मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। भाजपा विधायक ने ‘लाड़ली बहना’ को धमकाया
मध्य प्रदेश में ‘लाड़ली बहना’ योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये क्या मिल रहे हैं, सत्ताधारी दल के कुछ नेता इस योजना के नाम पर उन्हें कभी धमकाने, कभी बेइज्जत करने तो कभी भावनात्मक दबाव बनाने से भी नहीं चूक रहे हैं। अब उमरिया जिले के मानपुर से भाजपा विधायक मीना सिंह का एक वीडियो चर्चा में है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘भारत माता की जय’ का नारा लगवाया। जब महिलाओं की आवाज उन्हें धीमी लगी तो उन्होंने कहा- महिलाएं बोल क्यों नहीं रही हैं? ‘लाड़ली बहना’ बंद कराना है क्या? भले ही यह बात हंसी-मजाक में कही गई हो, लेकिन इसे लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि ‘लाड़ली बहना’ योजना का पैसा जनता के टैक्स से आता है, न कि भाजपा नेताओं की जेब से। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ‘लाड़ली बहना’ का अपमान कर रही है। वहीं, लोगों का यह भी कहना है कि भाजपा नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि आज वे सत्ता के सिंहासन पर हैं तो उसमें लाड़ली बहनों का भी बड़ा योगदान है। ऐसे में अगर लाड़ली बहनें नाराज हो गईं, तो आने वाले समय में इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। दिग्विजय के राजनीति से संन्यास की उड़ी खबरें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक बयान के बाद उनके राजनीति से संन्यास लेने की अटकलें तेज हो गईं। बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, बाद में खुद दिग्विजय सिंह की ओर से इस पर सफाई भी दे दी गई। दरअसल, दिग्विजय सिंह अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरोध में प्रस्तावित अपनी पदयात्रा को लेकर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा- अब मेरा काम धर्म रक्षा है। इसमें कोई राजनीति नहीं होगी। उन्होंने ये भी कहा- मैं 80 साल का हो गया हूं। मेरी पार्टी ने मुझे पांच बार विधायक, दो बार लोकसभा सांसद और दो बार राज्यसभा सांसद बनाया। इस बार मैंने पार्टी से कहा कि किसी और को मौका दीजिए। अब मेरा काम धर्म रक्षा है। बस, उनके इसी बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या ‘राजा साहब’ अब सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने वाले हैं? इधर, अपने-अपने राजनीतिक नफे-नुकसान का हिसाब लगाते हुए भाजपा से लेकर कांग्रेस तक कई नेता सुखी और दुखी भी हो गए। हालांकि, बाद में दिग्विजय सिंह की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। वे केवल राम मंदिर के चढ़ावे चोरी के विरोध में होने वाली उनकी पदयात्रा की बात कर रहे थे। राजनीति से संन्यास लेने का उनका फिलहाल कोई इरादा नहीं है। वैसे भी, दिग्गी राजा कई बार कह चुके हैं- मैं न टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं। मरते दम तक राजनीति करूंगा। तो प्रभु श्रीराम उनका हाथ तोड़ने का काम करेंगे
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर आरएसएस पर आरोप लगाने वालों को खंडवा से भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन और आरएसएस पर उंगली उठा रहे हैं, उनकी उंगली और हाथ भी तोड़ दिए जाएंगे। हालांकि, शायद उन्हें यह अहसास हुआ कि उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो सकता है। इसके बाद उन्होंने अपनी बात संभालते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ही उनका हाथ तोड़ने का काम करेंगे। अब सांसद के इस बयान को लेकर लोग जमकर चुटकी ले रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम पर किसी एक का अधिकार या पेटेंट नहीं है। वे सबके आराध्य हैं, सब कुछ देख रहे हैं और सब पर उनकी नजर है। आखिरकार, उनका न्याय ही सर्वोपरि है। और अब अंदर की बात.. प्रमुख सचिव को देखकर छिप जाते हैं बैंककर्मी
एक विभाग के प्रमुख सचिव से एक बैंक के कर्मचारी खासे परेशान हैं। जैसे ही साहब बैंक पहुंचते हैं, वहां हड़कंप मच जाता है। बैंककर्मी अपनी-अपनी फाइलों और टेबलों के पीछे छिपने लगते हैं। कुछ तो अपनी सीट छोड़कर ही निकल जाते हैं, ताकि प्रमुख सचिव की नजर उन पर न पड़े। अब इसकी वजह भी जान लीजिए। दरअसल, प्रमुख सचिव का परिवार बाहर रहता है, जबकि उनकी पोस्टिंग राजधानी में है। ऐसे में वे अक्सर परिवार के बैंक खातों से जुड़े किसी न किसी काम के सिलसिले में बैंक पहुंच जाते हैं। लेकिन बैंक पहुंचते ही वे वहां की व्यवस्थाओं और कामकाज में कमियां गिनाने लगते हैं। साहब कभी सर्वर धीमा होने पर सवाल उठाते हैं, तो कभी पुराने उपकरणों और संसाधनों पर नाराजगी जताते हैं। उनकी इस आदत से बैंककर्मी खासे परेशान हैं। दबी जुबान में कुछ कर्मचारी तो यहां तक कहने लगे हैं कि साहब जिन विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, पहले उनकी व्यवस्था भी देख लें। यानी, दूसरों की कमियां गिनाने से पहले अपने गिरेबान में भी झांक लें। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), शैलेंद्र चतुर्वेदी (उमरिया), रईस सिद्दिकी (बुरहानपुर) ये भी पढ़ें –
बैलों ने दिखाई फुर्ती, मंत्री खिंचे चले गए: भाजपा विधायक ने फेंके बधाई के गुलदस्ते बड़वानी में मंत्री गौतम टेटवाल एक खेत में उतरे और हल चलाते हुए रील बनाई। लेकिन मंत्री उस समय लड़खड़ा गए, जब बैलों के जोड़े ने मंत्री से ज्यादा फुर्ती दिखा दी। दरअसल, बैल तेज चलने लगे और मंत्री जी उनके पीछे-पीछे खिंचते चले गए। इस दौरान उनके पैर लड़खड़ाए भी। पूरी खबर पढ़ें
