आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय शंकर प्रकटोत्सव (एकात्म पर्व) का समापन मंगलवार को भव्य रूप से हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से आए 700 से अधिक युवाओं ने ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षा लेकर अद्वैत वेदांत के वैश्विक प्रसार का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, चिन्मय मिशन के पूर्व वैश्विक प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, दक्षिणामूर्ति मठ के प्रमुख स्वामी पूर्णानंद गिरी सहित कई संत, विद्वान और गणमान्य उपस्थित रहे। युवाओं से वैश्विक स्तर पर विचार पहुंचाने का आह्वान
कार्यक्रम में वीडियो संदेश के माध्यम से जगद्गुरु विधुशेखर भारती ने कहा कि आज ऐसे प्रकल्पों की अत्यंत आवश्यकता है, जो आदि शंकराचार्य के विचारों को विश्व स्तर तक पहुंचाएं। बताया कि शंकराचार्य ने भारत को एक सूत्र में बांधने के लिए चारों दिशाओं में पीठों की स्थापना की थी, उसी परंपरा को आगे बढ़ाना समय की मांग है। ‘शंकरदूत’ बनें वैश्विक संदेशवाहक
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि शंकरदूत भारत तक सीमित न रहकर विश्व के हर कोने में अद्वैत का संदेश पहुंचाएं। उन्होंने शंकराचार्य की तुलना वेदव्यास से करते हुए कहा कि उन्होंने बिखरे ज्ञान को पुनः समाज तक पहुंचाया। अद्वैत, पर्यावरण और तकनीक का संगम
न्यास के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रो. यज्ञेश्वर शास्त्री ने बताया कि ओंकारेश्वर को एकात्मता के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’, शंकर संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान का निर्माण तेज गति से चल रहा है। न्यास के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि 2027 में केरल के कालड़ी से केदारनाथ तक लगभग 17 हजार किमी लंबी “एकात्म यात्रा” प्रस्तावित है, जिसमें कई आध्यात्मिक संस्थाएं भाग लेंगी। “शंकर न होते तो ज्ञान अंधकार में रहता”
बीज वक्तव्य में स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती ने कहा कि यदि शंकराचार्य का प्राकट्य नहीं होता, तो ज्ञान अज्ञान के अंधकार में ही रह जाता। उन्होंने अद्वैत को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का अवसर
मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक चेतना के पुनर्जागरण का अवसर है। बताया कि ओंकारेश्वर में लगभग 2400 करोड़ रुपये की लागत से ‘एकात्म धाम’ का निर्माण किया जा रहा है। विद्वानों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर अद्वैत वेदांत के प्रसार में योगदान के लिए स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती और प्रख्यात शिक्षाविद् गौतम भाई पटेल को सम्मानित किया गया। प्रो. पटेल द्वारा शंकराचार्य की कृतियों का गुजराती में अनुवाद एक ऐतिहासिक पहल माना गया। देश-विदेश से जुड़ रहे युवा
वर्ष 2020 से चल रहे अद्वैत जागरण शिविरों में अब तक 1800 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इनमें भारत सहित स्पेन, अमेरिका, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और अन्य देशों के युवा, आईआईटीयन, डॉक्टर, इंजीनियर, सेना अधिकारी और शोधार्थी शामिल हैं।
