मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। राज्यसभा के चुनाव में कांग्रेस के साथ हो गया बड़ा ‘खेल’
जिसका डर था, बेदर्दी वही बात हो गई… कांग्रेस के साथ मानो फिल्मी गाने की इस लाइन वाला ही सीन बन गया। जिन राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की जीत को कांग्रेस नेता 500 प्रतिशत तय बता रहे थे, उनका नामांकन ही निरस्त हो गया। तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप में मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश और राज्यसभा सीट की सीधी-सीधी डकैती करार दिया। वहीं भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम में एक नया ट्विस्ट जोड़ दिया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- ‘जिस आधार पर हमने आपत्ति लगाई, उसके दस्तावेज हमें किसने दिए? हमारे पास कहां से आए? कांग्रेस की स्थिति आप समझ सकते हैं। हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी है।’ अब विजयवर्गीय के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि कहीं कांग्रेस के साथ ‘घर का भेदी लंका ढाए’ वाला मामला तो नहीं हो गया? वैसे राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर भाजपा ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति बनाई हुई थी। विजयवर्गीय ने तो यहां तक दावा किया कि अगर चुनाव होते, तब भी भाजपा प्रत्याशी महेश केवट ही जीतते। सीएम भी कह चुके थे कि जब तक विजय प्राप्त नहीं होती, चैन से नहीं बैठेंगे। कांग्रेस का आरोप- भाजपा ने लोकतंत्र का चीरहरण किया
इधर, पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद राज्यसभा सीट हाथ से निकल जाने के घटनाक्रम ने कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है। पार्टी सदमे में भी है और आक्रोश में भी। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर लोकतंत्र का चीरहरण करने और सीट चुराने का आरोप लगाया है। साथ ही इस मामले को अदालत में चुनौती देने की बात भी कही है। इस बीच कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक हैरान करने वाला वाकया हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिग्विजय सिंह से मीडिया को संबोधित करने का आग्रह किया, लेकिन दिग्विजय सिंह ने बोलने से इनकार कर दिया। कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद वे बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की व्याख्याएं हो रही हैं। कोई इसे राजनीति का अनिश्चित गणित बता रहा है, तो कोई ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की नीति का सफल प्रयोग। आखिर इस खेल में कौन-सा दांव चल गया, इसका जवाब शायद भाजपा के रणनीतिकार ही बेहतर दे सकें। इतना जरूर है कि राज्यसभा की यह लड़ाई अभी खत्म होती नहीं दिख रही। अदालत से लेकर सियासी मंचों तक, इसकी गूंज कुछ समय और सुनाई दे सकती है। घटिया निर्माण देखकर बिना फीता काटे लौटे केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक एक निर्माण कार्य का उद्घाटन करने पहुंचे थे, लेकिन वहां जो नजारा उन्होंने देखा, उसे देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। स्थिति ऐसी बनी कि मंत्री ने उद्घाटन किए बिना ही वहां से लौटना उचित समझा। दरअसल, उद्घाटन के पहले मंत्री के सामने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खुल गई। उन्होंने मौके पर फर्श में दरारें देखीं, कई जगह फर्श उखड़ा हुआ मिला और निर्माण की हालत देखकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने फीता नहीं काटा और वहां से चले गए। मंत्री ने अधिकारियों को बुलाकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- आज जैसा मेरा दिमाग कभी खराब नहीं हुआ। जितना घटिया क्वालिटी का काम हो सकता है, वैसा हुआ है। मंत्री के इस बयान ने साफ कर दिया कि वे निर्माण कार्य की गुणवत्ता से बिल्कुल संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी जमकर फटकार लगाई और घटिया निर्माण को लेकर जवाब-तलब किया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि सार्वजनिक धन से होने वाले कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सरकार के मंत्री ही सार्वजनिक मंचों पर व्यवस्थाओं की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। चलती बैठक में एसी बंद, पसीना-पसीना हो गए नेता लोग
भोपाल नगर निगम की बैठक के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब बीच बैठक में ही एयर कंडीशनर (एसी) बंद हो गए। गर्मी और उमस के बीच बैठक में मौजूद पार्षदों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे हो गए कि पार्षदों ने राहत पाने के लिए बैठक के एजेंडा पेपर को ही पंखे की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बैठक कक्ष में मौजूद जनप्रतिनिधि कागज से हवा करते नजर आए, जिसका वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। इस घटना के बाद नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जिस संस्था पर शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी है, वह खुद अपनी बुनियादी व्यवस्था संभालने में संघर्ष करती दिखाई दे रही है। ‘सरकार’ को आया गुस्सा, बैठक ही कैंसिल कर दी
हाल ही में ‘सरकार’ ने एक विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई थी। लेकिन इसमें उस विभाग के मुखिया ही नहीं पहुंचे। उन्होंने अपनी जगह अपने अधीनस्थ एक अधिकारी को भेज दिया। जब ‘सरकार’ ने उस अधीनस्थ अधिकारी को देखा, तो पूछा कि आप यहां क्या कर रहे हैं। इस पर अधिकारी ने बताया कि उन्हें विभाग के मुखिया ने बैठक में भेजा है। यह सुनकर ‘सरकार’ कुछ खफा नजर आए और उन्होंने बैठक ही रद्द कर दी। खास बात यह है कि यह विभाग खुद ‘सरकार’ के ही पास है। वहीं, जो अधीनस्थ अधिकारी अपने मुखिया की जगह बैठक में पहुंचा था, उसकी भी ‘सरकार’ तक सीधी और बेरोक-टोक पहुंच मानी जाती है। अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि सब कुछ कर लेना, लेकिन ‘सरकार’ का इगो हर्ट नहीं होना चाहिए। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), ईश्वर सिंह परमार (भोपाल), शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़) ये भी पढ़ें –
मैं झुकेगा नहीं.. ‘पुष्पा’ गेटअप में महाकाल दर्शन: राज्यसभा चुनाव में ‘रामायण’ की एंट्री ‘मैं झुकेगा नहीं’.. फिल्म ‘पुष्पा’ का ये मशहूर डायलॉग आपने सुना होगा। उज्जैन में एक युवक ने इसी ‘पुष्पा’ अंदाज में मानो भगवान महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को चुनौती दे दी। पुष्पा के गेटअप में मंदिर पहुंचा युवक मानो यही संदेश देता दिखाई दिया कि चाहे जितने नियम बना लो, अपन झुकेगा नहीं। पूरी खबर पढ़ें
