भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन प्रस्ताव को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जमीअत उलमा और एनएसयूआई दोनों संगठनों ने इसे स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। जहां जमीअत ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ करार दिया, वहीं एनएसयूआई ने इसे विश्वविद्यालय में सामने आ रहे भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने की साजिश बताते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। जमीअत उलमा ज़िला अध्यक्ष, हाफ़िज़ इस्माईल बैग ने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन का मामला नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के एक बड़े नायक के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली ने 1915 में अफगानिस्तान में बनी भारत की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और विदेशी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। गंगा-जमुनी तहजीब पर चोट बैग ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का नाम बदलना भोपाल की गंगा-जमुनी संस्कृति पर भी सीधा प्रहार है। एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटाने से समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, कमजोर शोध व्यवस्था और खराब बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन पर करोड़ों रुपए खर्च करना जनहित के खिलाफ है। सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। ये रखी गईं प्रमुख मांगें एनएसयूआई ने कहा- यह सुनियोजित षड्यंत्र
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोशिश एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसका मकसद विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान हटाना है। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा फर्जी कॉलेजों को एफिलिएशन देने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार और प्रशासन नाम बदलकर मुद्दे को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। परमार ने कहा कि एक महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बने विश्वविद्यालय का नाम बदलना, उनके योगदान का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक और धार्मिक आधार पर लिया जा रहा है, जबकि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म या जाति से। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली जैसे महानायक के नाम को हटाना न केवल भोपाल बल्कि पूरे देश के इतिहास के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो एनएसयूआई पूरे प्रदेश में राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र और पूर्व छात्र इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और जरूरत पड़ी तो उग्र प्रदर्शन से भी पीछे नहीं हटेंगे। सरकार से प्रस्ताव खारिज करने की मांग मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच ने भी बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन प्रस्ताव का विरोध किया है। मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि महान शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली भोपाल के गौरव थे, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए दुनिया भर में संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है, ऐसे में उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके योगदान का अपमान है। हारून ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा कि नई उपलब्धियां हासिल करने के बजाय पुराने संस्थानों के नाम बदलना चिंताजनक है। सरकार को चाहिए कि वह नए विश्वविद्यालय स्थापित करे, न कि ऐतिहासिक पहचान से जुड़े नामों में बदलाव कर समाज को भ्रमित करे। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों को राजनीति से दूर रखते हुए उनके मूल स्वरूप और विरासत को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ये खबर भी पढ़िए… बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय होगा भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कवायद एक कदम और आगे बढ़ गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) ने बुधवार को संस्थान का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल और कुलाधिपति मंगुभाई पटेल के पास भेज दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
