मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। सियासी स्टंट या मजबूरी? सड़क पर उतरे मंत्री
ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि कोई मंत्री अपनी ही सरकार के रहते मांगें मनवाने के लिए सड़क पर उतर जाए। लेकिन आलीराजपुर में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मंत्री नागर सिंह चौहान किसानों की मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। उन्होंने किसानों के साथ नारे लगाए और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांगें पूरी करने की गुहार लगाई। दरअसल, आलीराजपुर जिले में कम बारिश के कारण फसलों पर संकट मंडरा रहा है। फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। ऐसे में किसान नर्मदा नदी का पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे आलीराजपुर जिले को सूखा घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर किसान मंत्री नागर सिंह चौहान के पास पहुंचे थे। इसके बाद मंत्री खुद किसानों के साथ आंदोलन में शामिल हो गए और उनके साथ कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया। मंत्री ने कहा- मैं मंत्री हूं, गाड़ी से भी आ सकता था, लेकिन हम सब लोग यहां पैदल चलकर मैडम से चर्चा करने आए थे। कलेक्टर मैडम ने हमें अच्छे से आश्वासन दिया है। मंत्री के मुताबिक, प्रशासन ने तीन दिन के भीतर नर्मदा का पानी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम अब चर्चा में है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मंत्री खुद सरकार का हिस्सा हैं और सरकार भी उनकी है, तो उन्हें मांगें मनवाने के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़ा? क्या अधिकारी मंत्री की भी नहीं सुन रहे हैं या फिर यह महज एक सियासी स्टंट है? मंत्री ने मांगकर खाई रोटी, न सब्जी मिली न चटनी
जल संसाधन विभाग के मंत्री तुलसी सिलावट ने एक आदिवासी परिवार की झोपड़ी में पहुंचकर उनके यहां रोटी खाई। वे केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से मिलने पहुंचे थे। वैसे किसी गरीब, किसान, मजदूर, दलित या आदिवासी के घर जाकर नेताओं के खाना खाने की बात नई नहीं है। लेकिन नेता अगर बिना किसी प्लानिंग के पहुंच जाएं, तो स्थिति कुछ ऐसी भी बन सकती है, जैसी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ हुई। हुआ यूं कि मंत्री झोपड़ी में पहुंचे और वहां मौजूद महिला से रोटी मांगी। उन्होंने पूछा कि सब्जी क्या बनाई है? इस पर महिला ने बताया कि सब्जी नहीं बनाई, सिर्फ चटनी बनाई है। इसके बाद महिला ने एक रोटी मंत्री के हाथ में थमा दी। मंत्री ने आधी रोटी अपने पास रखी और आधी महिला को लौटा दी। फिर उन्होंने कहा- चटनी तो दे दीजिए। इस पर महिला ने बताया कि चटनी नहीं है, लेकिन अचार है। इसके बाद मंत्री ने अचार के साथ आधी रोटी खाई और वहां से चले गए। इस दौरान उन्होंने परिवार से कहा कि मैं तुम्हारी रोटी और नमक खा रहा हूं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। अब लोग इस पर चुटकी ले रहे हैं कि मंत्री की प्लानिंग में भले ही थोड़ी कमी रह गई, लेकिन रील बिल्कुल रियल जरूर बन गई और मंत्री ने गरीबी का स्वाद भी चख लिया। रिटायरमेंट पर पटवारी का नेताओं जैसा काफिला
आपने नेताओं को अक्सर लंबे-चौड़े वाहनों के काफिले के साथ निकलते देखा होगा। लेकिन भिंड के लहार में लोग उस वक्त अचरज में पड़ गए, जब एक रिटायर्ड पटवारी करीब 200 वाहनों के काफिले के साथ शहर की सड़कों पर निकले। दरअसल, लहार में पदस्थ रहे पटवारी विजय शंकर दुबे का रिटायरमेंट हुआ। इसके बाद उनकी सम्मान यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों वाहनों का काफिला शामिल रहा। नजारा ऐसा था, मानो किसी नेता की जीत के बाद विजयी जुलूस निकला हो। सेवा से विदाई की इस यात्रा का जगह-जगह स्वागत भी किया गया। काफिला जहां से गुजरा, वहां कई जगहों पर जाम की स्थिति भी बन गई। अब लोग इस पर चुटकी ले रहे हैं कि पटवारी साहब का भी अलग ही जलवा है। इतना बड़ा काफिला देखकर इलाके के नेताओं की धड़कनें तो जरूर बढ़ गई होंगी… कहीं पटवारी साहब रिटायरमेंट के बाद चुनाव लड़ने की तैयारी तो नहीं कर रहे। ‘लेके पहला-पहला प्यार…’ कलेक्टर का सिंगिंग टैलेंट
मध्य प्रदेश के श्योपुर की कलेक्टर शीला दाहिमा इन दिनों अपने एक पुराने वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। वीडियो में कलेक्टर का गायकी का टैलेंट देखने को मिल रहा है। वे साल 1956 में आई फिल्म सीआईडी के मशहूर गाने ‘लेके पहला-पहला प्यार, भर के आंखों में खुमार…’ को अपनी आवाज में गाती नजर आ रही हैं। वीडियो में शीला दाहिमा सिर्फ गाना ही नहीं गा रहीं, बल्कि गाने की धुन पर डांस करती भी दिखाई दे रही हैं। हालांकि, यह वीडियो नया नहीं है। बताया जा रहा है कि यह करीब दो साल पुराना वीडियो है, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। वैसे, प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच किसी अधिकारी का अपना शौक जिंदा रखना भी जरूरी है। बस इतना ध्यान रहे कि कलेक्टर मैडम की गायकी देखकर दूसरे अधिकारी-कर्मचारी कहीं प्रेरणा लेकर फाइलें छोड़कर रीलबाजी में न जुट जाएं। इनपुट सहयोग – संजय पी लोढ़ा (झाबुआ), गौरव मिश्रा (खुजराहो), मयंक त्रिपाठी (आलमपुर), कुलदीप शर्मा (श्योपुर) ये भी पढ़ें –
शराबी टीचर को धक्के मारकर स्कूल से निकाला: कड़ाही में मरीज, पार कराई उफनती नदी श्योपुर के एक सरकारी स्कूल में एक टीचर शराब के नशे में स्कूल पहुंच गया। वह कुर्सी पर बैठकर बच्चों के सामने ही बीड़ी फूंकता रहा। पूरे घटनाक्रम का एक ग्रामीण ने वीडियो बना लिया। वीडियो में बच्चे टीचर की हरकतें देखकर हंसते नजर आ रहे हैं। बाद में बच्चों ने टीचर को धक्के मारकर स्कूल से बाहर निकाल दिया। पूरी खबर पढ़ें
