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सतना पुलिस ने गुम किए अहम सबूत, आरोपी बरी:वन रक्षक परीक्षा फर्जीवाड़ा में कोर्ट का फैसला; एसपी को जांच के निर्देश

सतना में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार यादव की अदालत ने वन रक्षक परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले एक अभ्यर्थी को दोषमुक्त कर दिया है। कोलगवां थाना पुलिस अदालत में जब्ती के महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश नहीं कर पाई, जिसके चलते अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। मामले में अहम सबूत गुम होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) को जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरोपियों के अधिवक्ता अरुण सेन ने बताया कि यह पूरा मामला एक निजी स्कूल में आयोजित वन रक्षक परीक्षा से जुड़ा है। तत्कालीन केन्द्राध्यक्ष सुभाषचंद्र जैन ने कोलगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि असली परीक्षार्थी हेमंत गौतम की जगह सुदीप राय नाम का युवक परीक्षा दे रहा था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 468, 120बी और मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम की धारा 3/4 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। चालान पेश हुआ, लेकिन फाइल से गायब थे मूल दस्तावेज
जांच के दौरान पुलिस ने आरएएसए (RASA) फॉर्म, प्रवेश पत्र, हस्ताक्षर के नमूने और परीक्षा से जुड़े अन्य अहम दस्तावेज जब्त किए थे। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट में अभियोग पत्र (चालान) पेश किया था। हालांकि, साक्ष्य प्रस्तुत करने के दौरान अदालत ने पाया कि जब्त किए गए महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज प्रकरण की फाइल में संलग्न ही नहीं थे। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को कई बार पत्र लिखकर ये दस्तावेज तलब किए, लेकिन कोलगवां पुलिस इन्हें पेश करने में नाकाम रही। फॉरेंसिक लैब से आ गए थे सबूत, थाने से हुए गुम
कोर्ट के नोटिस के जवाब में 17 दिसंबर 2025 को कोलगवां थाना प्रभारी ने एक पत्र (क्रमांक 2327/2025) के माध्यम से जानकारी दी कि दस्तावेज फॉरेंसिक जांच के लिए भोपाल भेजे गए थे। वहीं, फॉरेंसिक विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये सभी दस्तावेज 14 जून 2013 को ही वापस कर दिए गए थे। इसकी बाकायदा थाने के रिकॉर्ड में एंट्री भी दर्ज है, इसके बावजूद फाइल से सबूत गायब मिले। संदेह का लाभ देकर किया बरी, एसपी को भेजी फैसले की कॉपी
अदालत ने मामले का गहनता से परीक्षण करने के बाद पाया कि थाना पुलिस मुख्य दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने में विफल रही है। इसके चलते कोर्ट ने मामले में संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया। महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गुम होने की इस लापरवाही को कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायाधीश ने फैसले की एक प्रति सतना एसपी को भेजते हुए पूरे मामले का संज्ञान लेने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सबूत गुम होने के मामले की जांच की जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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