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सिंगर राहगीर बोले- बचपन की याद है ‘बाल-भास्कर’:पैसे बचाकर खरीदता था, राजनांदगांव में ‘ये जो हंस रही है दुनिया’ पर झूमे लोग

मशहूर सिंगर और गीतकार राहगीर शुक्रवार को राजनांदगांव पहुंचे, ‘काव्य कुंभ’ में उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से ऑडिटोरियम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। दैनिक भास्कर डिजिटल से बातचीत में उन्होंने न केवल अपने संगीत के सफर और छत्तीसगढ़ से जुड़े एक्सपीरियंस को शेयर किया। राहगीर ने बचपन से जुड़े ‘दैनिक भास्कर’ और ‘बाल भास्कर’ के उस अनमोल रिश्ते को भी उजागर किया, जिसने उन्हें गांव से निकलकर शब्दों का ‘राहगीर’ बनने में मदद की। उन्होंने बताया कि, बचपन में अखबार के साथ रविवार को ‘बाल भास्कर’ भी आता था। मैं हफ्ते दर हफ्ते उसका पूरा कलेक्शन रखता था। काव्य कुंभ के मंच पर जब राहगीर हाथ में गिटार थामकर उतरे, तो दर्शकों का उत्साह सातवें आसमान पर था। उन्होंने अपने कई बेहद लोकप्रिय गीतों और कविताओं से समां बांध दिया। कार्यक्रम में राहगीर ने अपने कई चर्चित गीत और कविताएं सुनाईं। काव्य कुंभ की देखिए तस्वीरें… इन गीतों पर झूमे दर्शक, जमकर बजाईं तालियां ‘ये जो हंस रही है दुनिया… राहगीरा मिला कबीर से’, ‘मेरे गांव आओगे… क्या जयपुर क्या दिल्ली’ और ‘ठोकरों के ढाबे… कन्या मान्या कुर्रर्र’ जैसे बेहद चर्चित गीतों की प्रस्तुति पर ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। परफॉर्मेंस के दौरान फ्रंट रो से लेकर आखिरी कतार तक मौजूद सभी दर्शक और युवा राहगीर की धुनों पर उनके साथ एक सुर में गुनगुनाते नजर आए। अब पढ़िए राहगीर का पूरा इंटरव्यू। सवाल: राहगीर जी, आपको राजनांदगांव आकर कैसा लगा? राहगीर: बहुत ही बढ़िया लगा। अभी जब मैं यहां बस पहुंच ही रहा था, तो रास्ते में मुझे बहुत सुकून मिला क्योंकि ज्यादा ट्रैफिक जाम नहीं था। अभी पहुंचते-पहुंचते मैं देख रहा था कि रास्ते में ज्यादा ट्रैफिक नहीं मिला। यहां की सड़कें सचमुच बहुत शानदार हैं और शहर में कदम रखते ही आप जैसे प्यारे और अच्छे लोग मिल गए। राजनांदगांव को लेकर मेरा पहला इम्प्रैशन (अनुभव) बेहद लाजवाब और शानदार रहा है। सवाल: आपके गानों के देश में करोड़ों दीवाने हैं। आप अपने संगीत में ऐसा क्या ‘चमत्कार’ करते हैं कि लोग आपके मुरीद हो जाते हैं? राहगीर: (मुस्कुराते हुए) चमत्कार जैसा कुछ भी नहीं है । बस इतनी सी बात है कि जो भी मेरे मन में आता है, या किसी भी परिस्थिति को लेकर जो मेरी अपनी एक फीलिंग (भावना) होती है, उसे मैं बिना किसी लाग-लपेट के, जितनी हो सके उतनी ईमानदारी (ऑनेस्टली) के साथ और सीधा-सीधा शब्दों में कह देता हूं। बस जो मन में आता है, जो अपनी एक अच्छी फीलिंग होती है किसी भी चीज को लेकर, उसे हम जितना हो सके उतनी ईमानदारी (ऑनेस्टली) से और सीधा-सीधा कह देते हैं। मेरी बस हमेशा यही कोशिश रहती है कि दिल से दिल की बात की जाए, और शायद यही वजह है कि वह बात सीधे लोगों के दिलों को छू जाती है। सवाल: आपका अब तक का सबसे फेवरेट सॉन्ग कौन सा है, जिसे लोग सबसे ज्यादा प्यार देते हैं? राहगीर: मेरा एक गीत है “एक कच्चा घड़ा हूं मैं”, जिसे लोगों का बहुत ज्यादा प्यार मिलता है। अगर आपकी इजाजत हो, तो मैं इसकी कुछ खास पंक्तियां आपके दर्शकों के लिए गुनगुनाना चाहूंगा। “एक कच्चा घड़ा हूं मैं, फिर भी बरसात में खड़ा हूं मैं… बूंदें बेरहम हैं, उनको ये वहम है कि मैं टूट रहा हूं, जो मैं चीख रहा हूं… पर वो बेवकूफ़ हैं, मैं तो सीख रहा हूं… ऐसे पहले भी लड़ा हूं मैं…” सवाल: आप मूलतः राजस्थान के रहने वाले हैं। आप ‘दैनिक भास्कर’ को किस नजरिए से देखते हैं? राहगीर: यह बहुत ही खूबसूरत सवाल है। मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे यहां बचपन से हम दैनिक भास्कर पढ़ रहे हैं। दैनिक भास्कर के साथ तो मेरी बचपन की एक बेहद खास और अनमोल यादें जुड़ी हुई है। बचपन में रविवार (संडे) के दिन इसके साथ बच्चों के लिए ‘बाल भास्कर’ आया करता था। मुझे बाल भास्कर को पढ़ने और उसका कलेक्शन करने का एक अजीब सा पागलपन और बहुत शौक था। चूंकि हम बहुत छोटे और सुदूर गांव में रहते थे, तो हमारे घर पर सीधे अखबार नहीं आता था। लेकिन जिस टाउन (कस्बे) में हम पढ़ाई करने जाते थे, वहां की दुकान पर यह अखबार मिलता था। बचपन में जब हमें घर से खाने-पीने या ‘चीज’ (स्नैक्स) के लिए एक-दो रुपए मिलते थे, तो मैं उन पैसों को खर्च करने के बजाय बचाकर रख लेता था और रविवार का बेसब्री से इंतजार करता था कि कब टाउन जाऊंगा और ‘बाल भास्कर’ खरीदूंगा। मैं हफ्ते दर हफ्ते उसका पूरा बंडल और कलेक्शन संभाल कर रखता था। दैनिक भास्कर के साथ मेरा जीवन का सबसे पहला और बेहद खूबसूरत जुड़ाव यही है। 6-7 जून को रायपुर में कार्यक्रम अब आज यानी 6 जून और 7 जून को रायपुर के केपीएस डूंडा, कमल विहार परिसर में कार्यक्रम का अगला चरण होगा। यहां देशभर के नामी कवि, शायर, लेखक, कलाकार और संगीतकार एक मंच पर जुटेंगे। आयोजकों के मुताबिक, इस बार काव्य कुंभ स्पर्धा, संगम, संवाद, सफर, संदेश, सुरूर और संगत जैसे सात प्रमुख विषयों पर आधारित रहेगा। कार्यक्रम में उर्दू के प्रसिद्ध शायर वसीम बरेलवी, कवि और लेखक आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता पंकज झा, लोक गायक मामे खान, कबीर कैफे, राहगीर, हेली शाह, अमनदीप ख्याल, जुबैर अली ताबिश, मनिका दुबे और छत्तीसगढ़ से पद्मश्री अनुज शर्मा शामिल होंगे। रायपुर में पहले दिन संवाद और संगीत का संगम आज (6 जून) रायपुर में कार्यक्रम की शुरुआत ‘संवाद’ सत्र से होगी। इसमें पंचायत वेब सीरीज से चर्चित अभिनेता पंकज झा और पद्मश्री अनुज शर्मा शामिल होंगे। इसके बाद हेली शाह और अमनदीप ख्याल अपनी परफॉर्मेंस देंगे। वहीं शाम को युगम बैंड और लोक गायक मामे खान रंग जमाएंगे। दूसरे दिन मुशायरा और कवि सम्मेलन कल यानी 7 जून को ‘संगम’ के तहत मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। इसके बाद आलोक श्रीवास्तव की ‘आलोकनामा’ प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम का समापन कबीर वाणी और संगीत आधारित प्रस्तुति के साथ किया जाएगा। 87 साल के वसीम बरेलवी सुनाएंगे अनुभव और शायरी उर्दू शायरी की दुनिया के बड़े नाम वसीम बरेलवी काव्य कुंभ का प्रमुख आकर्षण रहेंगे। उनकी गजलें और शेर देश-विदेश के मुशायरों में खूब पसंद किए जाते हैं। हाल ही में उनका चर्चित शेर “उसूलों पर जहां आंच आए…” फिल्म जवान के गीत में भी इस्तेमाल हुआ था। कार्यक्रम में वे अपनी चुनिंदा गजलें सुनाने के साथ साहित्य और रचनात्मक जीवन के अनुभव भी साझा करेंगे। ‘आलोकनामा’ में सुनाएंगे संघर्ष की कहानी कवि और लेखक आलोक श्रीवास्तव ‘आलोकनामा’ में अपने जीवन के संघर्ष, साहित्यिक सफर और यादगार एक्सपीरियंस को शेयर करेंगे। आलोक की रचनाओं को जगजीत सिंह और एआर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकार भी अपनी आवाज और संगीत दे चुके हैं। सोशल मीडिया पर पहुंचेगी 1000 नई कविताएं आयोजकों का कहना है कि ‘काव्य कुंभ’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की पहल भी है। इस बार 1000 नई कविताओं को संग्रहित कर सोशल मीडिया रील्स के जरिए युवाओं तक पहुंचाया जाएगा, ताकि सकारात्मक और रचनात्मक कंटेंट को बढ़ावा मिल सके। 8 शहरों से 500 एंट्री, 50 कवियों को मिलेगा मुख्य मंच पर मौका काव्य कुंभ के लिए इस बार प्रदेश के 8 शहरों में ऑडिशन आयोजित किए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक अब तक करीब 500 प्रतिभागियों की एंट्री प्राप्त हुई है। फिलहाल सभी प्रविष्टियों की ऑनलाइन स्क्रीनिंग की जा रही है। स्क्रीनिंग के बाद चुने गए 50 कवियों को काव्य कुंभ के मुख्य मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा। इनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 2 कवियों को पुरस्कार भी दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस बार आदिवासी भाषाओं में भी बड़ी संख्या में कविताएं प्राप्त हुई हैं। इन प्रस्तुतियों के लिए कार्यक्रम में विशेष स्लॉट रखा गया है, ताकि क्षेत्रीय और जनजातीय साहित्य को भी मंच मिल सके। कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे स्मृति में दिया जाएगा पुरस्कार आयोजकों ने बताया कि, इस काव्य कुंभ के मंच पर छत्तीसगढ़ी कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी परफॉर्मेंस दी थी। इस बार उनके सम्मान में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा जाएगा। साथ ही सर्वश्रेष्ठ युवा कवि को डॉ. सुरेंद्र दुबे स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि काव्य कुंभ के पिछले सीजन को लोगों ने काफी पसंद किया था। कविता और शायरी के इस मंच पर हर उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया। पिछले आयोजन में सौरभ द्विवेदी, रजा मुराद, राहगीर, अजहर इकबाल और कई कलाकारों ने प्रस्तुति दी थी। टिकटें ऑनलाइन उपलब्ध काव्य कुंभ में शामिल होने के लिए दर्शक Bookmyshow से टिकट बुक कर सकते हैं। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम को लेकर साहित्य और संगीत प्रेमियों में काफी उत्साह है। काव्य कुंभ में शामिल होंगे ये कलाकार

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