मध्य प्रदेश के दमोह में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में काम कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। इनके पास मिली MBBS डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का रजिस्ट्रेशन फर्जी निकला। आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपए में फर्जी डिग्री खरीदी थी। जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में डॉ. कुमार सचिन यादव निवासी ग्वालियर, डॉ. राजपाल गौर निवासी सीहोर और डॉ. अजय मौर्य निवासी मुरैना शामिल हैं। अजय फिलहाल जबलपुर में रह रहा था। जांच में उसके पास भी एमबीबीएस की फर्जी डिग्री मिली है। दमोह और जबलपुर से गिरफ्तार हुए आरोपी पुलिस के मुताबिक, सचिन यादव और राजपाल गौर दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में काम कर रहे थे। वहीं अजय मौर्य जबलपुर में पिछले ढाई साल से संजीवनी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था। तीनों के पास MBBS की फर्जी डिग्री मिली है। फर्जी डिग्री मामले में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आ रहा है। NHM भोपाल को नियुक्ति रद्द करने लिखा पत्र दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने बताया कि दोनों फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से हुई थी। जांच में उनकी एमबीबीएस डिग्री नकली पाई गई, इसलिए भोपाल स्थित NHM कार्यालय को नियुक्ति निरस्त करने के लिए पत्र लिखा गया है। नियुक्ति रद्द करने का अधिकार NHM भोपाल के पास है। असली योग्यता कुछ और, नौकरी MBBS डॉक्टर बनकर जांच में सामने आया कि डॉ. सचिन यादव के पास बीडीएस की असली डिग्री है। वह करीब पांच महीने पहले संजीवनी क्लिनिक में नियुक्त हुआ था। वहीं राजपाल गौर करीब एक साल से काम कर रहा था। उसके पास बीएचएमएस की डिग्री मिली है। हालांकि, दोनों के पास एमबीबीएस की डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का वैध रजिस्ट्रेशन नहीं था। आरोप है कि दोनों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में नौकरी हासिल की। रोज 30-40 मरीजों का करते थे इलाज सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या के मुताबिक, दोनों डॉक्टर हर दिन करीब 30 से 40 मरीजों का इलाज कर रहे थे। उन्होंने बताया कि संजीवनी क्लिनिक में केवल ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं और गंभीर मरीजों का इलाज वहां नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में ऐसा सामने नहीं आया है कि किसी मरीज को ऐसी दवा दी गई हो, जिससे जान का खतरा पैदा हुआ हो। दोनों डॉक्टरों को हर महीने 70 से 80 हजार रुपए तक वेतन दिया जा रहा था। तीनों सालभर से नौकरी कर रहे थे। वेबसाइट पर नहीं मिला रजिस्ट्रेशन डिग्रियों के सत्यापन के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करने पर संबंधित नामों से कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। जांच में पता चला कि डॉक्टरों द्वारा दिए गए नंबर किसी और व्यक्ति के नाम पर दर्ज थे। इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ और पुलिस जांच शुरू हुई। दमोह जिले के सभी डॉक्टरों की डिग्रियों की होगी जांच मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच के आदेश जारी किए हैं। सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार, शहर में कुल 6 संजीवनी क्लिनिक संचालित हैं, जिनमें 4 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें से दो डॉक्टर फर्जी पाए गए, जबकि दो की डिग्रियां सही मिली हैं। अब दमोह जिले में कार्यरत सभी रेगुलर, NHM और बॉन्ड वाले डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, जिला अस्पताल में 38, NHM में 15 और ब्लॉक स्तर पर करीब 28 डॉक्टर तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग सभी की डिग्रियों और रजिस्ट्रेशन की जांच कर रहा है। एसपी बोले- जल्द पकड़े जाएंगे असली सरगना एसपी आनंद कलादगी ने बताया- 16 मई 2026 को सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने फर्जी डॉक्टर्स के बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दमोह के 2 आरोपी डॉक्टर शनिवार रात गिरफ्तार किए गए। वहीं रविवार सुबह जबलपुर से तीसरे डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम भेजी गई है। फर्जी डिग्री तैयार करने वाले असली सरगना को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं। ……………………………………… यह खबर भी पढ़ें एक नाम-दो डॉक्टर, सरकारी अस्पताल में 15साल से फर्जी इलाज मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक ही एमबीबीएस डिग्री पर दो डॉक्टर 15 साल से ज्यादा समय से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। दोनों ने करोड़ों की सैलरी ली और सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ निजी क्लीनिक भी चलाए। सबसे चौंकाने वाली बात है कि विभाग को इसकी भनक नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…
