सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और फूल-पत्ती चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग (EC) को तीन महीने में फैसला देने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने विवाद को सुलझाने के लिए छह महीने का समय देने का अनुरोध किया था। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने दोनों गुटों को चार हफ्ते में अपनी दलीलें पूरी करने को कहा है। यह आदेश ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उन्होंने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें TMC के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल रोक दिया गया था। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम और चिन्ह दिए बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। टीएमसी के दोनों गुटों ने असली नाम और सिंबल पर चुनाव लड़ने की मांग की थी। EC ने 17 सितंबर को ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया। आयोग ने 18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न दिया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ दिया गया है। 6 अक्टूबर को उपचुनाव, नए सिंबल पर लड़ेंगे उम्मीदवार पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। दोनों गुटों ने एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे। कोर्ट के नाम-सिंबल फ्रीज करने के बाद अब उम्मीदवार नए चिह्नों पर चुनाव लड़ेंगे।
