लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए 10 लाख रुपए फीस ली जाएगी। इसपर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए। पटवारी ने कहा- अंग्रेजों के समय भी आंदोलन और सभाएं होती थीं, लेकिन फीस नहीं लगती थी। जीतू ने कहा- आरएसएस के इतने कार्यक्रम हुए, सरकार ने उनसे कब और कितने रुपए लिए? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के पहले नेता प्रतिपक्ष नहीं हैं। उनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और इंदिरा गांधी जैसे बड़े नेता भी नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। अटल जी के समय यहां भाजपा की बैठक हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अटल जी सहित पूरी पार्टी के नेताओं को घर पर बुलाकर भोजन कराया था। वो हमारी कांग्रेस पार्टी के संस्कार थे। नेता प्रतिपक्ष का पद प्रधानमंत्री के समतुल्य संवैधानिक पद है। पहली बार किसी नेता प्रतिपक्ष के कार्यक्रम के लिए इतनी बड़ी राशि जमा कराई गई है। मुद्दा राशि का नहीं, बल्कि उस संदेश का है जो इससे जा रहा है। आरएसएस-बीजेपी के कार्यक्रमों की फीस जमा नहीं हुई क्या बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम के लिए भी फीस जमा होगी? इस सवाल के जवाब में जीतू ने कहा- आरएसएस के पिछले 5 साल में एक हजार कार्यक्रम हो गए। एक जगह भी फीस जमा हुई क्या? सारे प्रोग्राम ग्राउंड पर हुए। बीजेपी के अध्यक्ष जी के पहले भी कई लोग आए, लेकिन एक के कार्यक्रम में भी इतनी फीस जमा नहीं हुई। सच्चाई सामने न आए, इसके लिए प्रयास पटवारी ने आरोप लगाया कि इस सामने मौजूद भयावह सच्चाई से मुंह छिपाने की कोशिश की जा रही है। देश में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को सामने आने से रोकने के लिए अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। ‘छात्रों की गूंज’ का मकसद किसी शुल्क या राशि को लेकर विवाद खड़ा करना नहीं है। कांग्रेस जिस उद्देश्य के लिए काम कर रही है, वह देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। 10 लाख लिए हैं, और ले लें तो भी पार्टी तैयार पटवारी ने कहा कि अभी 10 लाख रुपए लिए गए हैं। यदि इससे अधिक राशि भी मांगी जाती है तो कांग्रेस उसे देने के लिए तैयार है। पार्टी की प्राथमिकता युवाओं की शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों को राहुल गांधी के कार्यक्रम के माध्यम से उठाना है। भाजपा के विकास के दीये पर भी सवाल भाजपा के ‘विकास के दीये’ को लेकर पटवारी ने कहा- “भाजपा कौन से विकास के दीये की बात कर रही है? ये विकास का नहीं, विनाश का दीया है।” एमपी में क्या विकास हुआ? सबसे बड़ा बेरोजगार एमपी का नागरिक है। जीतू ने कहा- 70 फीसदी का हैवी करप्शन अगर कहीं है तो मप्र में हैं। स्वास्थ्य की सेवाएं समाप्त हो गईं। विकास देखना है तो बालाघाट, छिंदवाड़ा, इंदौर के एमवाय अस्पताल में देख लो। ज्यादा विकास देखना है तो मेरे साथ सागर के बंड़ा चलो जहां जहरीली शराब से 50 लोगों की मौत हो गई। राहुल की टीम दो महीने से कर रही रिसर्च पटवारी ने बताया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए उनकी करीब 50 लोगों की टीम इंदौर पहुंच चुकी है। टीम यह तय करेगी कि राहुल के साथ मंच पर किन युवा साथियों को स्थान दिया जाएगा। टीम पिछले करीब दो महीने से कार्यक्रम की रणनीति पर काम कर रही थी। शिक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर शोध किया गया है। शिक्षा से संबंधित विषय और आंकड़े टीम की जानकारी में हैं। प्रजेंटेशन में दावा एमपी में 30,650 स्कूल कम हुए जीतू ने प्रजेंटेशन के जरिए देश और मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में 1 लाख से ज्यादा स्कूल घटे, जबकि मध्यप्रदेश में 30,650 स्कूल कम हुए। प्रदेश में कक्षा 1 से 12 तक बच्चों का रिटेंशन रेट सिर्फ 32.3% बताया। यानी 100 में करीब 32 बच्चे ही 12वीं तक पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने एकल शिक्षक वाले 2,269 स्कूलों और इनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या को भी चिंता का विषय बताया। युवा आबादी घट रही, डेमोग्राफिक डिविडेंड पर सरकार की क्या योजना? पटवारी ने कहा कि देश में जन्मदर घटने के साथ आने वाले समय में युवा आबादी भी कम होगी। ऐसे में मौजूदा युवा पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार देना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों की कमी, स्कूल छोड़ रहे 14 से 18 साल के बच्चों और उच्च शिक्षा में सीमित पहुंच का मुद्दा उठाया। सवाल किया कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के लिए डेमोग्राफिक डिविडेंड बचाने की सरकार की क्या कार्ययोजना है? उन्होंने कहा कि केवल विकसित भारत का नैरेटिव बनाने से काम नहीं चलेगा, शिक्षा के आंकड़ों में सुधार दिखना चाहिए।
