बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में 26 जून से अब तक बीमारी से 8 बच्चों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को जिला अस्पताल में 3 साल की प्रियंका धुर्वे की भी मौत हो गई। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की एक टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, लेकिन कारण पता नहीं चल पाया है। बुधवार को स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में कलेक्टर कुमार सत्यम ने बिरसा की 5 ग्राम पंचायतों (20 गांव) और बैहर की 4 ग्राम पंचायतों के (20 गांव) में घर-घर जाकर बच्चों की सेहत जांचने के लिए 20 टीम गठित करने निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीमारी के लक्षण दिखने पर अस्पताल में भर्ती कराए गए 100 बच्चों में से 93 बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं। अस्पताल में देरी से पहुंचे थे बच्चे: CMHO पहली मौत 26 जून को सामने आई थी। ज्यादातर बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार के साथ मीजल्स (खसरा) और मलेरिया के लक्षण मिले हैं। मौतों की मुख्य वजह अस्पताल देरी से पहुंचना और बच्चों का कुपोषित होना है। -डॉ. परेश उपलप, सीएमएचओ, बालाघाट
