ग्वालियर-चंबल अंचल में एक बार फिर राजनीतिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन के नामकरण को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर समर्थकों के बीच खींचतान तेज हो गई है। यह मुद्दा अब स्थानीय से निकलकर संसद तक पहुंच गया है।
ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह (तोमर गुट) ने रेल बजट चर्चा के दौरान 17 मार्च 2026 को ग्वालियर की कनेक्टिविटी और विकास के मुद्दे उठाने के साथ इस रेलवे स्टेशन का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने की मांग उठाई। उनके प्रस्ताव पर सदन में कई सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन भी किया। सिंधिया खेमे की ओर से ‘माधवराव’ पर चर्चा वहीं सिंधिया खेमे की ओर से पहले से ही माधवराव सिंधिया के नाम पर स्टेशन का नामकरण करने की चर्चा चल रही है। हालांकि आधिकारिक मांग नहीं आई, लेकिन समर्थक इसे लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसका समर्थन करते हुए सिंधिया परिवार के करीबी नेता बाल खांडे का कहना है कि स्व. माधवराव सिंधिया ने रेल मंत्री रहते ग्वालियर रेलवे स्टेशन के उनके योगदान भुलाया नहीं जा सकता। दूसरी ओर भाजपा के दो गुटों में नाम को लेकर चल रही खींचतान पर कांग्रेसियों का कहना है कि ग्वालियर नाम में क्या खराबी है। यही तो हमारी पहचान है इसे बदलने का क्या मतलब। 535 करोड़ का प्रोजेक्ट, काम अब भी अधूरा मंच भी अलग-अलग, सियासी दूरी साफ
सिंधिया और तोमर गुट के बीच दूरी अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नजर आ रही है। हाल ही में मोहन यादव की मौजूदगी में हुए कार्यक्रमों में दोनों गुटों के नेता एक साथ नजर नहीं आए। कई मौकों पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के मंच से दूरी बनाई। केंद्रीय मंत्री सिंधिया व विधानसभा अध्यक्ष तोमर गुट कार्यक्रमों में भी मंच साझा नहीं करते हैं। हाल ही में प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में घाटीगांव में आयोजित लाड़ली बहना योजना के राज्य स्तरीय सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष और ग्वालियर सांसद शामिल नहीं हुए। जानकारों का कहना है कि सांसद कुशवाह के लोकसभा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था। इससे पहले ग्वालियर सांसद ने तिघरा के कुलैथ में किसान सम्मेलन कराया था। जिसमें सीएम डॉ. मोहन यादव आए थे। लेकिन केन्द्रीय मंत्री सिंधिया शामिल नहीं हुए। इसके अलावा सिंधिया व सांसद के बीच पत्रों की होड़ भी खूब चर्चा में रह चुकी है। अटलजी से सबसे लोकप्रिय नेता
दैनिक भास्कर से बात करते हुए ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि मैंने सिर्फ अपनी नहीं ग्वालियर की जनता की मांग संसद में रखी है। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर ही नहीं पूरे देश व विश्व के लोकप्रिय नेता थे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन की सौगात व विकास में उनका बहुत हाथ है। ग्वालियर की पहचान अटलजी के नाम से है तो रेलवे स्टेशन का नाम उनके नाम पर क्यों नहीं हो सकता।
कांग्रेस का तंज- नाम नहीं, काम पर ध्यान दें
कांग्रेस प्रवक्ता राम पांडेय ने कहा कि “ग्वालियर नाम ही पहचान है, इसे बदलने की क्या जरूरत है?” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सवा तीन साल से स्टेशन का काम पूरा नहीं हुआ, लोगों को वहां परेशानी हो रही है। पर यह किसी को नहीं दिखाई दे रहा है। लेकिन नेताओं को नाम बदलने की राजनीति ज्यादा दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ बोले- ग्वालियर नाम ही रहे
वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली का कहना है कि ग्वालियर का नाम गालव ऋषि से जुड़ा है और यह शहर की पहचान है। नेताओं को नाम बदलने की बजाय विकास कार्य जल्द पूरा कराने पर ध्यान देना चाहिए।
