पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उज्जैन में दिए अहंकार संबंधी बयान का समर्थन किया है। दिग्विजय ने सोशल मीडिया पर भागवत का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वे उनकी इस बात से सहमत हैं कि जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है। किसी को भी अहं और अहंकार में नहीं डूबना चाहिए। दिग्विजय ने लिखा, “काश, सभी बड़े लोग इसे समझें।” उन्होंने साथ ही कहा कि धर्म का उपयोग राजनीति में नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार धर्म जोड़ता है, जबकि राजनीति लोगों को विभाजित करती है। दिग्विजय ने भागवत से समर्थन मांगा दिग्विजय ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि धर्म के संबंध में बात करें तो वह समुद्र के समान है, लेकिन सभी धर्म इंसानियत के रास्ते पर चलना सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म सभी को जोड़ता है और इसका इस्तेमाल राजनीति में नहीं होना चाहिए। उन्होंने भागवत से कहा कि यदि वे इस बात से सहमत हैं तो इसका समर्थन करें। दिग्विजय ने लिखा कि इससे उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी, अन्यथा कथनी और करनी में अंतर दिखाई देगा। भागवत ने कहा था- उदय हुआ है तो अस्त भी होगा उज्जैन में शुक्रवार को युवा धर्म संसद में मोहन भागवत ने युवाओं से अहंकार से बचने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि मनुष्य अहंकार में यह मान लेता है कि सब कुछ उसकी इच्छा और नियंत्रण के अनुसार चलता है, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने सूर्य के उदाहरण के जरिए कहा कि जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है। भागवत ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन के हर चरण में मौजूद रहता है और इसे बुढ़ापे या रिटायरमेंट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। युवा धर्म संसद में करीब 1,700 युवा शामिल हुए। भागवत ने अपने संबोधन में किसी नेता का नाम नहीं लिया था। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसके अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले गए हैं।
