रायसेन में मंगलवार को कटीली झाड़ियों और बारिश के पानी के बीच एक नवजात बच्ची मिली। बच्ची करीब 3 से 4 घंटे तक जंगल में पड़ी रही और चीटियां उसे काटती रहीं। उसके शरीर पर कटीली झाड़ियों से चोट के निशान भी मिले हैं। पानी में पड़े रहने से उसका शरीर अकड़ गया था। बच्ची को एसएनसीयू में भर्ती कर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। घटना बम्हौरी तहसील के डुंगरिया खुर्द गांव की है। मंगलवार सुबह करीब 7 बजे एक चरवाहा जंगल में पशु चरा रहा था। तभी उसे बच्ची के रोने की तेज आवाज सुनाई दी। आवाज का पीछा करते हुए वह कटीली झाड़ियों के पास पहुंचा तो वहां पानी के बीच नवजात पड़ी मिली। आसपास कोई नहीं था। चरवाहे ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बुलाया चरवाहे ने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से बच्ची को झाड़ियों से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। बच्ची को पहले बम्हौरी उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर सिलवानी अस्पताल और फिर रायसेन जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टर बोले- 3 से 4 दिन करेंगे निगरानी जिला अस्पताल के एसएनसीयू प्रभारी डॉ. आलोक राय ने बताया कि बच्ची के शरीर पर कटीली झाड़ियों से चोट के निशान हैं। बारिश के पानी में पड़े रहने से उसका शरीर अकड़ गया था। वह भूखी और कमजोर भी थी। फिलहाल एसएनसीयू में उसका इलाज चल रहा है और अगले 3 से 4 दिन डॉक्टर निगरानी करेंगे। जन्म के कुछ घंटे बाद छोड़ने की आशंका डॉक्टर के अनुसार बच्ची का जन्म मंगलवार सुबह करीब 5 बजे हुआ होगा। आशंका है कि जन्म के कुछ समय बाद ही उसे जंगल में छोड़ दिया गया। बच्ची करीब 3 से 4 घंटे तक झाड़ियों और पानी के बीच पड़ी रही। अज्ञात माता-पिता की तलाश बम्हौरी थाना प्रभारी प्रीतम सिंह राजपूत ने बताया कि जहां बच्ची मिली, वह घना जंगल है और वहां जंगली जानवर भी आते-जाते हैं। ऐसे में नवजात को वहां छोड़ना जानलेवा हो सकता था। पुलिस ने अज्ञात माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जंगल और आसपास के गांवों में तलाश व पूछताछ की जा रही है। बाल कल्याण समिति भी पहुंची अस्पताल नवजात बच्ची के जिला अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता पटेल अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने डॉक्टरों से बच्ची की हालत और इलाज की जानकारी ली। समिति ने मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ममता पटेल ने बताया कि सूचना मिलते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्ची की स्थिति की जानकारी लेने अस्पताल पहुंचीं।
