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राजिम दंगा…परिवारों ने गांव छोड़ा, बच्चों का स्कूल छूटा:पीड़ित बोले- हमलावरों ने पैर पर गिराकर नारे लगवाए, उम्मीद नहीं थी जिंदा बचेंगे

हम एक कमरे में छिपे हुए थे। बाहर की तरफ गाड़ियों के जलने और गैस सिलेंडर के फटने की आवाज आ रही थी। उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचेंगे। हमलावर आज भी सड़क पर खुले घूम रहे हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन का हमें सहयोग नहीं मिला। 1 फरवरी को गरियाबंद जिले के दुतकैया गांव में सांप्रदायिक हिंसा हुई। लड़कों के बीच आपस में हुए विवाद के बाद यह हिंसा भड़की थी। पहले पक्ष के तीन-चार लड़कों ने मिलकर दूसरे पक्ष के मंदिर में तोड़फोड़ की थी। इस बात से दूसरे पक्ष में नाराजगी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन दूसरे पक्ष की नाराजगी को बाहरी तत्वों ने हवा दी और नाराजगी सांप्रदायिक हिंसा में बदल गईं। इस हिंसा में एक समुदाय के गांव के करीब 10 से 11 घर जला दिए गए। हिंसा के बीच उन्हें गांव छोड़कर भागना पड़ा। यह समुदाय रायपुर के बैजनाथ पारा में शरण लिया है। इसमें लगभग 8 से 10 परिवारों के 40-50 लोग हैं, जिनमें करीब 17 बच्चे शामिल हैं। इनका स्कूल जाना बंद हो गया है। बच्चों के मुताबिक उनकी पढ़ाई पूरी तरह से बर्बाद हो गई। पीड़ित परिवारों ने कहा कि हमलावरों ने आंखों के सामने कुरानें जलाई और पैर पर गिराकर नारे लगवाए। इस रिपोर्ट में पढ़िए दुतकैया हिंसा की पूरी कहानी, पीड़ितों की जुबानी उस रात का खौफ और अब तक क्या हुई कार्रवाई:- पहले ये तस्वीरें देखिए… आखिरी बार 31 जनवरी को स्कूल गई थी छात्रा 8वीं में पढ़ने वाली आरु (परिवर्तित नाम) ने बताया कि वह पास के ही गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती है। वह आखिरी बार 31 जनवरी को स्कूल गई थी। इसके बाद अचानक हिंसा फैल गई। वह अपने परिवार के साथ रात में रायपुर आ गई। उन्हें पता चला कि लंबे समय तक स्कूल नहीं जा पाएंगे और हालात सामान्य होने में समय लगेगा। आरु ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। हिंसा के पहले उसके स्कूल में कई दोस्त थे, लेकिन अब उनसे बात नहीं हो पा रही है। आलिया (परिवर्तित नाम) ने बताया कि वह कक्षा छठवीं में पढ़ती है। पिछले डेढ़ महीने से उनका स्कूल जाना बंद है और केवल परीक्षा दिलाने के लिए ही स्कूल गए थे। घर पर उनकी पढ़ाई हो जाती थी, लेकिन यहां पढ़ना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। आलिया ने कहा कि वह चाहती है कि वे जल्दी अपने घर वापस जाए।
हमें पहले की तरह अपना घर वापस चाहिए 14 साल की अमाना (परिवर्तित नाम) ने बताया कि 1 फरवरी को हमारे गांव में जमकर तोड़फोड़ हुई। धमकी दी गई कि अगर बच्चे घर से बाहर जाकर स्कूल जाएंगे तो उन्हें मार दिया जाएगा। इसके बाद हमारे परिवार ने हमें रायपुर के बैजनाथ पारा स्थित मुस्लिम हॉल में ले आए। हम स्कूल में पेपर देने गए थे, लेकिन कोई दोस्त हमसे बात नहीं कर रहा था, सिर्फ हमारे टीचर ही हमसे बातचीत कर रहे थे। हमें यह बहुत बुरा लग रहा था। हम चाहते हैं कि हमारा घर पहले जैसा सुरक्षित हो और शांत माहौल फिर से लौटे, ताकि हम वहीं रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। मैं भी डॉक्टर बनना चाहती हूं। अमाना ने कहा कि दोपहर में हम घर के बाहर बैठे थे, तभी अचानक कुछ लोग दौड़ते हुए आए। उन्होंने कहा कि इन्हें छोड़ना नहीं है। वे पास के मदरसे में तोड़फोड़ करने लगे। हम लोग डरकर भागे और पड़ोस में भाभी के घर छिप गए। बाहर तोड़फोड़ और अश्लील गालियों की आवाजें आ रही थीं। कुछ घंटे बाद पुलिस वहां पहुंची और हमें बाहर निकाला। मेरे बड़े पापा को भी चाकू लगा था। इसके बाद हमारे जमात वाले हमें रायपुर ले गए। हमलावरों ने सबसे पहले कैमरे तोड़े शिना (परिवर्तित नाम) ने कहा कि वह दूतकैया गांव की रहने वाली है। 11वीं कक्षा में पढ़ती है। पापा और दादा काम पर बाहर जा रहे थे, तभी पता चला कि कुछ लोगों ने गांव की सड़क को बंद कर दिया और धमकी दी कि हमें बाहर निकलने नहीं देंगे। हमें लगा की विवाद को लेकर मीटिंग होगी। हम इंतजार करते रहे, लेकिन करीब पौने 4 बजे सैकड़ों की संख्या में लोग मोहल्ले की तरफ आने लगे। उन्होंने मदरसा और आसपास के मोहल्ले में लगे कैमरे तोड़ दिए, फिर घरों दरवाजे को पीटने लगे हम डर गए। धीरे-धीरे करके कई घरों के दरवाजे तोड़ने लगे और हमारे कुछ लोगों ने जब बातचीत करने की कोशिश की तो उन पर चाकू से हमला कर दिए। हम घर के अंदर एक कमरे में हम 9 लोग छिपे हुए थे। बाहर से दंगाइयों की आवाज आ रही थी। कुछ लोगों की आवाज जानी पहचानी लग रही थी। कुछ लोगों को चेहरे से जानते हैं। छोटे-छोटे बच्चों ने हमारे गाड़ियों को तोड़ा घरों पर आग लगा दी। आग जब फैल कर कमरों के अंदर आने लगी, तब धुएं की वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगी। हम सामने के कमरों से पीछे की तरफ भागे। बाहर की तरफ गाड़ियों के जलने और गैस सिलेंडर के फटने की आवाज आ रही थी। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचेंगे। सिर पर रॉड रखकर बोले भेजा निकाल देंगे शिना ने बताया कि हमलावर नारे लगा रहे थे। उन्होंने मेरी चाची के बेटे के सिर पर रॉड रखा और नारा लगाने के लिए कहा। कहने लगे अगर नारा नहीं लगाया तो तेरा भेजा निकाल देंगे। जबरन मेरे भाई को पैरों पर गिराकर नारा लगवाया। उन्होंने चाचा पर भी हमला करके घायल कर दिया था। पढ़ाई के लिए कोई समान नहीं शिना का कहना है कि वह पायलट बनना चाहती हैं, जिसके लिए पढ़ाई करना चाह रहे हैं, लेकिन यहां परेशानी हो रही है। सिर्फ पेपर दिलाने गए थे। टीचर और दोस्तों का व्यवहार तो ठीक था, लेकिन अन्य स्टूडेंट लोगों ने हमसे बात भी नहीं की। मैं चाहती हूं कि जिन लोगों ने हमारे साथ गलत किया उनको कड़ी से कड़ी सजा मिले। हमारे घरों का जो नुकसान हुआ है उसके लिए मुआवजा दिया जाए और हमें कड़ी सुरक्षा दी जाए। मेरे बचपन की बहुत सी यादें भी जल गई। वहीं, सैय्यदा कुरैशी ने कहा कि घटना की रात घर पर नहीं थी, रिश्तेदार के घर गई थी। मुझे फोन पर पता चला कि घरों को जला दिया गया है लोगों के साथ मारपीट हुई है। इस मामले में उनके बेटे को भी चाकू लगा था जो अस्पताल में एडमिट था। हमारे घर पर हमलावरों ने चोरी भी की मेरे गहने चुरा लिए गए। मेरे पांच कमरों का घर था, जिसे आग के हवाले कर दिया गया। हम चाहते हैं कि घर ठीक हो जाए वापस अपने गांव में रहेंगे। हम फोन पर मदद मांगते रहे लेकिन कोई नहीं पहुंचा यासमीन बेगम ने बताया कि विवाद के दिन वह घर का काम निपटाकर आराम कर रही थी, तभी कुछ लड़के जोर-जोर से गाली देते हुए घर के सामने से निकले। मैंने गांव के सदर (मजहब के मुखिया) को फोन लगाया। उन्होंने बताया कि लड़कों के बीच आपस में लड़ाई हुई है माहौल अच्छा नहीं है। कुछ देर बाद मेरे पति ने घर पर दौड़ते हुए हैं कहा कि बाहर दंगा हो रहा है। मुझे कुछ समझ नहीं आया। पास के ही खाली जगह पर भारी भीड़ इकट्ठी हो गई। वहां से आवाज आ रही थी कि इनके बीवी बच्चे सबको मारो किसी को भी नहीं छोड़ना है। सब अपने घर से तलवार और लाठी निकालो। यह सुनकर हम बुरी तरह डर गए। हमने बाहर भागने की सोची लेकिन रास्ते को चारों तरफ से बंद कर दिया। हमलावर बाहर से भी आए थे। हम चार परिवार के लोग एक घर पर छिप गए। एक कमरे में दर्जन भर बच्चे समेत हम लोग मौजूद थे बाहर से तोड़फोड़ और गाली गलौज की आवाज आ रही थी। मैं पुलिस को फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। फिर राजिम में एक रिश्तेदार को फोन किया तो उसने मदद के लिए जल्द आने की बात कही। लेकिन लंबे वक्त तक कोई नहीं आया। हमलावर 60-70 की संख्या में हमारे घरों में घुस गए। इनके हाथ में तलवार, सब्बल, चाकू डंडे जैसे हथियार थे। उन्होंने दरवाजा तोड़कर हमारे साथ खूब मारपीट की। गुनहगार को सजा मिले हम तो बेगुनाह थे पीड़ितों का कहना है कि जिन आरोपियों ने मारपीट और हिंसा की है, उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए। उनका सवाल है कि आखिर उनकी क्या गलती थी, जो उनके घरों को जला दिया गया, बच्चों के साथ मारपीट की गई और गंदी गालियां दी गईं। पीड़ितों ने बताया कि जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, वे गांव के स्थायी निवासी भी नहीं थे और उन्हें पहले ही गांव से बाहर निकाला जा चुका था। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि उनका राशन बंद कर दिया गया और इलाज की सुविधाएं भी रोक दी गईं। वे कहते हैं, “हम यह सजा क्यों भुगत रहे हैं?” महमूद्दीन कुरैशी ने बताया कि उनके साथ मारपीट करने वाले लोग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “घटना के दौरान क्राइम ब्रांच के अधिकारी मुझे रायपुर ले गए थे। इस दौरान लगातार रिश्तेदारों के फोन आ रहे थे और परिवार के लोग पूरी तरह परेशान थे। इस हिंसा में हमारा सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन हमें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली।

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