-भरा दिखाने के लिए कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) और फलों को समय से पहले पकाने के लिए खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल हो रहा है। यहां तक कि दूध में डिटर्जेंट और मसालों में ईंट का चूरा मिलाकर उसे ‘खतरनाक जहर’ बनाया जा रहा है। मेकाहारा के डॉक्टरों के मुताबिक, ये मिलावटी केमिकल लिवर और किडनी को डैमेज करने के साथ-साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का मुख्य कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन केमिकल्स का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन लंबे समय तक इनका सेवन शरीर के इम्यून सिस्टम और दिल को खोखला कर देता है। इस ‘धीमे जहर’ को रोकने के लिए फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग ने ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ थीम के साथ मिलावटखोरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब तक 1000 से ज्यादा दुकानों की जांच की जा चुकी है, जिसमें कई क्विंटल खराब मैंगो पल्प, रंगयुक्त सोडा और जहरीला गुपचुप पानी मौके पर ही नष्ट कराया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बीच डॉक्टरों का परामर्श है कि उपभोक्ता बाहरी खान-पान को लेकर बेहद सतर्क रहें। घर बैठे सिर्फ 1 मिनट में मिलावट पकड़ने के आसान तरीके और एक्सपर्ट्स की खास सलाह पढ़िए इस रिपोर्ट में:- हर रोज शहर में पकड़ा रहा मिलावटी पदार्थ इस अभियान के बारे में राज्य असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बेनीराम साहू ने बताया कि, शहर के करीब 27 चाट और गुपचुप सेंटरों की जांच की। इस दौरान समोसा, चाट और दही बड़ा के दो सैंपल लिए गए। एक दुकान पर गुपचुप पानी में हरा रंग घुला हुआ मिला। जिसे पुदीने-धनिया की जगह रंग लाने के लिए मिलाया गया था। टीम ने करीब 20 लीटर गुपचुप पानी मौके पर ही नष्ट कराया। साथ ही एक बेकरी से एक्सपायर्ड ब्रेड भी जब्त कर नष्ट की गई। यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब जानिए किन चीजों में होती है मिलावट एक्सपर्ट के मुताबिक, खाद्य पदार्थों में मिलावट कई स्तरों पर की जाती है। सब्जियों को हरा-भरा और ताजा दिखाने के लिए कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) या कृत्रिम रंगों का छिड़काव किया जाता है। फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल होता है, जिससे एसिटिलीन गैस निकलती है। दूध में पानी, डिटर्जेंट, यूरिया और सिंथेटिक दूध मिलाया जाता है। मसालों में ईंट का चूरा, रंग और बुरादा मिलाया जाता है। ठंडे पेय पदार्थों में सैकरीन, सस्ते फ्लेवर और आर्टिफिशियल कलर मिलाए जाते हैं। बर्फ अक्सर गंदे पानी से बनाई जाती है। गुपचुप के पानी में नल का अशुद्ध पानी, हरा रंग, कृत्रिम खट्टे-मीठे एसेंस और कई बार दूषित बर्फ का इस्तेमाल होता है। मसालों में भी भारी मिलावट हल्दी में लेड क्रोमेट (पीला रंग बढ़ाने के लिए) मिर्च पाउडर में ईंट या सिंथेटिक रंग शहद में शुगर सिरप घी में वनस्पति या सस्ता तेल आइसक्रीम में डिटर्जेंट या सिंथेटिक केमिकल मिलाए जाते हैं। फूड सेफ्टी एक्ट में होता है एक्शन प्रदेश में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन 27 अप्रैल से 11 मई तक 15 दिन जांच अभियान चला रहा है। ‘सही दवा शुद्ध आहार यही छत्तीसगढ़ का आधार’ थीम के तहत अभियान नियंत्रक दीपक कुमार अग्रवाल (आईएएस) के निर्देश पर चल रहा है। जिसमें दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार संचालन के निर्देश दिए जा रहे। इसके अलावा मिलावटी खाद्य सामग्री बेचते दुकानदारों पर फूड सेफ्टी एक्ट में एक्शन लिया जा रहा है।
