राहुल शर्मा। भास्कर नेटवर्क खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान बीज चयन और खेत तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अब भी बीज उपचार को नजरअंदाज कर देते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यही लापरवाही बाद में जड़ सड़न, चारकोल रॉट, ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट और पीला मोजेक जैसे रोगों का बड़ा कारण बनती है। यही कारण है कि किसान अक्सर शिकायत करते हैं कि बीज तो महंगा और अच्छी कंपनी का लिया था, लेकिन वह जमीन में ही सड़ गया या उगते ही सूख गया। दरअसल बीज उपचार वह प्रक्रिया है जिससे बीज के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुआई से पहले केवल 24 से 48 घंटे के भीतर सही तरीके से बीज उपचार कर दिया जाए तो अंकुरण बेहतर होता है, पौधे स्वस्थ रहते हैं और शुरुआती रोगों का खतरा काफी घट जाता है। खास बात यह है कि बीज उपचार पर खर्च बेहद कम आता है, लेकिन इससे उत्पादन बढ़ाने में बड़ा फायदा मिलता है। बीजोपचार के चार तरीके अपनाने से घटेगा रोगों का खतरा एफआईआर ही है बीज उपचार का सही क्रम सही दवा और सही मात्रा से ही मिलेगा रोगों से बचाव बीज उपचार से ये फायदे… बीज उपचार करते समय सावधानियां… ऐसे करें बीज का ट्रीटमेंट बीज उपचार पाउडर और द्रव दोनों रूप में किया जा सकता है। पाउडर दवा को तय मात्रा में बीज के साथ किसी ड्रम, डिब्बे या मटके में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि बीज पर हल्की परत चढ़ जाए। द्रव उपचार में घोल बनाकर बीज को कुछ समय तक भिगोया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार उपचार हमेशा छायादार स्थान पर ही करना चाहिए। डॉ. स्वप्निल दुबे, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र रायसेन ने बताया कि- बिना उपचार के बोवनी से 20% तक घट सकती है पैदावार, फसलों को मिट्टी और बीज जनित रोगों से बचाना जरूरी है।
