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शिखा केस के 6 ऑडियो: जहर का घूंट पिया-धोखा सहा:MLA के पूर्व PA का सवाल-नंबर ब्लैकलिस्ट क्यों?, पति बोला-पत्नी के पीछे क्यों पड़े हो

“मेरे साथ इतना बड़ा धोखा हुआ… जहर का घूंट पीकर खुद को जिंदा रखा, सब सहकर भी मैं चुप रहा।” रीवा के बहुचर्चित शिखा मिश्रा सुसाइड केस में सामने आई यह बातचीत अब पूरे मामले को नया मोड़ दे रही है। सुसाइड से पहले मृतका के पति विकास पांडेय और उनकी सास के बीच हुई इस बातचीत में विकास करीब पांच मिनट तक फफक-फफककर रोता रहा और मानसिक पीड़ा बयां करता सुनाई देता है। इधर, मामले में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक गिरीश गौतम के पूर्व निज सहायक पुष्पेंद्र गौतम का नाम भी सामने आने से केस हाईप्रोफाइल हो गया है। पति और पूर्व पीए के बीच हुई 5 कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स सामने आए हैं, जिनमें दबाव और धमकी जैसे आरोप लग रहे हैं। ऑडियो में पुष्पेंद्र गौतम, मृतका शिखा के पति विकास पांडेय से बातचीत करते सुनाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान विधायक के पीए धमकी देते हुए “अब तुम बचा लो” कह रहे हैं। वो यह भी कह रहे हैं कि मेरा नंबर शिखा के मोबाइल पर ब्लैक लिस्ट में क्यों डाला। इसी बातचीत में पति विकास पांडेय यह भी कहते सुनाई देते हैं—“क्या आप लोग हमारी जान ले लोगे?” इन सभी वायरल ऑडियो की पुष्टि भास्कर नहीं करता है। पहले जानिए पूरा मामला… दो माह पहले फंदे पर मिला था शिखा का शव मामला रीवा के सामान थाना क्षेत्र का है। 25 जनवरी की रात शहर के संजय नगर में शिखा मिश्रा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर लटका मिला था। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे शुरुआत से ही घटना पर सवाल उठते रहे। बताया गया कि घटना के समय पति विकास पांडेय सतना में थे। शिखा मूल रूप से बमुरिहा की रहने वाली थीं, जबकि विकास प्रयाग के बड़ोखर के निवासी हैं। शादी को करीब एक साल ही हुआ था और दोनों रीवा के संजय नगर में रह रहे थे। घटना के एक महीने बाद मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पति विकास पांडेय और उनके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि सास अभी फरार बताई जा रही हैं। शिखा के सुसाइड से पहले सास-दामाद की बातचीत, फफक-फफककर रोया पति विकास : हैलो… हां मम्मी, बोलिए… शिखा ने विधानसभा से लेकर कॉलेज तक में नौकरी की बताया गया कि शिखा मिश्रा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक गिरीश गौतम के अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान विधानसभा में पदस्थ रहीं। बाद में नौकरी समाप्त होने पर वे सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय महाविद्यालय, देवतालाब में आउटसोर्स लैब टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत थीं। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिखा लगातार मानसिक दबाव में थीं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। वायरल ऑडियो सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि क्या इस पूरे मामले में किसी बाहरी दबाव की भी भूमिका थी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व निज सहायक पुष्पेंद्र गौतम का नाम और कथित धमकी भरे ऑडियो सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे शिखा के ससुराल पक्ष पर लगातार दबाव क्यों बना रहे थे और शिखा से बातचीत के लिए इतना जोर क्यों डाल रहे थे। पहले से विवादों में रहने के कारण इस एंगल की गंभीरता और बढ़ गई है। जांच और पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल मामले में पुलिस जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर परिजनों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हुई, वहीं वायरल ऑडियो और कॉल डिटेल्स की गहन जांच को लेकर स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से जांच की निष्पक्षता पर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि पुलिस ने सभी पहलुओं की जांच की बात कही है। देवतालाब कॉलेज में पदस्थ एक कर्मचारी की संदिग्ध मौत के बाद अब कार्यस्थल के माहौल और संभावित मानसिक दबाव भी जांच के दायरे में हैं। वायरल ऑडियो, राजनीतिक कनेक्शन और गंभीर आरोपों के चलते शिखा मिश्रा डेथ मिस्ट्री अब एक साधारण आत्महत्या का मामला नहीं रह गया, बल्कि हाईप्रोफाइल केस बन चुका है। अब पढ़िए पूर्व पीए पुष्पेंद्र और शिखा के पति विकास के 5 ऑडियो की बातचीत के अंश… पहला ऑडियो- आप शिखा को टॉर्चर कर रहे हैं दूसरा ऑडियो-बार-बार फोन क्यों कर रहे हैं तीसरा ऑडियो- तो क्या मुझे जान से मार दोगे चौथा ऑडियो- जाओ थाने में FIR करा दो पांचवा ऑडियो- अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा सामने आए ऑडियो की होगी जांच: सीएसपी रीवा सिटी के सीएसपी राजीव पाठक ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक कार्रवाई मायके पक्ष के बयानों के आधार पर की जाती है और अब तक उसी आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जो ऑडियो और कुछ नाम सामने आए हैं, उनकी भी जांच की जाएगी। मामले की विवेचना लगातार जारी है। भाई-भतीजे जेल में, घर पर ताला विकास के चाचा ने बताया कि उनका पूरा ध्यान अब भाई और भतीजे को जेल से बाहर लाने पर है। उनका कहना है कि दोनों के जेल जाने से घर पूरी तरह उजड़ गया है। घर में कोई नहीं है, ताला पड़ा है और परिवार सामान्य जिंदगी से दूर हो गया है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं उनके निर्दोष भाई और भतीजे फिर से सामान्य जीवन जी सकें। पड़ोसियों का दावा—घर में घुसे थे बाहरी लोग नाम न बताने की शर्त पर पड़ोसियों ने बताया कि मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण मोहल्ले में डर का माहौल है और लोग खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उनका दावा है कि एक दिन बड़ी संख्या में बाहरी लोग पांडेय परिवार के घर में घुस गए थे और जमकर मारपीट की थी। आरोप है कि महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। विधायक ऑफिस से कहा-पुष्पेंद्र निज सहायक नहीं इस मामले में गिरीश गौतम के कार्यालय की ओर से कहा गया कि पुष्पेंद्र गौतम वर्तमान में उनके निज सहायक नहीं हैं। वे पहले उनके कार्यकाल में पदस्थ थे, लेकिन अब केवल पुराने पारिवारिक संबंधों के चलते आना-जाना है। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण से विधायक का कोई लेना-देना नहीं है और राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनका नाम जोड़कर छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में पुष्पेंद्र गौतम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इधर…ब्राह्मण समाज ने CBI जांच की मांग उठाई, CM को सौंपा ज्ञापन बहुचर्चित “शिखा कांड” को लेकर मामला एक बार फिर गरमा गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, मध्यप्रदेश ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया कि एक जनसंपर्क सहायक की भूमिका संदिग्ध है और उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ वर्ष 2008 में थाना सिविल लाइन, रीवा में धारा 294, 323, 506, 34 के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा 2010 में थाना गढ़ क्षेत्र में धारा 279 और 337 के तहत एक अन्य प्रकरण भी दर्ज है। संगठन का कहना है कि हाल ही में सामने आए ऑडियो-वीडियो में कथित तौर पर धमकी भरी बातचीत सामने आई है। संगठन ने आशंका जताई कि वायरल रिकॉर्डिंग्स के आधार पर पीड़िता को आत्महत्या के लिए उकसाने या किसी गंभीर आपराधिक घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि पीड़िता के पति और माता-पिता के जेल में होने से दबाव में कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष पंडित पुष्पेंद्र मिश्रा के हस्ताक्षर से सौंपा गया। संगठन ने यह रखीं हैं चार प्रमुख मांगें

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