सबसे पहले पढ़िए, भोपाल के दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से BJP विधायक भगवानदास सबनानी का तंज… मैं बुरे शब्दों में कह रहा हूं। शहर का नाश कर दिया हमने। बदले में शहर को हम कुछ नहीं दे पाए। कुछ भी नहीं। ये स्मार्ट सिटी है। MLA सबनानी ने यह बात जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी, ‘दिशा’ की मीटिंग में कहीं। 10 साल पहले शुरू हुए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को सरकार ने ही मॉडल बनाया था, उसे ही विधायक ने गलत बताया। दैनिक भास्कर ने विधायक के इस बयान का रियलिटी चैक किया तो तस्वीर साफ हुई। कई प्रोजेक्ट जमीन पर उतरे नजर आए तो कुछ खामियों और लापरवाही की वजह से बंद मिले।आईए सिलसिलेवार जानते हैं, भोपाल में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बारे में। साल 2016 में शुरुआत, 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च
भोपाल में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2026 में हुई थी। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए ABC (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) और पैन सिटी दो श्रेणियों में विकास होना था। टीटी नगर की 342 एकड़ जमीन पर एबीडी के तहत 3440.90 करोड़ रुपए में 70% आवासीय और 30% व्यावसायिक क्षेत्र के साथ नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांत के तहत साइकिल लेन, चौड़ी सड़कें, 24 घंटे बिजली व पानी का काम होना था। ऑटोमेटेड कचरा प्रबंधन, गैस आधारित पावर प्लांट, सौर ऊर्जा के प्लांट, स्मार्ट मीटरिंग, हाई स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट पार्किंग, और सीसीटीवी कैमरे से निगरानी आदि की व्यवस्था होनी थी। 875.70 करोड़ में पैन सिटी प्रोजेक्ट में शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आईटी बेस्ड साल्यूशन डेवलप किए जाना थे। रैंकिंग में फर्स्ट, बावजूद सवाल उठे
केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की रैंकिंग का एक सिस्टम बनाया है। फंड यूटिलाइजेशन के आधार पर यह रैंकिंग तय होती है। इस रैंकिंग में भोपाल हमेशा टॉप के शहरों में ही शामिल रहा। बावजूद सिस्टम पर हमेशा सवाल उठे हैं। पिछले 2 साल से मामला ज्यादा सुर्खियों में है। ये सुर्खियां जमीन के ऊपर आ चुके और कागजों में दबे दोनों ही तरह के प्रोजेक्ट शामिल हैं, जबकि 10 साल में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। आर्च ब्रिज, आवासीय फेज-1, स्मार्ट सड़क, स्मार्ट पार्क, अटल पथ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे भी हुए हैं, लेकिन कुछ अधूरे हैं या फिर उनमें कुछ खामियां हैं। खास बात यह है कि सभी प्रोजेक्ट सबनानी की विधानसभा में ही है। अब जानिए, प्रोजेक्ट और विधायक के सवाल 1. 13 मंजिला 3 आवासीय टॉवर, लेकिन मेंटेनेंस नहीं, लिफ्ट भी बंद
टीटी नगर में 116 करोड़ रुपए से 13-13 फ्लोर की 3 टॉवर बनाई गई है। जिसमें जी टाइप कुल 364 फ्लैट्स हैं। वहीं, 336 फ्लेट्स के 3 और टॉवर बन रहे हैं। कुल 6.34 एकड़ एरिया में 243.13 करोड़ रुपए होंगे। तीन टॉवर का पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकार्पण किया था। इसके बाद फ्लैट्स सरकारी कर्मचारियों को आवंटित किए गए। सीएम डॉ. यादव ने कैम्पस का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने की घोषणा भी की। जिम्मेदारों ने दावा किया कि टॉवर में वे सभी मूलभूत सुविधाएं होंगी, जो जरूरी है। हर टॉवर में दो लिफ्ट, अग्निशामक यंत्र, डोर कैमरे, पार्क, झूले भी लगाए गए, लेकिन जिम्मेदार मेंटेनेंस की एजेंसी तय करना भूल गए। विधायक सबनानी ने मीटिंग में लिफ्ट बंद होने का मुद्दा उठाया। साथ ही मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार तय नहीं होने की बात कही। इस पर स्मार्ट सिटी और पीडब्ल्यूडी अफसर एक-दूसरे का मुंह देखते रहे। विधायक सबनानी ने बताया कि जिस बिल्डिंग का लोकार्पण हुआ, उसका मेंटेनेंस नहीं हो रहा। लिफ्ट बंद हो गई। न स्मार्ट सिटी के अफसर अलर्ट है और न ही पीडब्ल्यूडी अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है। 2. हाट बाजार: पब्लिक यूटीलिटी के लिए जगह नहीं
स्मार्ट सिटी में 6499.75 स्क्वेयर मीटर एरिया में 417 दुकानें बनाई गई हैं। इस पर 48.66 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। तीन मंजिला की अलग-अलग बिल्डिंग बनाई गई। इस पर विधायक सबनानी का कहना है कि हाट बाजार तो बना दिया, लेकिन पब्लिक यूटीलिटी के लिहाज से कुछ नहीं है। पार्किंग कहां होगी? इसकी भी व्यवस्था नहीं है। इसे 3 मंजिला तक बना दिया गया। थर्ड फ्लोर पर दुकान का क्या करेंगे? यह प्लान ही गलत है। इधर, जवाहर चौक के व्यापारी अब भी दुकानों को तरस रहे हैं। जवाहर व्यापारी संघ के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने बताया, पूर्व कलेक्टर अविनाश लवानिया ने लिखकर दिया था कि प्लॉट नंबर- 47 और 49 पर दुकानें बनाकर दे रहे हैं। इसकी कीमत 6-6 लाख रुपए रहेगी। हमने 25-25 हजार रुपए जमा भी कर दिए। इस बात को आज 7 साल बीत चुके हैं, लेकिन दुकानें नहीं मिली हैं। जिस हॉट बाजार की बात कह रहे हैं, उसमें सब्जी वालों की दुकानें लगेंगे। छोटी-छोटी शॉप बनी हैं। हम निगम के आवंटी 140 दुकानदार हैं। 3. दशहरा मैदान पर 31 करोड़ रुपए खर्च होंगे, लेकिन अधूरा
31 करोड़ रुपए की लागत से स्मार्ट दशहरा मैदान बन रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमी है। ये टीटी नगर एरिया में ही है। यहां पर सालाना मेला लगता है। वहीं, दशहरे पर रावण दहन कार्यक्रम भी किया जाता है। अब तक काम पूरा नहीं होने की वजह से मैदान आसामाजिक तत्वों का अड्डा भी बन गया है। अफसरों का कहना है कि दशहरा मैदान के लिए तीन बार टेंडर कॉल हो चुके हैं। वर्तमान में भी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इस पर विधायक ने कहा कि करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए हैं, लेकिन दशहरा मैदान की तस्वीर नहीं बदल सकी है। 4. 5 एकड़ तक के प्लॉट, कोई खरीदार नहीं
स्मार्ट सिटी एरिया में कुल 42 प्लॉट हैं। इनमें से 18 ही बिके हैं। जानकारी के अनुसार, प्लॉट बेचकर ही प्रोजेक्ट पूरा किया जाना है, लेकिन रेरा समेत कई अड़चनों की वजह से प्लॉट बिक नहीं सके। इन प्लॉटों का साइज 1 से 5 एकड़ तक है। जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। स्मार्ट सिटी के अफसरों का कहना है कि स्मार्ट सिटी एरिया को बड़े कमर्शियल एरिया में डेवलप किया जाना है। इसलिए इनकी प्लॉट साइज छोटी नहीं की है। वर्तमान में कई बड़े प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं। रेरा में नियुक्तियां नहीं होने की वजह से भी दो साल तक प्लॉट बेचने में दिक्कतें आईं। इधर, प्लॉट के मुद्दे पर विधायक की आपत्ति है। उनका कहना है कि बाकी बचे प्लॉट का क्या हो रहा है? इसकी कोई जिम्मेदारी ही नहीं बची है। यदि प्लॉट साइज छोटी हो जाए तो दवा, सराफा-कपड़ा बाजार यहां आ सकता है। 5. 5.36 करोड़ की साइकिलें धूल खा रही
अप्रैल 2018 में 5.36 करोड़ रुपए खर्च करके 500 साइकिलें खरीदी गई थी। इसके लिए होशंगाबाद रोड, स्मार्ट रोड पर ट्रैक भी बनाया गया है, लेकिन अब न सिर्फ साइकिलें बंद हो गईं, बल्कि ट्रैक भी उखड़ गया है। अब नए सिरे से एजेंसी तय की जा रही है। इसके चलते ट्रैक सुधारा जाएगा और फिर से चार रूट पर साइकिलें दौड़ाने का प्लान है। अब फिर से नए प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। जिसमें करोड़ों रुपए खर्च होंगे। विधायक ने इस प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए हैं। 6. सदर मंजिल को 17.13 करोड़ में संवारा
सदर मंजिल को कुल 17.13 करोड़ रुपए में संवारा गया है। पिछले साल सदर मंजिल को निजी हाथों में 30 साल के लिए सौंप दिया गया। हालांकि, स्मार्ट सिटी 80.19 लाख रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से किराया भी ले रहा है। 30 साल में 38.34 करोड़ रुपए मिलेंगे। यहां पर पहले पार्किंग की समस्या थी, जिसे हल करना बताया जा रहा है। फैल हो गई 5 करोड़ की स्मार्ट डस्टबिन
5 करोड़ रु. खर्च करके शहर में अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाईं गईं। लगने के बाद इन डस्टबिन की हकीकत सामने आई कि इनमें कचरा मिक्स हो रहा है। ऑटोमेटिक ढक्कन खुलने और बंद होने जैसी बातें भी शिगूफा निकलीं। बाद में स्वच्छ भारत मिशन की गाइडलाइन के बाद इसे मुक्त रखा था। यानी, ये कोई काम की नहीं निकली। ऐसे में यह डस्टबिन फैल हो गई। भोपाल में यह 100 बनने थे, इसकी जगह 30 बन सके थे। हजारों पेड़ों की कब्र पर बनी स्मार्ट सिटी
पूरे स्मार्ट सिटी एरिया में पहले 6000 से ज्यादा पेड़ थे। इनमें से ज्यादातर पेड़ यहां रहने वाले सरकारी कर्मचारियों ने ही लगाए थे। इन्हें काट दिया गया। हां, सजावट के लिए अटल पथ के दोनों ओर पौधारोपण जरूर हुआ है। खाली सरकारी मकानों पर हो रहे कब्जे
नॉर्थ-साउथ टीटी नगर मिलाकर 1000 सरकारी मकान खाली कराए। कर्ट्सी, प्लेटिनम प्लाजा और पीएचई विभाग के ऑफिस के पास से भी विस्थापन हुआ, लेकिन कई जगहों पर फिर अवैध कब्जा हो रहा है। 40 करोड़ की अटल पथ पर ड्रेनेज नहीं
40 करोड़ की बुलेवर्ड स्ट्रीट पर सरफेस ड्रेनेज तक का ध्यान नहीं रखा गया है। सरफेस ड्रेन के होल साइकिल ट्रैक पर हैं। इस वजह से बारिश का पानी सड़क पर बहता है और वह खराब हो जाती है। इस बार भी ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। कई जगहों से सड़क उखड़ रही है। लगातार बारिश होने से आगे दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी। भोपाल प्लस एप और स्मार्ट पोल दोनों फेल
स्मार्ट सिटी की शुरुआत में पहला प्रोजेक्ट शहर में 100 स्मार्ट पोल लगाने का था। इन स्मार्ट पोल से केवल स्ट्रीट लाइट मिल रही है। ई-व्हीकल चार्जिंग, वाई-फाई और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सुविधाओं का कोई अता-पता नहीं है। यह खबर भी पढ़ें… BJP विधायक बोले- स्मार्ट सिटी ने भोपाल का नाश कर दिया भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को दिशा की बैठक में मास्टर प्लान लागू नहीं होने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। वहीं, स्मार्ट सिटी को लेकर भी सवाल उठाए गए। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा, स्मार्ट सिटी ने भोपाल का नाश कर दिया। बड़ी-बड़ी इमारतें बना दीं, लेकिन उनमें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। लिफ्ट में लोग फंस चुके हैं, कम्युनिटी हॉल तक नहीं बनाया गया और दशहरा मैदान का भी सत्यानाश कर दिया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं, क्योंकि बड़े प्लॉट नहीं बिक रहे हैं। इससे खरीदार बढ़ेंगे और स्मार्ट सिटी की आय भी बढ़ेगी। पढ़े पूरी खबर
