मध्यप्रदेश के सागर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय गढ़ा इटैया में सिर्फ 2 छात्राएं पढ़ रही हैं। इन दोनों के लिए 2 शिक्षक पदस्थ हैं। दोनों शिक्षकों को करीब 53-53 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। दोनों के वेतन पर हर महीने 1 लाख रुपए से अधिक खर्च हो रहा है। पिछले शैक्षणिक सत्र में स्कूल में कुल 6 विद्यार्थी थे। इनमें से 4 ने पांचवीं कक्षा पास करने के बाद दूसरे विद्यालयों में प्रवेश ले लिया। इसके बाद नए सत्र में छात्र संख्या घटकर 2 रह गई। दोनों छात्राएं चौथी और पांचवीं कक्षा में पढ़ रही हैं। स्कूल की तस्वीरें देखिए… चौथी में काव्या, पांचवीं में दिव्यांग अनन्या ग्रामीणों के अनुसार, नया शिक्षा सत्र 22 जून से शुरू होने के बाद कई दिन ऐसे भी रहे, जब स्कूल में एक भी छात्रा उपस्थित नहीं हुई। कक्षा चौथी में काव्या, पिता सुरेंद्र सिंह यादव और पांचवीं में दिव्यांग छात्रा अनन्या, पिता सोहन सिंह घोषी पढ़ रही हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक गोविंद सिंह घोषी और शिक्षक मेहरबान सिंह ठाकुर पदस्थ हैं। दोनों शिक्षकों का वेतन करीब 53-53 हजार रुपए प्रतिमाह है। स्कूल में बच्चों की संख्या कम होने की वजह केवल पांचवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों का दूसरे विद्यालयों में जाना नहीं है। स्कूल भवन जर्जर, गांव से करीब 1 किमी दूर स्कूल का भवन काफी जर्जर स्थिति में है। भवन की दीवारों और छत के कई हिस्सों की स्थिति खराब बताई जा रही है। विद्यालय गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है। छोटे बच्चों के लिए रोजाना इतनी दूरी तय करना परेशानी का कारण बनता है। बारिश में आने-जाने की समस्या और बढ़ जाती है। इस वजह से कई अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे विद्यालयों में भेजना पसंद कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा देने की क्षमता है, लेकिन भवन, मूलभूत सुविधाओं और स्कूल के वातावरण पर ध्यान नहीं दिया गया तो अभिभावकों का भरोसा कम होता जाएगा। ग्रामीण बोले- सुविधाएं सुधरें तो बढ़ सकती है छात्र संख्या ग्रामीणों ने विद्यालय की स्थिति की समीक्षा करने, भवन की मरम्मत कराने, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और छात्र संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने की मांग की है। विद्यार्थियों की संख्या इतनी ही कम रहती है तो शासन के नियमानुसार बच्चों को नजदीकी विद्यालय में समायोजित करने और शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में पदस्थ करने पर भी विचार किया जाए। बीआरसी बोले- जल्द दूसरी शाला में मर्ज करेंगे राहतगढ़ बीआरसी जगदीश प्रसाद पटेल ने बताया कि विद्यालय में छात्र संख्या बेहद कम है। जल्द ही स्कूल को दूसरी शाला में मर्ज कर लिया जाएगा। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। 1,895 सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इससे लाखों बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार पर असर पड़ रहा है। इंदौर के याचिकाकर्ता सौरभ त्रिपाठी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट होने के बावजूद प्रदेश के हजारों स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। इससे बच्चों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा असर याचिका में कहा गया है कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर भी दिखाई देता है। सत्र 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74% था, जो 2021-22 में घटकर 38.53% रह गया। ………………………………. यह खबर भी पढ़ें एमपी के 1895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे लाखों बच्चों का शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर…
