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1 लाख में खरीदी बच्ची, ‘मनहूस’ मानकर हाईवे पर फेंका:मूंदड़ा दंपती बोले- बिजनेस तबाह; तस्करी में इंदौर की पार्लर संचालिका समेत 6 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के राजगढ़ के एक कारोबारी ने ढाई साल की बच्ची को ‘मनहूस’ मानकर श्योपुर नेशनल हाईवे-552 पर फेंक दिया। अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है कि जिसे दंपती गोद लेने की बात कह रहा था, वह बच्ची दरअसल करीब 1 लाख रुपए में खरीदी गई थी। दंपती को लगता था कि बच्ची अशुभ है और उसे घर लाने के बाद कारोबार घाटे में जा रहा है। इसी अंधविश्वास में उन्होंने बच्ची को घर से बाहर छोड़ दिया, ताकि बिजनेस में फिर से तरक्की हो सके। श्योपुर पुलिस ने पेट्रोल पंप कारोबारी आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में दोनों ने अंधविश्वास के चलते यह कदम उठाने की बात कबूल की। मूंदड़ा परिवार राजगढ़ के बड़े व्यापारिक घरानों में गिना जाता है, जिनके पास कई पेट्रोल पंप और अन्य संपत्तियां हैं। इंदौर कनेक्शन से खुला सौदे का राज जांच में सामने आया कि बच्ची को कानूनी प्रक्रिया से गोद नहीं लिया गया था, बल्कि इंदौर में एक पार्लर संचालिका के जरिए सौदा किया गया था। पुलिस के मुताबिक, पार्लर संचालिका और उसके संपर्क में रहने वाली महिलाओं ने मिलकर बच्ची को करीब 1 लाख रुपए में दंपती को दिया। इस इनपुट के बाद श्योपुर पुलिस ने तीन टीमें बनाकर इंदौर में दबिश दी। यहां से पार्लर संचालिका समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क जरूरतमंद परिवारों या अवैध तरीके से बच्चों को हासिल कर उन्हें पैसों के बदले बेचता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि बच्ची को सबसे पहले किसने और किन परिस्थितियों में इस नेटवर्क तक पहुंचाया। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी बच्चों की खरीद-फरोख्त की है और इसके तार किन-किन शहरों तक जुड़े हैं। मामले में मानव तस्करी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धाराएं जोड़कर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। टोंक-चिरगांव नेशनल हाईवे पर लावरिस मिली थी बच्ची वारदात 18 अप्रैल की थी। श्योपुर के टोंक-चिरगांव नेशनल हाईवे पर सोंईकलां के पास ढाई साल की बच्ची लावारिस मिली थी। कम उम्र के कारण वह अपना पता या माता-पिता का नाम नहीं बता पाई। पुलिस ने बच्ची को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया, फिर उसे ‘वन स्टॉप सेंटर’ भेजा गया। स्थानीय लोगों ने पहचान के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया था। तस्वीरें देखने के बाद भोपाल की बबीता नाविक ने श्योपुर संपर्क किया। खुद को बच्ची की केयर टेकर बताया। पहले ये तस्वीरें देखिए… केयर टेकर बोली- बच्ची को पीटा जाता था केयर टेकर बबीता नाविक ने दैनिक भास्कर से बताया- भोपाल के एयरपोर्ट रोड में रहने वाले आकाश और कृतिका ने बच्ची को गोद लिया था। बच्ची को पीटा जाता था। कॉल करने वाली महिला ने खुद को भोपाल के लालघाटी का बताया था। भोपाल की केयर टेकर बबीता नाविक ने कई खुलासे किए। उनका दावा है कि खुद को बच्ची का पिता बताने वाला आकाश करीब एक महीने पहले उनके घर आया था। उसने बच्ची को अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया और कानूनी प्रक्रिया कराने की बात कही थी। तीन महीने की उम्र में बच्ची को गोद लिया बबीता के अनुसार, आकाश और कृतिका ने बच्ची को जब गोद लिया तो वह तीन महीने की थी। मुझे देखरेख के लिए 20 हजार रुपए महीने पर रखा गया था, लेकिन सैलरी नहीं मिली तो मैंने काम छोड़ दिया। बच्ची को कहां से लाए, यह नहीं बताया था। वे बच्ची को मारते-पीटते थे। परिवार से अलग रह रहा भाई आकाश मूंदड़ा के भाई अंकुश मूंदड़ा ने बताया कि पिछले पांच साल से उनका भाई परिवार से अलग रह रहा है। परिवार को यह तक जानकारी नहीं है कि उसने बच्ची को कब और कैसे गोद लिया। आकाश का घर आना-जाना बंद है। उनसे कोई संपर्क भी नहीं रहता। अंकुश ने बताया कि खुजनेर का पेट्रोल पंप उनके पास है, जबकि कुरावर का पंप उनका अपना है। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण आकाश के कुछ पेट्रोल पंप बंद हो गए। अगर वह परिवार से बात करता तो कोई समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन उसने कभी संपर्क नहीं किया। पहली पत्नी से एक बेटा, फिर बच्ची को गोद लिया उन्होंने यह भी बताया कि आकाश की पहली शादी 2010 में अहमदाबाद में हुई थी, जो करीब पांच साल बाद तलाक में बदल गई। पहली पत्नी से एक बेटा है, जो अब मां के साथ रहता है। इसके बाद आकाश ने कुरावर में दूसरी शादी की, लेकिन संतान न होने पर उसने एक बच्ची को गोद लिया था। बड़ा कारोबारी परिवार, कई पेट्रोल पंप और संपत्तियां मूंदड़ा परिवार राजगढ़ के बड़े व्यापारिक घरानों में गिना जाता है। परिवार के पास कई पेट्रोल पंप और अन्य व्यवसाय हैं। बंटवारे के बाद आकाश मूंदड़ा को कुरावर और खुजनेर में दो पेट्रोल पंप मिले थे। उनके कुरावर और भोपाल के कोहेफिजा में मकान होने की जानकारी भी मिली है। गोद लेने की प्रक्रिया की जांच शुरू श्योपुर की मानपुर पुलिस दंपती से पूछताछ कर रही है। साथ ही यह जांच हो रही है कि गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी थी या नहीं। अनियमितता मिलने पर आरोपियों पर अतिरिक्त धाराएं लगाई जा सकती हैं। यहां इस ग्राफिक के जरिए समझते चलें कि इस समय देश में गोद लेने की मौजूदा प्रक्रिया क्या है- अब यहां इस ग्राफिक के जरिए जान लीजिए देश में गोद लेने वाले लोगों के आंकड़ों पर-
………………………………….. यह खबरें भी पढ़ें 1. हाईवे पर फेंकी ढाई साल की मासूम…मानव तस्करी का शक श्योपुर में हाईवे पर ढाई साल की मासूम बच्ची को फेंकने के मामले में भोपाल में रहने वाली उसकी केयर टेकर बबीता नाविक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बबीता का दावा है कि खुद को बच्ची का पिता बताने वाला आकाश करीब एक महीने पहले उनके घर आया था। बच्ची को अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया था। पढ़ें पूरी खबर… 2. गोद ली बच्ची को पीटकर हाईवे पर लावारिस छोड़ा राजधानी भोपाल के एक दंपती ने ढाई साल की मासूम बच्ची को श्योपुर के पास छोड़ दिया। घटना 18 अप्रैल की है, लेकिन गुरुवार को श्योपुर पुलिस भोपाल आई और दंपती को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। पुलिस को मानव तस्करी की भी आशंका है, उस पर जांच की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…

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