खंडवा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगे हैं। एक महिला अभ्यर्थी ने महिला बाल विकास विभाग के अफसरों पर रिश्वत लेकर मेरिट बदलने की शिकायत की है। उनका आरोप है कि योग्यता और पात्रता के आधार पर मेरिट सूची में उनका नाम पहले स्थान पर था, लेकिन समिति के फैसले के बाद जारी अंतिम सूची में उन्हें चौथे स्थान पर कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि अनुभव के अंक नहीं जोड़े गए। ग्राम शिवरिया निवासी लक्ष्मी सोनेर ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से शिकायत की है। उनके पति निखिलेश गार्वे भाजपा एससी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष हैं। वहीं चयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ज्योति जाधव के पति अनिल जाधव यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हैं। इससे पहले भी भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान महिला बाल विकास विभाग के अफसरों पर रिश्वतखोरी के आरोप लग चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की न जांच हुई और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई। सीडीपीओ और बाबू पर रिश्वतखोरी के आरोप लक्ष्मी सोनेर के पति और भाजपा नेता निखिलेश गार्वे ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में हरसूद परियोजना के सीडीपीओ गोपाल मोरे और बाबू नरेंद्र कनाड़े की मिलीभगत है। उनके जरिए आवेदनों की स्क्रूटनी कर मेरिट तैयार की जाती है और फिर चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। निखिलेश गार्वे ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान रुपए की मांग की जाती है। उनका दावा है कि नौकरी लगाने के बदले उनसे कनाड़े बाबू ने 50 हजार रुपए लिए, जबकि ज्योति जाधव ने 3 लाख रुपए दिए, इसलिए उनका चयन कराया गया। उनका यह भी आरोप है कि पूछने पर कहा गया कि यह सब डीपीओ रत्ना शर्मा ने किया है। अब जानिए क्या है पूरा घटनाक्रम? हरसूद ब्लॉक के ग्राम शिवरिया-01 की आवेदिका लक्ष्मी सोनैर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती की ऑनलाइन मेरिट सूची पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि ऑफलाइन प्रारंभिक सूची में उन्हें 60 अंक और पहला स्थान मिला था, लेकिन 18 मार्च 2026 को जारी ऑनलाइन मेरिट सूची में अंक घटाकर 45 कर दिए गए, जिससे उनकी रैंक चौथे स्थान पर पहुंच गई। अनुभव के 10 अंक काटे, बीपीएल के नहीं जोड़े आवेदिका का दावा है कि उन्होंने आवेदन के साथ बीपीएल कार्ड अपलोड किया था और उनका नाम पात्र हितग्राही सूची में भी दर्ज है। इसके बावजूद ऑनलाइन मेरिट में बीपीएल श्रेणी के निर्धारित 5 अंक नहीं जोड़े गए। इसके अलावा, उनके पास जिला पंचायत खंडवा द्वारा प्रमाणित 5 वर्ष 5 माह का ग्राम सामाजिक एनीमेटर (VSA) का अनुभव है। ऑफलाइन सूची में इस अनुभव के 10 अंक मिले थे, लेकिन ऑनलाइन सूची में इन्हें शून्य कर दिया गया। ऑफलाइन में पहला स्थान, ऑनलाइन में चौथा आवेदिका के अनुसार, यदि बीपीएल के 5 अंक और कार्यानुभव के 10 अंक जोड़े जाते तो उनके कुल 60 अंक बनते और मेरिट सूची में उनका चयन होना तय था। अंक नहीं मिलने से वे पहले स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गईं। आवेदिका ने बताया कि वर्ष 2025 की भर्ती प्रक्रिया में भी उन्होंने आवेदन किया था। उस समय ऑनलाइन सूची में उनके अनुभव प्रमाण पत्र के अंक जोड़े गए थे। ऐसे में इस बार उन्हीं दस्तावेजों को अमान्य करना नियम विरुद्ध बताया गया है। अफसर बोले- झूठे आरोप लगाए तो कोर्ट जाऊंगा सीडीपीओ गोपाल मोरे ने बताया कि एक दिन पहले ही चयन समिति के समक्ष शिकायतकर्ता लक्ष्मी सोनेर के प्रकरण का निराकरण हुआ है। भर्ती नियम में आंगनवाड़ी सहायिका या आशा कार्यकर्ता का अनुभव मान्य होता है और उसी के अंक मिलते हैं। लक्ष्मी सोनेर के पास किसी प्राइवेट एनजीओ का प्रमाण पत्र था, जो मान्य नहीं है। यह बात उन्हें स्पष्ट कर दी गई है। रिश्वत के आरोप निराधार हैं। यदि वे ऐसा कहते हैं तो मैं कोर्ट में मानहानि का दावा करूंगा। फिलहाल मेरा हरसूद से ट्रांसफर हो गया है।
