बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी के चलते 26 जून से अब तक 8 बच्चों की जान चली गई है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, लेकिन मौतों की असली वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है। टीम के मुताबिक, बीमार बच्चों में न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। हालांकि, यह रिपोर्ट कब तक आएगी, इस पर स्वास्थ्य विभाग कुछ भी बोलने से बच रहा है। अब तक इन बच्चों की गई जान देखिए, तीन तस्वीरें… सिविल सर्जन बोले- कई बीमारियों से जूझ रही थी प्रियंका सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बताया कि सभी बच्चे अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांवों के रहने वाले थे। 26 जून से 22 जुलाई तक बोंदारी निवासी भाई-बहन लमनिन और साहिल, पूजा, सचिन और कुंडेकसा निवासी प्रीति की मौत हुई। 6 अगस्त को अरविंद और 8 अगस्त को मंगली मरकाम की जान गई। प्रियंका धुर्वे को 9 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 11 अगस्त की रात उसने दम तोड़ दिया। बच्ची कई बीमारियों से जूझ रही थी और उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई थी। दिग्विजय का सीएम को खत- जांच कराएं, मुआवजा दें आदिवासी इलाकों में बच्चों की लगातार मौतों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की राज्यस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई करने और मृत बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मांग की है। दिग्विजय ने बीमार बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर और भोपाल के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराने और इलाज का पूरा खर्च सरकार की ओर से उठाने की बात भी कही है। ये खबर भी पढ़ें… सिरप पिलाते ही रोई मासूम, 10 मिनट बाद मौत धार में 14 महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि सरकारी अस्पताल की डॉक्टर ने जो सिरप लिखी, उसे पिलाने के कुछ देर बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया। मामला निसरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। परिजन के हंगामे के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। पढ़ें पूरी खबर…
