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भोपाल के बड़ा तालाब किनारे कार्रवाई:50 मीटर के दायरे में 11 कब्जे हटाए; फार्म हाउस, स्विमिंग पूल भी तोड़ा

नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने भोपाल के बड़े तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। गुरुवार को सैवनिया गौंड इलाके में 11 अवैध निर्माण हटाए गए। आज शुक्रवार को भी यह कार्रवाई चलेगी। कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया था। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने बाउंड्री वॉल, टीन शेड और कच्ची-पक्की फेंसिंग को हटाया। साथ ही तालाब की सीमा में बने स्विमिंग पूल को भी ध्वस्त किया गया। इस अभियान में आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा की सास रेखा तिवारी का फार्म हाउस भी शामिल रहा। सीमांकन के दौरान फार्महाउस का बड़ा हिस्सा 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में पाया गया, जहां बने स्विमिंग पूल पर बुलडोजर चलाया गया। अब तक यह कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार, 2026 के सर्वे में कुल 302 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। जिनमें से अब तक 49 से अधिक हटाए जा चुके हैं। एसडीएम अर्चना शर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी। इन बड़े अतिक्रमण पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई बड़ा तालाब की हद जानने इनका सीमांकन भी
सूत्रों के अनुसार, वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन, लेक हाउस का कुछ हिस्सा आ रहा है। वहीं, मैथलीशरण गुप्ता, कीर्ति जैन, पीएस भटनागर, मोहिनी देवी, बसंत कौर, सौम्या श्रीवास्तव, प्रकाश चंदेल, मुकेश शर्मा आदि के निर्माण भी जद में आ रहे हैं। इसके अलावा बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में शामिल बड़ा तालाब का काफी हिस्सा भी जद में है। भास्कर पड़ताल में देखिए, तालाब की हद में बने आलिशान घर
दैनिक भास्कर ने 200 फीट की ऊंचाई से भोपाल की लाइफ लाइन से खिलवाड़ करने वाले अतिक्रमण को ड्रोन कैमरे में कैद किया। करीब 9 महीने पहले ही एफटीएल से जुड़कर ही एक 2 मंजिला मकान बना दिया गया। इसी में स्वीमिंग पूल भी है। इसे टीटी नगर एसडीएम वृत की टीम ने लिस्टेड किया है। इन अतिक्रमण की जद में रसूखदारों के साथ-साथ होटल जहांनुमा, सायाजी, वन विहार समेत नगर निगम के सरकारी निर्माण भी हैं। बावजूद अब तक इन्हें नहीं हटाया गया है। प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी
बता दें कि पिछले महीने हुए सर्वे में प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी सामने आए हैं। एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में सैर सपाटा, बोट क्लब, विंड एंड वेव्स होटल और वन विहार का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। इन जगहों पर ज्यादा अतिक्रमण
बैरागढ़ सर्किल में 220 अतिक्रमण हैं। टीटी नगर में 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। प्रशासन ने सेवनिया गोंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन किया था। वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेकव्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉम्प्लेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं।एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बना दिए गए हैं। सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ… पहला सर्वे: साल 2016 में डीजीपीएस सर्वे, पर रिपोर्ट सामने नहीं आई
साल 2016 में नगर निगम ने डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सर्वे कराया था। यह जमीन का सटीक माप करने की तकनीक है, जो जीपीएस की तुलना में ज्यादा जानकारी सामने लाती है। जमीन की सीमा, आकार का सटीक डेटा इकट्ठा करती है। इस सर्वे में बड़ा तालाब का क्षेत्र 38.72 वर्ग किमी बताया गया था, जबकि पहले यह एरिया 32 वर्ग किमी माना जाता था। इसकी रिपोर्ट में तालाब के एफटीएल के को-ऑर्डिनेट्स दर्ज हैं। इन को-ऑर्डिनेट्स के आधार पर धरातल पर भी सीमाएं तय की जा सकती हैं। तालाब की सीमा में आ रही निजी जमीन के मालिकाना हक का भी निर्धारण हो सकता है, लेकिन यह रिपोर्ट निगम की फाइलों में दबकर रह गई। रिपोर्ट का आज तक खुलासा नहीं हो सका। दूसरा सर्वे: 141 मुनारें ही गायब हो गईं
इसी साल एनजीटी ने बड़े तालाब का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसमें 943 में से 802 मुनारें ही मिली थीं। इसमें भी 337 मुनारें पानी के भीतर डूबी हुईं थीं, यानी उन्हें एफटीएल से पहले ही लगाया गया था। 141 मुनारें मौके से गायब थीं, लेकिन इसके बाद मुनारें दोबारा लगाने और अतिक्रमण रोकने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। तीसरा सर्वे: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सर्वे हुआ, रिपोर्ट का अता-पता नहीं
इस साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सर्वे किया गया। जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर सर्वे किया, लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है। ये रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। न ही सरकार के किसी दस्तावेज में यह जिक्र आया है कि इस सर्वे का क्या हुआ? एक मोबाइल ऐप पर इसकी रिपोर्ट दर्ज होने की बात कही जाती है। जब तक यह दस्तावेज में नहीं आएगा तब तक धरातल पर सीमांकन नहीं हो सकता। 6 महीने पहले CM दे चुके निर्देश, सांसद ने कहा-मास्टर प्लान बने
बड़ा तालाब को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। करीब छह महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने तालाब के आसपास के अतिक्रमण का नए सिरे से सर्वे करने के निर्देश नगरीय आवास एवं विकास विभाग की बैठक में दिए थे। वहीं, कुछ समय पहले भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बड़ा तालाब का मास्टर प्लान बनाने की पैरवी की थी। कहा था कि मास्टर प्लान बनने से तालाब को सुरक्षित किया जा सकेगा। बड़ा तालाब के 50 मीटर के दायरे में 1300 से ज्यादा अतिक्रमण सामने आया था। 10 साल में सिर्फ 1 बड़ी कार्रवाई, महीनों तक विस्थापन नहीं
करीब दो साल पहले भदभदा झुग्गी बस्ती से कुल 386 घरों को हटाया गया था। एनजीटी ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की 10 साल में यही बड़ी कार्रवाई थी। इसके बाद प्लान बने, लेकिन जमीन पर नहीं आए।

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