प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। PM मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि सेशेल्स से भारत का रिश्ता सिर्फ 50 साल पुराना नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत अगस्त 1770 में हुई थी। जब ‘थेलेमाक’ जहाज से यहां 5 भारतीय पहुंचे थे। मोदी ने कहा कि जब लोग दुनिया का नक्शा देखते हैं, तो उन्हें सेशेल्स हिंद महासागर में बसे कुछ छोटे-छोटे द्वीपों का एक समूह दिखाई देता है। लेकिन हमारे लिए सेशेल्स सिर्फ द्वीपों का समूह नहीं, बल्कि इससे कहीं बढ़कर है। PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर्यावरण की रक्षा, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और लंबे समय तक पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में किए गए काम के लिए मिला है। पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। इससे पहले मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्रदान किया था। PM मोदी के सेशेल्स दौरे की खास बातें 1. गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे। 2. 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया। 3. नए समझौतों पर हस्ताक्षर 4. मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स पर ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है। कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं। प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल। सेशेल्स से जुड़ी खास बातें जानिए… सेशेल्स की पहली बस्ती में शामिल थे 5 भारतीय पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा ने पहली बार सेशेल्स को 1502 में खोज की थी। तब यहां पर लोगों की कोई स्थाई बसावट नहीं थी। इसके बाद कई सदियों तक अरब और यूरोपीय जहाज यहां रुकते रहे, लेकिन कोई स्थायी आबादी नहीं बनी। पहली बार 1770 में फ्रांस ने पहली स्थायी बस्ती बसाई। इसी दल में 15 फ्रांसीसी बसने वाले, 7 अफ्रीकी गुलाम और 5 भारतीय शामिल थे। इन्हें सेशेल्स का पहला स्थायी निवासी माना जाता है। इसके बाद 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से भी लोग यहां आकर बसने लगे। 20वीं सदी से तमिलनाडु और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी, मजदूर और निर्माण कार्य से जुड़े लोग सेशेल्स पहुंचे। सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति के पूर्वज बिहार से आज करीब 1.20 लाख आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग लगभग 8% हैं। भारतीय मूल के लोगों में बिहारी समुदाय तीसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता है। साल 2020 में राष्ट्रपति बने वेवेल रामकलावन की जड़ें भी बिहार से जुड़ी हैं। रामकलावन के परदादा करीब 138 साल पहले बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से उन्हें गन्ने के खेतों में काम करने के लिए मॉरीशस भेजा गया। बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया। साल 2018 में, जब रामकलावन विपक्ष के सांसद थे, तब उन्होंने अपने पूर्वजों के गांव परसौनी का दौरा भी किया था। सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था। वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है। मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे पीएम मोदी ने सेशेल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर (MAHASAGAR)’ का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी। मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था। मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके। मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था। उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया। ————— ये खबर भी पढ़ें… PM मोदी ने सेशेल्स में कछुओं को पत्तियां खिलाईं, VIDEO:256 साल पहले 5 भारतीय रहने पहुंचे थे; अब हर 8वां नागरिक भारतवंशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय दौरे पर सेशेल्स पहुंचे। राजधानी विक्टोरिया में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने नेशनल बोटैनिकल गार्डन में एल्डाब्रा जाइंट कछुओं को पत्तियां खिलाईं। मोदी 29 जून को सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी होंगे। हिंद महासागर में बसे इस छोटे से द्वीपीय देश का भारत से रिश्ता सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि 256 साल पुराना भी है। साल 1770 में जब यहां पहली स्थायी बस्ती बसाई गई, तब वहां पहुंचने वाले 27 लोगों में 5 भारतीय भी शामिल थे। बाद में बिहार, तमिलनाडु और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भारतीय यहां आकर बस गए। पूरी खबर पढ़ें…
