निवाड़ी भाटा इंडस्ट्रियल हब बड़े पैमाने पर जमीन का खेल चल रहा है। 17 एकड़ में फैले हब के शुरुआती दौर में जिन लोगों को प्लॉट दिए गए थे, उन्होंने किसी और को इसका मालिकाना हक दे दिया। वजह– ये हब निवाड़ी हाईवे पर है। इसकी यही खासियत यहां की जमीन को बेशकीमती बनाती है। साल 2013 में प्लॉट्स के आंवटन के समय उद्योग विभाग ने शर्त रखी थी कि 2015 उद्योग लग जाने चाहिए थे। हकीकत में 2026 यानी 10 साल बाद भी 43 प्लॉट में से 10 में ही प्रोडक्शन शुरू हो गया है। 6 प्लॉट का काम अधूरा है। 15 यूनिट अभी कंस्ट्रक्शन मोड पर हैं। वहीं एक प्लांट शुरू होने के बाद बंद भी हो गया। सात यूनिट्स के मालिक बदले चौंकाने वाली बात ये है कि यहां सात यूनिट्स के मालिक बदल चुके हैं। यानी जिन्होंने प्लॉट लिया, उनमें कुछ ने कुछ समय उद्योग चलाया। बाद में दूसरे को ट्रांसफर कर दिया, तो कुछ ने खुद उद्योग ही नहीं लगाया, बल्कि किसी और को दे दिया। प्लॉट लिए, लेकिन प्लांट नहीं लगाए भाटा हब के पिछड़ने की मूल वजह भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कई उद्योगपतियों ने प्लॉट तो ले लिए, लेकिन लंबे समय तक प्लांट लगाने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद उद्योग विभाग ने तय सीमा में प्लांट नहीं लगाने के कारण आवंटन कैंसिल कर दिया। आर्या सर्विस सेंटर और अमर इंटरप्राइजेस ये दो इकाइयां ऐसी हैं, जिनका हस्तांतरण, निरस्तीकरण के कारण हुआ। इसके अलावा, ओम सांई ट्रेडर्स, रुक्मिणी मिनरल्स, रामराजा कोल्ड स्टोरेज, केडी इंटरप्राइजेस की दो यूनिट में से एक चल रही हैं। उद्योग विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि हाईवे से जमीन लगी होने के कारण मुनाफा ज्यादा है। उद्योगपतियों ने प्लॉट ले लिए। कुछ साल बाद इन्ही प्लॉटों को दूसरे लोगों को ट्रांसफर कर दिया। इसे एक तरह से अंदरुनी तौर पर खरीदी-बिक्री भी कह सकते हैं। कानूनी नजरिए से देखा जाए, तो उद्योग विकसित करने के उद्देश्य से ली गई जमीनों को हस्तांतरित करना या उसे बेचना अपराध है। एक से डेढ़ साल में चालू होने का लक्ष्य उद्योग विभाग के महाप्रबंधक गुंजन जैन का कहना है कि वर्तमान में 42 प्लॉट्स में से 16 में 10 इकाइयां संचालित हो रही हैं। 15 यूनिट्स निर्माणाधीन हैं और एक बंद है। तीन प्लॉट पर हाईटेंशन लाइन होने के कारण काम रुका है। एक से डेढ़ साल में सब ठीक हो जाएगा। जटिल हो गई हस्तानांतरण की प्रक्रिया महाप्रबंधक गुंजन जैन का कहना है कि प्लॉट्स के हस्तानांतरण की प्रक्रिया को जटिल कर दी है। उद्योग से जुड़ी नवीन नीतियों के तहत अब आवंटन प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होगी जितनी 2021 से पहले थी। अब जो भी यहां पर प्लॉट खरीदता है, उसे 25 प्रतिशत निवेश करना जरूरी है। जब तक इकाई चलाने वाला 25 % का निवेश नहीं करेगा, तब तक वो यूनिट हस्तांतरित नहीं कर सकता।
