भोपाल में बीते दो साल में 10 हाईराइज बिल्डिंग को मंजूरी मिली है। इनमें 5 इमारतें 52 मीटर से ज्यादा ऊंची हैं। जबकि अभी फायर ब्रिगेड के पास जो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म है, वह अधिकतम 52 मीटर ऊंचाई तक ही पहुंच पाता है। यानी इन इमारतों में आग लगने पर शुरुआती सुरक्षा पूरी तरह बिल्डिंग के अंदर मौजूद सिस्टम पर निर्भर रहेगी। भोपाल नगर निगम ने नई इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी बिल्डिंग संचालक पर आ जाती है कि वहां स्प्रिंकलर, फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्जिट जैसे इंतजाम पूरी तरह काम करते रहें। हालांकि आप साधारण सिंगलेक्स या डुप्लेक्स बना रहे हैं जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से और निर्मित क्षेत्र 500 वर्ग मीटर से कम है, तो फायर एनओसी की आवश्यकता नहीं होती। भोपाल के कुछ पुराने इलाके अग्नि सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं। इनमें लखेरापुरा, इतवारा, जुमेराती, चौक बाजार, पीर गेट, लोहा बाजार आदि शामिल हैं। ऊंची इमारतों में अनिवार्य सुरक्षा मानक नगर निगम का फायर विभाग स्थल निरीक्षण के बाद ही इन मानकों की पुष्टि करता है। फायर एनओसी हर 2 साल में रिन्यू कराना अनिवार्य है। अभी अग्निशमन क्षमता इन्हें लेनी होगी फायर एनओसी 2020 से अटका फायर एक्ट ड्राफ्ट मप्र में फायर एक्ट का ड्राफ्ट 2020 से नगरीय विकास संचालनालय और शासन के बीच झूल रहा है। हालांकि अब इसके नियम तैयार कर लिए गए हैं। जल्द ड्राफ्ट वित्त और विधि विभाग को भेजा जाएगा। ड्राफ्ट के लटके होने के पीछे मुख्य वजह यह है कि फायर सर्विस का अलग कैडर और संचालनालय बनाने के लिए 400-500 करोड़ बजट और हजारों कर्मियों की जरूरत होगी जबकि निकाय वेतन भी नहीं दे पा रहे। ये भवन मालिक की जिम्मेदारी
हाईराइज बिल्डिंग में आग बुझाने के इंतजाम भवन मालिक को करने होते हैं। इस आधार पर उन्हें फायर एनओसी दी जाती है। हर 2 साल में निरीक्षण कर इसे रिन्यू किया जाता है। उल्लंघन करने पर एनओसी रद्द की जाती है। – संस्कृति जैन, निगमायुक्त भोपाल
