Homeमध्यप्रदेशविधायक ने जिसे ‘साजिश’ बताया वो भाजपाइयों का ही गुस्सा:80 शिकायतों के...

विधायक ने जिसे ‘साजिश’ बताया वो भाजपाइयों का ही गुस्सा:80 शिकायतों के बाद भी नहीं बनी 3 किमी सड़क, इसलिए भड़के लोग

दो दिन पहले नीमच जिले की जावद विधानसभा के बांगरेड़ गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में ग्रामीण पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को घेरकर सड़क की मांग करते नजर आए। नाराज ग्रामीणों ने विधायक पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए, जबकि विधायक ने भी तीखे अंदाज में जवाब दिया। माहौल तनावपूर्ण हो गया। विधायक ने इसे राजनीतिक साजिश बताया।
भास्कर ने जब ग्राउंड जीरो पर लोगों से बात की तो पता चला कि ये राजनीतिक साजिश का नहीं बल्कि लोगों की नाराजगी का मामला है। आखिर क्या नाराजगी है? और राजनीतिक साजिश बताने पर अब ग्रामीणों की क्या प्रतिक्रिया है इस रिपोर्ट में पढ़िए… बांगरेड़ गांव में प्रवेश करते ही स्कूल की दीवार पर बना ‘आई लव बांगरेड़’ स्ट्रक्चर नजर आता है। हालांकि गांव के भीतर हालात इस तस्वीर से अलग दिखते हैं। ग्रामीण तुलसीराम और घीसालाल बताते हैं कि गांव में सड़क, पेयजल और नालियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। घरों का गंदा पानी सीधे रास्तों पर बहता है, जिससे कीचड़ और बदबू फैलती है। बारिश के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं। गांव के अंदर उबड़-खाबड़ रास्ते और उनमें जमा गंदगी साफ दिखाई देती है। नालियां नहीं होने से सड़कें ही गंदे पानी की निकासी का जरिया बन गई हैं। तीन दिन में आता है पीने का पानी मंदिर के पास बैठे बुजुर्ग बंशीलाल बताते हैं कि गांव में पेयजल संकट भी गंभीर है। तीन-तीन दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई होती है। गांव के पुराने कुएं से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचता था, लेकिन कुआं क्षतिग्रस्त होने के कारण वह व्यवस्था भी बंद है। ग्रामीणों का दावा है कि कुएं की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन काम नहीं हुआ। स्थिति यह है कि कई महिलाओं को खेतों से दो-दो किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। नया स्वास्थ्य केंद्र बना, लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं करीब पांच हजार आबादी वाले बांगरेड़ गांव को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए गांव के बाहर नया उप स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है, जिसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर नाम दिया गया है। यहीं से विवाद शुरू हुआ। 22 जून को स्वास्थ्य केंद्र के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे विधायक ओमप्रकाश सकलेचा से ग्रामीणों ने पूछा कि अस्पताल तो बन गया, लेकिन यहां तक पहुंचेंगे कैसे? केंद्र के सामने का रास्ता कच्चा है और बारिश में कीचड़ से भर जाता है। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क के बिना अस्पताल का लाभ कैसे मिलेगा। इसी सवाल पर विधायक और ग्रामीणों के बीच बहस बढ़ गई। विधायक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लौट गए, लेकिन घटना का वीडियो वायरल हो गया। आखिर ये सड़क इतनी अहम क्यों है? स्वास्थ्य केंद्र के आसपास मौजूद युवकों ने बताया कि सड़क की समस्या सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं है। गांव के खेड़ा और नई आबादी क्षेत्र में करीब 200 से अधिक घर हैं, जिनके लिए यही मुख्य मार्ग है। ग्रामीण श्याम सिंह बताते हैं कि करीब 30 बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। बारिश में रास्ता इतना खराब हो जाता है कि पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक ने सड़क निर्माण का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
उनका कहना है कि रात में किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। एंबुलेंस भी अंदर तक नहीं आ पाती। शिकायतों की लंबी फेहरिस्त, फिर भी समाधान नहीं गांव के विकास और श्रवण बताते हैं कि सड़क निर्माण के लिए वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक ग्रामीण 80 से अधिक बार सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। वे बताते हैं कि कलेक्टर, विधायक, एसडीएम और तहसीलदार सहित अन्य अफसरों को करीब 20 ज्ञापन दिए जा चुके हैं। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन सड़क नहीं बनी। विरोध करने वालों को बताया जा रहा कांग्रेसी घटना के बाद गांव में राजनीतिक माहौल भी गर्म है। सड़क की मांग उठाने वाले कुछ युवाओं का आरोप है कि उन्हें कांग्रेस समर्थक बताकर बदनाम किया जा रहा है। विकास और श्रवण का कहना है कि वे भाजपा कार्यकर्ता रहे हैं और चुनावों में पार्टी के लिए काम भी करते रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि उन्होंने सड़क की मांग उठाई तो उन्हें राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनवाने का वादा चुनाव के दौरान किया गया था और अब वे सिर्फ उसी वादे की याद दिला रहे हैं। “10 डंपर रेत डालकर सड़क दिखा देते हैं” ग्रामीणों का आरोप है कि अफसरों को जमीनी हकीकत नहीं दिखाई जाती। निरीक्षण से पहले रास्ते पर रेत डाल दी जाती है और उसे ही सड़क बताकर अफसरों को दिखा दिया जाता है। अफसर गांव के अंदर जाकर हालात देखने की बजाय मुख्य चौराहे से ही लौट जाते हैं। इसी वजह से कागजों में सड़क बनी हुई दिखाई देती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। कलेक्टर ने नहीं दिया जवाब सीएम हेल्पलाइन शिकायतों और ग्रामीणों के आरोपों को लेकर नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वॉट्सएप पर भेजे गए सवालों का भी कोई जवाब नहीं मिला। विधायक बोले- मीडिया ने गलत तस्वीर पेश की विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने कहा कि कार्यक्रम लगभग 40 मिनट तक चला और पूरी तरह संपन्न हुआ। उनके अनुसार कार्यक्रम के बाद कुछ लोगों ने सड़क का मुद्दा उठाया, जिस पर उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर घोषणा की जाएगी। सकलेचा का दावा है कि विरोध करने वाले लोग पूर्व नियोजित तरीके से आए थे और बहस के लिए तैयार लग रहे थे। राजनीतक साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की धक्कामुक्की नहीं हुई और मीडिया के कुछ हिस्सों ने घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। उन्होंने कहा कि जावद क्षेत्र में स्वास्थ्य और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। कुछ समस्याएं पंचायत स्तर की हैं, जिनमें विधायक केवल सहयोग कर सकते हैं। हालांकि सीएम हेल्पलाइन शिकायतों और ज्ञापनों की संख्या पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here