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सोनिया बोलीं- गाजा में बच्चों को खत्म करने की कोशिश:भारत अकेला जिसने चुप्पी साधी; दुनिया इजराइल से दूर जा रही, भारत पास

कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर मोदी सरकार के स्टैंड पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, ‘संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट बताती है कि इजराइल गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करने के इरादे से बच्चों को निशाना बना रहा है। इतनी गंभीर रिपोर्ट आने के बाद भी मोदी सरकार चुप है।’ सोनिया ने लिखा कि इस आयोग की अगुआई अब भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में जारी 94 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल की कार्रवाई का मकसद गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करना है और इसके लिए बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। सोनिया बोलीं- रिपोर्ट में बच्चों पर हमलों के बड़े दावे सोनिया बोलीं- भारत अकेली आवाज, जिसने चुप्पी साधी सोनिया गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया में इजराइल के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा में हुई तबाही को गंभीरता से देख रहा है, तब भारत सरकार अकेली ऐसी आवाज बन गई है, जिसने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि जस्टिस एस. मुरलीधर की रिपोर्ट पर भी मोदी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने अपने लेख में जस्टिस मुरलीधर के दिल्ली हाईकोर्ट से तबादले का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उनका तबादला उस समय हुआ था, जब उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों से पहले BJP नेताओं के कथित भड़काऊ बयानों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत कभी उपनिवेशवाद के खिलाफ एक मजबूत आवाज था। देश राष्ट्रीय संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय शांति और विकासशील देशों के साथ एकजुटता की नीति के लिए जाना जाता था। लेकिन आज भारत वैश्विक नियमों के खुले उल्लंघन, ग्लोबल साउथ के लोगों की पीड़ा और गाजा व पश्चिमी तट में मानव गरिमा पर हो रहे हमलों के प्रति उदासीन दिखाई दे रहा है। सोनिया बोलीं- इजराइल को अमेरिका का सपोर्ट सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि इजराइल के ऐसे बयानों के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार के समर्थन ने इजराइल को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का मौका दिया। हालांकि दुनिया के बाकी देशों का जमीर जागा है और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज तेज होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के विरोध की वजह से संयुक्त राष्ट्र कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका, लेकिन उसकी एजेंसियों ने इजराइल के कथित युद्ध अपराधों का डिटेल डॉक्यूमेंटेशन किया। उन्होंने लिखा कि फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देशों ने दशकों की उदासीनता के बाद फिलिस्तीन को मान्यता दी है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत के पुराने सहयोगी दक्षिण अफ्रीका ने 1948 के नरसंहार सम्मेलन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मामला दायर किया। कई यूरोपीय देशों ने इजराइल को हथियारों की बिक्री पर रोक या प्रतिबंध लगाए। कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इजराइल से अपने कूटनीतिक संबंध घटा दिए या खत्म कर दिए। सोनिया ने 5 साल की बच्ची हिंद रजब का जिक्र किया सोनिया ने अपने आर्टिकल में पांच साल की फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब का जिक्र किया। उन्होंने लिखा… हिंद रजब की कहानी गाजा की त्रासदी की सबसे दर्दनाक मिसाल है। हिंद अपने परिवार के साथ गाजा सिटी से निकल रही थी, तभी इजराइली सैनिकों ने उनकी कार पर 335 गोलियां चलाईं। उसके छह परिजनों की मौके पर ही मौत हो गई। हिंद कई घंटे तक कार में अपने परिजनों के शवों के बीच फंसी रही, जबकि पैरामेडिक्स उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे। बाद में हिंद और उसे बचाने पहुंचे दो पैरामेडिक्स भी मारे गए। सोनिया ने लिखा कि भारत के लोगों को हिंद रजब और गाजा के हजारों दूसरे बच्चों की कहानी जानने का अधिकार है। इजराइल की संवेदनशीलता का हवाला देकर इस घटना पर बनी फिल्म को भारत में कई महीनों तक रोके रखा गया और भारी सार्वजनिक दबाव के बाद ही उसे मंजूरी मिली। सोनिया ने लिखा- दुनिया इजराइल से दूर जा रही, लेकिन भारत पास सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी सिर्फ नैतिक रूप से गलत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के लिहाज से भी समझ से परे है। भारत ऐसे समय में इजराइल के और करीब जा रहा है, जब दुनिया का बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब कुछ ही दिनों बाद इजराइल ने ईरान पर हमला किया और वहां के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की हत्या हुई। इतिहास इस फैसले को एक हैरान करने वाले रणनीतिक कदम के रूप में याद करेगा। सोनियां बोलीं- पाकिस्तान ने स्थित का फायदा उठाया सोनिया गांधी ने लिखा कि भारत की चुप्पी का फायदा पाकिस्तान ने उठाया है। उसने खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की, जबकि भारत अपने पुराने संबंधों की वजह से स्वाभाविक रूप से यह भूमिका निभा सकता था। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने रणनीतिक हितों और नैतिक मूल्यों दोनों से समझौता किया, लेकिन बदले में उसे सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दोस्ती मिली। उन्होंने लिखा कि नेतन्याहू आज अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में आलोचना का सामना कर रहे हैं। भारतीय राष्ट्र की भावना यह मांग करती है कि भारत फिलिस्तीनी भाइयों-बहनों, खासकर बच्चों के समर्थन में आवाज उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित भी यही कहते हैं कि भारत गाजा में इजराइल की कार्रवाई और पश्चिमी तट में लाखों फ़िलिस्तीनी परिवारों के विस्थापन और बेदखली के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाए। ………………… सोनिया गांधी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सोनिया बोलीं-खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी से हैरानी: यह न्यूट्रल रहना नहीं, जिम्मेदारी से पीछे हटना; यह पीएम की ईरान पर हमले की अनदेखी कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। 2 मार्च 2026 को उन्होंने कहा था कि दिल्ली की चुप्पी हैरान करने वाली है, यह तटस्थता (न्यूट्रल) नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। पूरी खबर पढ़ें…

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