तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को पहले दिन नए विधायकों को शपथ दिलाई गई। इस दौरान दो वाक्ये देखने को मिले। पहला- सीएम विजय के ड्राइवर के बेटे ने विधायक की शपथ ली, तो इस दौरान उन्होंने पेपर पर साइन करने से पहले विजय से पूछा। दूसरा- तमिलनाडु की सबसे युवा विधायक एस. कीर्तना सदन में जब विधायक की शपथ लेने आईं, तो अपनी जीत का सर्टिफिकेट भूल गईं। जिससे उन्हें पोडियम से वापस जाना पड़ा। तमिलनाडु में 10 मई को नई सरकार बनी है। एक्टर से नेता बने TVK चीफ जोसेफ विजय नए मुख्यमंत्री बने हैं। एस कीर्तना उन्हीं की कैबिनेट में इकलौती महिला मंत्री भी हैं। पहला वाक्या: ड्राइवर के बेटे ने परमीशन मांग, विजय मुस्कुराए TVK चीफ विजय ने अपनी पार्टी से ड्राइवर राजेंद्रन के बेटे सबरीनाथन को विरुगंबकम से टिकट दिया था। सबरीनाथन ने यहां 27 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने DMK उम्मीदवार प्रभाकर राजा AMV और AIADMK के विरुगई VN रवि को हराया। सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में सबरीनाथन विधायक पद की शपथ लेने पहुंचे, तो सीएम विजय वहीं बगल में बैठे हुए थे। सबरीनाथ ने शपथ पत्र पढ़ा और फिर पेपर में साइन करने से पहले इशारे से विजय से पूछा- क्या मैं साइन कर दूं। विजय ने बिना कोई जवाब दिए बस हल्की सी स्माइल की। फिर सबरीनाथन ने सभी पेपर पर साइन कर दिए। 34 साल से विजय के साथ जुड़े हैं उनके ड्राइवर दूसरा वाक्या: विजय कैबिनेट की महिला मंत्री सर्टिफिकेट ही भूलीं 29 साल की एस कीर्तना ने 10 मई को सीएम विजय के साथ कैबिनेट में मंत्री के तौर पर शपथ ली थी। सोमवार को उनको सदन में विधायक की शपथ लेनी थी। शिवाकाशी से TVK विधायक को विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने पोडियम पर ही रोक दिया। दरअसल वे जीत का सर्टिफिकेट लाना भूल गईं थीं। अधिकारियों ने कहा, “जब भी वह अपना चुनाव प्रमाण पत्र जमा करेंगी, तब वह शपथ ले सकती हैं।” हालांकि दो घंटे बाद उन्होंने जरूरी काबज जमा कर शपथ ली। कीर्तना ने शिवाकाशी से कांग्रेस उम्मीदवार अशोकन जी को 11,670 वोटों से हराया। जबकि पूर्व मंत्री और AIADMK नेता के.टी. राजेंद्रबालाजी तीसरे स्थान पर रहे। कीर्तना सबसे युवा और पढ़ी-लिखी मंत्री… ————————— AIADMK के 30 विधायक विजय के साथ आना चाहते हैं: पलानीसामी के साथ सिर्फ 17 नेता; दो गुटों में बंट सकती है पार्टी तमिलनाडु में AIADMK पार्टी में फूट पड़ती नजर आ रही है। इस बार चुनाव में AIADMK केवल 47 सीटें ही जीत पाई। एक गुट पलानीसामी का है जिनके समर्थन में 17 नेता हैं। वहीं दूसरा गुट वेलुमणि का है जिनके पास 30 विधायकों का साथ है। पूरी खबर पढ़ें…
