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गांजा तस्करी का ‘कंपनी मॉडल’: A-Team के बाद B-Team एक्टिव:मैनेजमेंट में कमाई से लेकर जमानत तक की स्कीम, 28 लाख का माल जब्त

भिंड में गांजा तस्करी का ऐसा ‘कंपनी मॉडल’ सामने आया है, जिसमें गिरोह ने फाइनेंसर, मैनेजर, स्टोरकीपर और सप्लाई तक की जिम्मेदारियां तय कर रखी थीं। नेटवर्क इस तरह बनाया गया था कि धंधा किसी भी हाल में न रुके-दिसंबर में A-टीम के पकड़े जाने के बाद B-टीम तुरंत सक्रिय हो गई और तस्करी का काम संभाल लिया। बरोही और देहात थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब इसी B-टीम के दो सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 138 किलो गांजा बरामद हुआ है, जिसकी कीमत करीब 28 लाख रुपए बताई जा रही है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने मुनाफे के बंटवारे से लेकर गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत तक का पूरा सिस्टम पहले से तय कर रखा था। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी दिसंबर में गिरफ्तार किए गए गिरोह के ही सहयोगी हैं। मुख्य आरोपियों के जेल जाने के बाद B-Team तस्करी का कारोबार संभाल रही थी। गिरोह में कमाई की हिस्सेदारी तय होने के साथ ही जमानत के लिए अलग फंड भी बनाया गया था, जिसमें हर खेप से हिस्सा सुरक्षित रखा जाता था। पहले पार्ट-वन: कंपनी मॉडल पर चल रही थी गांजा तस्करी दिसंबर महीने में भिंड के बरोही थाना पुलिस ने एक गांजा तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया था कि यह गिरोह पूरी तरह ‘कंपनी मॉडल’ पर काम कर रहा था, ठीक वैसे ही जैसे कोई चेन सिस्टम संचालित होता है। उस दौरान बरोही थाना प्रभारी अतुल भदौरिया ने मदनपुरा बांध के पास एक संदिग्ध हुंडई कार को रोकने का प्रयास किया था। चालक ने कच्चे रास्ते से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पीछा कर वाहन को पकड़ लिया। तलाशी में कार से 22 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद हुआ। कार भिंड के बीटीआई रोड निवासी राजेंद्र बघेल चला रहा था। उसके साथ बरोही निवासी पंकज शुक्ला और सोई थाना सुरपुरा निवासी राजकुमार शर्मा भी मौजूद थे। जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन पंकज शुक्ला कर रहा था, जो कंपनी मॉडल के तहत तस्करी का नेटवर्क चला रहा था। इस गिरोह में राजेंद्र बघेल सहित अन्य सदस्य जुड़े हुए थे। वहीं, मजनू उर्फ शिवम शर्मा भी गिरोह का अहम सदस्य था, जो उस समय फरार हो गया था। बाद में करीब तीन माह बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पढ़िए पूरी खबर…भिंड में गांजा तस्करी का ‘कंपनी मॉडल’:मैनेजर से स्टोर कीपर तक, फाइनेंसर को 2 लाख के बदले 5 लाख, सिक्योरिटी का अलग बजट फरार मजनू ने संभाली कमान, B-Team को किया एक्टिव अपने साथी पंकज शुक्ला, राजेंद्र बघेल और राजकुमार शर्मा के गिरफ्तार होने के बाद मजनू उर्फ शिवम शर्मा फरार हो गया था। इन तीनों के जेल जाते ही मजनू ने गिरोह की B-Team को सक्रिय कर दिया और तस्करी का काम दोबारा शुरू करा दिया। B-Team को चलाने के लिए सबसे पहले फाइनेंसर की व्यवस्था की गई। मजनू ने अपने परिचित अनूप शर्मा उर्फ अन्ना को गिरोह से जोड़कर उसे फाइनेंसर बनाया। तय सिस्टम के तहत फाइनेंसर को कुल कमाई का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। साथ ही उस पर यह जिम्मेदारी भी थी कि यदि कोई सदस्य पकड़ा जाता है तो उसकी जमानत की व्यवस्था करे। पहले से जेल में बंद साथियों की जमानत का खर्च भी इसी हिस्से से उठाया जाना तय था। गिरोह में रिषभ चौहान को वाहनों की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद B-Team ने पहले से ज्यादा सावधानी के साथ काम करना शुरू किया। उड़ीसा से गांजा लाने के लिए मजनू ने सभी पुराने संपर्क और ठिकाने टीम को बताए। पुलिस से बचने के लिए इस बार खास रणनीति अपनाई गई। तस्करी के दौरान दो लग्जरी कारों का इस्तेमाल किया जाने लगा, ताकि किसी भी स्थिति में पुलिस के हत्थे न चढ़ें और नेटवर्क लगातार चलता रहे। कोड वर्ड और फॉलो कार से करते थे तस्करी गिरोह उड़ीसा से गांजा खरीदने के दौरान भी पूरी सावधानी बरतता था। बातचीत में वे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, जिसमें गांजा को ‘माल’ या ‘जड़ी-बूटी’ कहा जाता था, ताकि किसी को शक न हो। एक बार में वे जरूरत के अनुसार 2 से 5 क्विंटल तक गांजा लाते थे और इस कारोबार में कई गुना मुनाफा कमाते थे। तस्करी के दौरान पुलिस से बचने के लिए खास रणनीति अपनाई गई थी। एक कार करीब 2 से 3 किलोमीटर आगे चलती थी, जिसे गिरोह ‘फॉलो कार’ कहता था। इसमें सवार 3-4 लोग रास्ते की स्थिति और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी पीछे आ रही कार को देते थे। इसके पीछे चल रही दूसरी कार में गांजा भरा होता था, जिसमें 2 से 3 लोग सवार रहते थे। इस तरीके से गिरोह लगातार मूवमेंट में रहकर पुलिस की नजर से बचने की कोशिश करता था। कुम्हरौआ में बनाया नया ठिकाना, 138 किलो गांजा जब्त B-Team के सक्रिय होने के बाद गिरोह ने गांजा छिपाने के लिए कुम्हरौआ में नया ठिकाना तैयार किया। इस टीम में अनूप शर्मा उर्फ अन्ना फाइनेंसर की भूमिका में था। गिरोह के सदस्य गांजा को ‘गोदाम’ में रखने की बात कोड वर्ड में कहते थे। आर्य नगर निवासी अभिषेक तिवारी को इस गोदाम की जिम्मेदारी दी गई थी। उसने अपने एक रिश्तेदार का घर 10 हजार रुपए महीने किराए पर लेकर उसे स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। इसमें अंशुल बौहरे उसका सहयोग कर रहा था। गिरोह में भोला दंडोतिया को नए सप्लायर तलाशने और उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में भोला भी पकड़.गया था। पुलिस ने अब बी टीम पर कार्रवाई करते हुए अभिषेक तिवारी और अंशुल बौहरे को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने तस्करी से जुड़े अहम खुलासे किए। इनके कब्जे से 138 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत करीब 28 लाख रुपए बताई जा रही है। छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक सुरक्षित पहुंचाते थे उड़ीसा के तस्कर जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दिन पहले गिरोह उड़ीसा से करीब 2 क्विंटल गांजा लेकर आया था, जिसमें से लगभग 40 किलो गांजा बेचकर मोटी कमाई की जा चुकी थी। आरोपियों ने बताया कि उड़ीसा से गांजा करीब 5 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाता था, जिसे भिंड और आसपास के क्षेत्रों में एजेंटों को 20 हजार रुपए प्रति किलो तक बेचा जाता था। वहीं, खुदरा में यह 25 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाता था। आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि उड़ीसा के तस्कर माल को छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी लेते थे और कई बार खुद वाहन से डिलीवरी भी करते थे। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क से जुड़े फाइनेंसर अनूप शर्मा उर्फ अन्ना , मंगू और ऋषभ चौहान फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस बोली—B-Team के सदस्य पकड़े, नेटवर्क की कड़ियां खुलीं बरोही थाना प्रभारी अतुल भदौरिया ने बताया कि यह दिसंबर में पकड़े गए गांजा तस्कर गिरोह की ही B-Team है, जो मुख्य आरोपियों के जेल जाने के बाद तस्करी का कारोबार संभाल रही थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पुराने नेटवर्क की कई अहम जानकारियां मिली हैं। अब तक B-Team के चार सदस्य सामने आ चुके हैं, जो ‘पार्ट-टू’ के रूप में सक्रिय थे। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में जमानत के लिए अलग से फंड रखा जाता था और A-Team के सदस्यों की जमानत के प्रयास भी किए जा रहे थे। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 138 किलो गांजा बरामद किया है, जिसकी बाजार कीमत करीब 28 लाख रुपए बताई जा रही है। वहीं, गिरोह से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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