भोपाल में 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForTwisha तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग इंस्टाग्राम, एक्स और व्हॉट्सएप पर लोग ट्विशा से जुड़े पोस्ट शेयर कर रहे हैं। ट्विशा की फैमली इंस्टग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स न्याय की मांग कर रही है। इसके बाद कई बड़े क्रिएटर्स भी इस अभियान से जुड़ गए हैं। अब तक 6 हजार से ज्यादा लोग एक्स पर और इंस्टाग्राम पर 4 हजार से ज्यादा लोग #JusticeForTwisha लिख चुके हैं। लेकिन ‘Justice For Twisha’ जैसे अभियान चलते कैसे हैं? क्या इनके पीछे एक पूरी टीम काम करती है? और क्या इसमें पैसे भी खर्च होता है? जानिए एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ‘Justice For —’ जैसे अभियान चलते कैसे हैं? जवाब: ‘Justice for — या ऐसे अभियानों की शुरुआत लोकल लेवल से होती है। शुरुआत में परिवार, दोस्त और आसपास के लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो शेयर करते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे दूसरे यूजर्स भी इससे जुड़ने लगते हैं। जब बड़ी संख्या में लोग एक ही हैशटैग या कीवर्ड के साथ पोस्ट करने लगते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम उसे ट्रेंड मानने लगता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन पोस्ट्स पर कम समय में ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट आते हैं, एल्गोरिदम उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचाता है। सुशांत सिंह राजपूत अभियान में भी ऐसा ही हुआ था। शुरुआत में लोग सिर्फ CBI जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन बाद में लाखों यूजर्स एक ही हैशटैग के साथ पोस्ट करने लगे। इसके बाद #CBIForSSR और #BoycottBollywood जैसे हैशटैग भी ट्रेंड करने लगे। सवाल-2: क्या इनके पीछे कोई बड़ी टीम काम करती है? जवाब: ऐसे अभियानों के पीछे हमेशा कोई बड़ी टीम हो, ऐसा जरूरी नहीं। कई बार लोग भावनात्मक रूप से किसी मामले से जुड़ जाते हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट, वीडियो या हैशटैग शेयर करने लगते हैं। वहीं, कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स व्यूज और रीच बढ़ाने के लिए ऐसे मुद्दों पर वीडियो, पोस्ट और रिएक्शन कंटेंट बनाते हैं। कई रिसर्च बताती हैं कि ऐसे अभियानों में ऑनलाइन नेटवर्क, फैन कम्युनिटी, इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल प्रमोशन की बड़ी भूमिका होती है। कई मामलों में ऐसे ट्रेंड्स टीम बनाकर चलाए जाते हैं। चुनावों के दौरान राजनीतिक दल अपनी छवि मजबूत करने के लिए ऑनलाइन नेटवर्क, फैन पेज और बड़े इन्फ्लुएंसर्स का सहारा लेते हैं। डिजिटल प्रमोशन के जरिए किसी मुद्दे या व्यक्ति को लगातार सोशल मीडिया पर बनाए रखने की कोशिश की जाती है। SSR मामले पर हुई स्टडी में सामने आया था कि आम यूजर्स ही नहीं, बल्कि राजनीतिक चेहरे भी इस मुद्दे से जुड़े रहे। ट्विटर पर ट्रेंड बनाए रखने के लिए लगातार नए एंगल और नए नाम जोड़े जाते रहे, जिससे अभियान लंबे समय तक सोशल मीडिया पर बना रहा। सवाल-3: क्या ऐसा अभियानों में पैसे भी खर्च होते हैं? प्राइम पीआर के फाउंडर के मुताबिक, कुछ मामलों में ऐसे सोशल मीडिया अभियानों को ‘पुश’ करने के लिए लाखों रुपए तक खर्च किए जाते हैं। हालांकि, हर अभियान पेड नहीं होता। कई कैंपेन पूरी तरह ऑर्गेनिक भी होते हैं, जहां लोग खुद भावनात्मक रूप से जुड़कर पोस्ट और वीडियो शेयर करने लगते हैं। SSR केस में मुंबई पुलिस ने दावा किया था कि जांच को प्रभावित करने के लिए 80 हजार से ज्यादा फेक अकाउंट्स बनाए गए। पुलिस के मुताबिक, ये अकाउंट्स अलग-अलग देशों से ऑपरेट हो रहे थे और #JusticeForSSR जैसे हैशटैग्स के जरिए अभियान चलाया जा रहा था। मुंबई पुलिस ने इसे संगठित और ‘मोटिवेटेड कैंपेन’ बताया था। कई बार ऐसे कैंपेन बड़े स्तर पर चलाए जाते हैं। बिग बॉस में हिस्सा लेने वाले कंटेस्टेंट्स की सोशल मीडिया टीम काम करती है। ये सोशल मीडिया पर माहौल बनाती है। बड़े यूट्यूब और इंस्टाग्राम क्रिएटर्स से वोटिंग की अपील कराई जाती है, ताकि सोशल मीडिया पर उनके पक्ष में नैरेटिव बना रहे। ये खबर भी पढ़ें… एक्ट्रेस ट्विशा की डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटें भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मामले ने तूल पकड़ लिया है। एम्स भोपाल की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बॉडी पर मल्टीपल चोटों के निशानों का जिक्र है। ट्विशा के परिजन शुरुआत से हत्या की आशंका जता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें….
