19 सितंबर से शुरू होने जा रहे एशियन गेम्स से पहले भारतीय निशानेबाजों की तैयारी अंतिम दौर में है। भोपाल की मप्र शूटिंग अकादमी में देश के 18 शीर्ष निशानेबाज अभ्यास कर रहे हैं। तैयारी सिर्फ निशाना बेहतर करने की नहीं, मुकाबले के दबाव में खुद को स्थिर रखने की भी है। कोई जानबूझकर ऐसी परिस्थितियों में अभ्यास कर रहा है, जो उस पर दबाव बनाती हैं तो कोई हार्ट बीट मॉनिटर लगाकर तेज धड़कनों के बीच अपना फोकस परख रहा है। दैनिक भास्कर ने इनमें से तीन शूटर्स से उनकी तैयारी, चुनौतियों और लक्ष्य पर बात की। एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर जो बातें मुझे प्रेशर देती हैं… मैं उन्हीं के साथ प्रैक्टिस करता हूं मुझे पता है कि प्रतियोगिता के दौरान कौन सी चीजें मुझ पर प्रेशर बना सकती हैं। इसलिए मैं ट्रेनिंग में भी उन्हीं परिस्थितियों को शामिल करता हूं। कोशिश यही रहती है कि कितना भी दबाव हो, मेरा फोकस सिर्फ शूटिंग पर रहे। हर चैंपियनशिप कुछ न कुछ सिखाती है। कई बार एक ही गलती बार-बार हो जाती है। इसलिए पिछली गलतियों को पहचानकर उन पर काम करता हूं, ताकि अगली चैंपियनशिप में वे दोबारा न हों। विदेशी कोच के साथ ट्रेनिंग का बड़ा फायदा यह है कि वे किसी तकनीकी गड़बड़ी को जल्दी पकड़ लेते हैं। जिस कमी को खुद समझने और सुधारने में काफी समय लग सकता है, उसे अनुभवी कोच अपनी टेक्निक से जल्दी ठीक करा देते हैं। बड़ी चैंपियनशिप का उनका अनुभव भी हमारे काम आता है। अब एशियन गेम्स के लिए पूरी तरह तैयार हूं। इतने प्रदर्शन के बाद अब तो सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। नहीं मिली तो बाहर जाने के बारे में सोचना पड़ेगा।
(खरगोन जिले के हैं।) रिकॉर्ड : 2023 एशियन गेम्स में 2 गोल्ड समेत 4 मेडल हैं।
10 मीटर एयर राइफल टीम व 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन टीम में गोल्ड। दो बार ओलिंपिक में हिस्सा। आशी चौकसे जेन जी हूं, एनर्जी बहुत है; खुद से बड़ी उम्मीदें, टारगेट गोल्ड है मैं जेन जी हूं और मुझमें बहुत एनर्जी है। खुद से बड़ी उम्मीदें रखती हूं और इस एशियन गेम्स में मेरा टारगेट गोल्ड है। मैंने कभी खुद को किसी दूसरे खिलाड़ी से कंपेयर नहीं किया। मेरा फोकस अपने प्रदर्शन पर रहता है और कोशिश होती है कि हर बार खुद को पहले से बेहतर करूं। मनु भाकर और मैं अच्छे दोस्त हैं, लेकिन जब हम साथ होते हैं तो शूटिंग की टेक्निकल बातें नहीं करते। शूटिंग में हर खिलाड़ी का अपना तरीका और अपनी तैयारी है। मेरी शूटिंग की शुरुआत पचमढ़ी के एनसीसी कैंप से हुई थी। स्कूल के दौरान पहली बार वहां राइफल हाथ में ली और 50 मीटर के लक्ष्य पर शॉट लगाए। प्रदर्शन अच्छा रहा तो कैंप कमांडर ने भी मेरी प्रतिभा पर ध्यान दिया। वहीं से लगा कि मैं इस खेल में आगे बढ़ सकती हूं और शूटिंग को करियर बनाने का फैसला किया। अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में गोल्ड है।
(भोपाल की हैं। प्रमुख इवेंट 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन।) रिकॉर्ड : 2023 ग्वांगझू एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल टीम के साथ सिल्वर। 2022 एशियन चैंपियनशिप में 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन मिश्रित टीम में गोल्ड। रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल हार्ट बीट मॉनिटर लगाकर शूट करता हूं, ताकि निशाना बना रहे
बड़ी प्रतियोगिताओं में प्रेशर बढ़ते ही हार्ट बीट तेज हो जाती है। शूटिंग में शरीर का छोटा सा बदलाव भी निशाने पर असर डाल सकता है। इसलिए मैं कई बार प्रैक्टिस के दौरान हार्ट बीट मॉनिटर लगाकर शूटिंग करता हूं। इससे समझ आता है कि दबाव में शरीर कैसे प्रतिक्रिया दे रहा है और उस समय खुद पर नियंत्रण कैसे रखना है। इस एशियन गेम्स में मेरे लिए चुनौती थोड़ी अलग है। मैं 10 मीटर एयर राइफल के साथ 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में भी उतरूंगा। 3पी मेरे लिए अपेक्षाकृत नया इवेंट है। इसलिए दो अलग-अलग स्पर्धाओं में उतरना खास चुनौती है। 10 मीटर एयर राइफल में मुझे खुद से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन 3पी के लिए भी पूरी तरह तैयार हूं। मैंने 2017 में शूटिंग शुरू की थी। उसके बाद लगातार आगे बढ़ा हूं। ट्रेनिंग में कोशिश रहती है कि छोटी से छोटी चीज पर काम करूं। एशियन गेम्स में लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है।
(ठाणे, महाराष्ट्र के हैं।) रिकॉर्ड : 2022 में 10 मीटर एयर राइफल के विश्व चैंपियन। एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल के साथ 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
