ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग और नियमों की धज्जियां उड़ाने के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन द्वारा पेश की गई पालन प्रतिवेदन (एक्शन टेकन) रिपोर्ट पर गहरी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने दो टूक कहा है कि “हम सब जानते हैं कि स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जा रहा है। प्रशासन कागजी आंकड़े न दिखाए, कार्रवाई धरातल और सड़कों पर दिखनी चाहिए।” कोर्ट ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया कि वर्ष 2017 के आदेश के तहत नियमित स्टेटस रिपोर्ट पेश की जानी थी, लेकिन 2019 के बाद से कोई रिपोर्ट दाखिल ही नहीं की गई। अदालत ने चेतावनी दी कि प्रशासन को जगाना कोर्ट का काम नहीं है; यदि अधिकारी सतत पालन का शपथ-पत्र पेश नहीं करते, तो यह सीधे तौर पर अवमानना का मामला बनता है। कोर्ट में पेश की गई यह एक्शन रिपोर्ट अवधेश सिंह भदौरिया द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आरटीओ और पुलिस प्रशासन की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें यह बताया गया है। प्रभारी SP ने मांगा समय, कहा- जमीनी सुधार दिखेगा सुनवाई के दौरान ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है। उन्होंने कोर्ट से अगली सुनवाई तक का समय मांगते हुए भरोसा दिलाया कि वे इस व्यवस्था की निरंतर निगरानी करेंगे और जमीनी स्तर पर ठोस नतीजे पेश करेंगे। ग्वालियर ही नहीं, संभाग के 9 जिलों में बदतर हालात याचिकाकर्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने कोर्ट का ध्यान ग्वालियर संभाग के अन्य जिलों की ओर भी आकर्षित कराया। उन्होंने बताया कि स्कूली वाहनों की यह खतरनाक स्थिति सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं है, बल्कि संभाग के अन्य 9 जिलों में भी व्यवस्था बेहद खराब है और प्रशासनिक निगरानी न के बराबर है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्षों को अपने सुझाव लिखित में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
