डोल ग्यारस पर भोपाल में चल समारोह शुरू हो गया है। जिसमें सभी समाजों को डोल शामिल हो रहे हैं। उधर, उज्जैन-इंदौर सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में शाम को चल समारोह निकाले जाएंगे। इसी बीच देवास जिले के हाटपीपल्या में डोल ग्यारस की करीब 150 साल पुरानी परंपरा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। यहां भगवान नरसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तीन बार तैराया जाता है। मान्यता है कि प्रतिमा के हर बार तैरने या डूबने से आने वाले साल के अच्छे-बुरे समय का संकेत मिलता है। सबसे पहले देखिए उज्जैन के काल भैरव में की गई तैयारियां… उज्जैन में सवारी, हरसिद्धि मंदिर तक पहुंचेंगे डोल डोल ग्यारस पर उज्जैन में भगवान के डोल की सवारी निकलेगी। शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले डोल और झांकियां चल समारोह के रूप में हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगी। इसे देखते हुए यातायात पुलिस ने भी ट्रैफिक प्लान जारी किया है। शाम 4 बजे से राजवाड़ा क्षेत्र सहित कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। भीड़ और यातायात दबाव के अनुसार डायवर्जन में बदलाव किया जा सकता है। ग्वालियर से आएगी सिंधिया राजवंश की शाही पगड़ी उज्जैन में भगवान कालभैरव की सवारी भी निकलेगी। काल भैरव के लिए ग्वालियर से सिंधिया राजवंश की ओर से विशेष वाहन द्वारा शाही पगड़ी उज्जैन लाई जाएगी। राजवंश के उदय दर महाराज सिंधिया पगड़ी लेकर उज्जैन पहुंचेंगे। दोपहर 3:30 बजे कलेक्टर द्वारा पूजा-अर्चना के बाद भगवान कालभैरव को यह शाही पगड़ी धारण कराई जाएगी, जिसके पश्चात सवारी रवाना होगी। इंदौर में भी निकलेंगे धार्मिक चल समारोह इंदौर में डोल ग्यारस पर शहर के अलग-अलग हिस्सों से धार्मिक चल समारोह निकलेंगे। इसके चलते राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में शाम से यातायात व्यवस्था बदली रहेगी। यातायात पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और भीड़ वाले क्षेत्रों में अनावश्यक वाहन नहीं लाने की अपील की है। डोल ग्यारस पर आज इंदौर में ट्रैफिक डायवर्ट इंदौर में डोल ग्यारस के अवसर पर 22 सितंबर को निकलने वाले चल समारोह को देखते हुए यातायात पुलिस ने ट्रैफिक प्लान जारी किया है। शाम 4 बजे से कार्यक्रम समाप्त होने तक राजवाड़ा सहित आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। भीड़ और यातायात दबाव के अनुसार डायवर्सन का समय बदला जा सकता है। इंदौर में निकलेंगे कई चल समारोह हाटपीपल्या में 150 साल पुरानी परंपरा डोल ग्यारस का एक खास आकर्षण देवास जिले के हाटपीपल्या में होने वाला नरसिंह भगवान का अनुष्ठान है। यहां करीब 150 साल से भगवान नरसिंह की पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तैराने की परंपरा चली आ रही है। डोल ग्यारस पर मंदिर से भगवान की प्रतिमा का नगर भ्रमण कराया जाता है। शोभायात्रा में अखाड़े, ढोल-ताशे और पुलिस बैंड शामिल होते हैं। नरसिंह घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर और विशेष पूजा नगर भ्रमण के बाद भगवान की सवारी चासिया मार्ग स्थित भमोरी नदी के नरसिंह घाट पहुंचती है। यहां विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। परंपरा के अनुसार प्रशासन की ओर से भगवान नरसिंह को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है। इसके बाद मुख्य पुजारी पाषाण प्रतिमा को नदी के पानी में तीन बार उतारते हैं। साढ़े 7 किलो की प्रतिमा के तैरने से देखते हैं साल के संकेत जिस पाषाण प्रतिमा को नदी में उतारा जाता है, उसका वजन करीब साढ़े सात किलो बताया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रतिमा के हर बार तैरने या डूबने को आने वाले वर्ष के संकेत के रूप में देखा जाता है। इंदौर-मालवा समेत आसपास से पहुंचते हैं श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए डोल ग्यारस पर हाटपीपल्या के नरसिंह घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इंदौर सहित मालवा क्षेत्र और आसपास के इलाकों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक आस्था के साथ पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा को देखने का अवसर होता है। आस्था में चमत्कार, भविष्यवाणी स्थानीय मान्यता साढ़े सात किलो की पाषाण प्रतिमा का पानी में तैरना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कार का विषय है। प्रतिमा के तीन बार तैरने या डूबने के आधार पर पूरे साल की स्थिति का आकलन करना स्थानीय धार्मिक मान्यता है। इसे आस्था से जुड़ी परंपरा के रूप में देखा जाता है। डोल ग्यारस जुलूस: भोपाल में आज दोपहर 1 बजे से ट्रैफिक डायवर्ट भोपाल में डोल ग्यारस के जुलूस को देखते हुए मंगलवार दोपहर 1 बजे से जरूरत के अनुसार चरणबद्ध ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा। चौक बाजार से खटलापुरा मंदिर तक जुलूस के मार्ग पर वाहनों के रूट बदले जाएंगे। पीरगेट, इमामबाड़ा, जुमेराती, सुल्तानिया रोड, बुधवारा और तलैया क्षेत्र में विशेष यातायात व्यवस्था रहेगी। भारत टॉकीज से न्यू मार्केट और रेलवे स्टेशन जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक लंबे मार्गों से जाना होगा। भारी और मध्यम वाहनों के लिए भी अलग रूट तय किए गए हैं। ये खबर भी पढ़ें… भगवान महाकाल को पंचामृत पूजन के बाद भस्म अर्पित उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के चार बजे पट खुलते ही भस्म आरती की शुरुआत हुई। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया।पूरी खबर पढ़ें
