गुरुवार को मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने जिले के बादाखेड़ी में एक स्कूल का औचक निरीक्षण किया। यहां शिक्षा के मंदिर की आड़ में बिना किसी अनुमति के एक अवैध मदरसा संचालित किया जा रहा था। दबिश के दौरान परिसर में जो मंजर दिखा, उसने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। 10-15 कमरों के ताले खोले गए तो वहां 100 से ज्यादा स्कूल बैग, मजहबी किताबें और हाल ही में खाए गए भोजन की बासी प्लेटें बिखरी मिलीं, लेकिन रहस्यमयी ढंग से सारी लड़कियां मौके से गायब थीं। आशंका है कि टीम के पहुंचने की सूचना पर बच्चियों को आनन-फानन में कहीं और शिफ्ट कर दिया गया। मोहिनिया एजुकेशन स्कूल के संचालक मुजफ्फर का कहना है कि मदरसा नहीं स्कूल है, लेकिन वहां वजूखाना भी मिला। आरोप है कि इस तथाकथित संस्थान में बाहरी क्षेत्रों से लाकर बच्चियों को बंधकनुमा माहौल में रुकवाया जा रहा था। मामले में आयोग अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग को तमाम दस्तावेज सौंपकर संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी और महिला बाल विकास विभाग के आला अफसर भी मौजूद थे। अवैध मदरसे की जांच में खुली पोल डॉ. शर्मा के मुताबिक, आयोग की टीम ने जब स्कूल और मदरसे की मान्यता के दस्तावेज मांगे, तो स्टाफ एक भी वैध कागज नहीं दिखा सका। सरकारी पोर्टल पर महज 36 बच्चियां दर्ज हैं, जबकि अंदरूनी रजिस्टर में 76 नाम मिले। कमरों की तलाशी से यहां 200 बच्चियों के रहने की पुष्टि हुई, जिनका फिलहाल कोई सुराग नहीं है। मदरसा नहीं स्कूल, दस्तावेज थाने में दिए हैं : संचालक
संचालक मुजफ्फर का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं। मदरसा नहीं वह स्कूल है। रिकॉर्ड से जुड़े सारे दस्तावेज थाने में व उन्हें भी उपलब्ध कराए गए हैं। यहां 30 बच्चियां हैं। 12वीं तक की पढ़ाई को लेकर कहा कि वह तो डमी है। निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर पूरी तरह अवैध आवासीय हॉस्टल के रूप में संचालित होता मिला। इसकी अनुमति नहीं थी। मौके पर 8 से 10 कमरों के हालात देखकर 200 से अधिक बच्चियों के रहने के पुख्ता संकेत मिले हैं। प्राथमिक से लेकर 12वीं तक के अवैध रिकॉर्ड और किताबें मिली हैं। विभाग अब वैधानिक कार्रवाई कर रहा है।
– टेरेसा मिंज, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, मंदसौर
