महू में शुक्रवार को मोहर्रम की 10वीं तारीख पर अकीदत और गमगीन माहौल के बीच पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। शाम 4 बजे के बाद शुरू हुए इस जुलूस में ‘या हुसैन’ के नारों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते अखाड़ों के युवाओं ने अपनी लाठी कला और हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिसे देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। देर शाम सभी ताजियों को पूरे अदब के साथ कर्बला ले जाकर ठंडा किया गया। हरि फाटक से उठा पहला ताजिया, जुड़ता गया कारवां जुलूस की शुरुआत शाम को सबसे पहले हरि फाटक इलाके से ‘पीपल पत्ते का ताजिया’ उठाने के साथ हुई। इसके बाद जैसे-जैसे कारवां आगे बढ़ा, शहर के अलग-अलग मोहल्लों के ताजिए और अखाड़े इस जुलूस में जुड़ते चले गए। मुख्य रास्तों से जब एक साथ कई आकर्षक ताजिए गुजरे, तो पूरा शहर मातमी धुनों और नारों से गूंज उठा। जगह-जगह बांटा ठंडा शरबत मोहर्रम का यह जुलूस शहर में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी बना। जुलूस के रास्ते में कई जगहों पर स्थानीय समाजसेवियों और हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने मिलकर सबीले लगाईं। भीषण गर्मी को देखते हुए जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और राहगीरों के लिए ठंडे पानी और मीठे शरबत के खास इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में एक्स्ट्रा फोर्स, मुस्तैद रहे अफसर त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर रही। जुलूस के पूरे रूट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारी खुद लगातार मौके पर मौजूद रहकर पूरी व्यवस्था की निगरानी करते रहे, जिससे पूरा आयोजन बिना किसी बाधा के भाईचारे के साथ संपन्न हुआ।
