राजधानी रायपुर के भाठागांव स्थित रावतपुरा कॉलोनी फेस-2 में बने 40 मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया है। बुधवार (16 सितंबर) सुबह नगर निगम ने यह कार्रवाई की। निगम के मुताबिक, यहां मकानों का निर्माण स्वीकृत लेआउट के बाहर बिना अनुमति किया गया था। बुलडोजर कार्रवाई से पहले संबंधित बिल्डरों और मकान मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद निगम जोन-6 की टीम 12 बुलडोजर लेकर मकानों को तोड़ने पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा। वहीं, कांग्रेस नेता कन्हैया अग्रवाल ने सवाल उठाया कि अगर जमीन का डायवर्सन हुआ, रजिस्ट्री हुई और सरकारी शुल्क जमा कर जमीन खरीदी गई तो बाद में मकान अवैध कैसे हो गए? उन्होंने कार्रवाई रोकने की मांग की है। पहले देखिए तस्वीरें… लेआउट के बाहर निर्माण, जलभराव की समस्या जोन-6 कमिश्नर हितेंद्र यादव के मुताबिक, इलाके में जलभराव, पानी, बिजली और नाली से जुड़ी शिकायतें भी मिली थीं। जांच के दौरान लेआउट के बाहर किए गए निर्माण सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। बिल्डरों ने आगे निर्माण नहीं करने का भरोसा दिया निगम का कहना है कि कार्रवाई के बाद संबंधित बिल्डरों ने लेआउट के बाहर आगे कोई निर्माण नहीं करने का भरोसा दिया है। मामले में आगे की कार्रवाई भी नियमानुसार की जाएगी। रावतपुरा फेस-2 में लेआउट के बाहर मकान निर्माण करने वाले बिल्डर्स और मकान मालिक
(रायपुर नगर निगम द्वारा नोटिस जारी) कांग्रेस ने कार्रवाई पर उठाए सवाल इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने विरोध जताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कार्रवाई रोकने और प्रभावित परिवारों के मकानों के नियमितीकरण की मांग की है। कांग्रेस बोली- जिम्मेदार अधिकारियों की भी जांच हो कांग्रेस नेता ने कहा कि, यदि कॉलोनी में अवैध प्लाटिंग या निर्माण हुआ है तो केवल मकान मालिकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने जमीन के डायवर्सन, रजिस्ट्री और निर्माण की अनुमति से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। फिलहाल रावतपुरा फेस-2 में निगम की कार्रवाई जारी है। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… नकटी गांव के विस्थापितों की खुले आसमान में कटी रात: लोग बोले- बिजली काटकर बुलडोजर चलाया, सांसद ने झूठ बोला; प्रभावितों से मिले भूपेश बघेल 3 महीने पहले रायपुर के नकटी गांव में तड़के 4 बजे अचानक बिजली काट दी गई और फिर बुलडोजर चलाकर 80 घरों को ढहा दिया गया। इसके बाद कई विस्थापितों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं। पढ़ें पूरी खबर…
