मध्यप्रदेश में प्रमोशन पर आरक्षण मामले को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट में पुन: सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस की गठित स्पेशल बेंच ने मामले पर सुनवाई की, जिसमें राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए जवाब पेश किया। राज्य सरकार का कहना था कि पिछड़ेपन और प्रतिनिधित्व के आंकड़ों के आधार पर हम प्रमोशंस दे रहे हैं। हाईकोर्ट ने सरकार का जवाब सुनने के बाद निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं के साथ कर्मचारियों के डेटा का साझा किया जाए। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बहस के लिए वक्त भी दिया है। जस्टिस विनय सराफ और जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 जुलाई तय की है। सीलबंद लिफाफे में किया था पेश सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि पहले हाईकोर्ट के निर्देशानुसार यह डेटा सीलबंद लिफाफे में पेश किया गया था, और प्रतिवादियों से साझा नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिस तरह महाधिवक्ता का मौखिक आश्वासन रिकॉर्ड पर नहीं है, उसी तरह डेटा साझा न करने का कोई आदेश भी रिकार्ड पर मौजूद नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह क्वांटिफएबल डेटा कोई सरकारी सीक्रेट नहीं है, इसे याचिकाकर्ताओं को दिया जाए। कोर्ट ने माना- आदेशों का पालन नहीं हुआ हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान रिकार्ड देखने के बाद पाया कि 16 अक्टूबर 2025 को सरकार को स्टडी और सर्वे का पूरा डाटा पेश करने के निर्देश दिए गए थे। 28 अक्टूबर को सरकार ने केवल सील बंद लिफाफे में कुछ डाटा पेश किया और कहा की कुछ अन्य दस्तावेज बाद में जमा किए जाएंगे, लेकिन उसके बाद वे दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं आए, इस पर कोर्ट ने माना कि सरकार ने आदेशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया। पूरा डाटा नहीं मिलेगा तो आपत्ति कैसे दर्ज करेंगे सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पूरा डाटा ही उपलब्ध नहीं होगा तो वह उस पर अपनी आपत्ति कैसे दर्ज करेंगे, इसलिए न्याय के सिद्धांतों के तहत पूरा रिकॉर्ड प्रतिवादियों के साथ साझा किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि रूल-5 के तहत तैयार सभी स्टडी और सर्वे का डाटा अगले दिन तक प्रतिवादियों को उपलब्ध कारण जाएं और इसकी जानकारी कोर्ट को भी दी जाए। 17 जुलाई तक दर्ज कर सकेंगे आपत्तियां हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को डाटा उपलब्ध कराने के बाद प्रतिवादी 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि वह इस मामले के प्रतिदिन सुनवाई करना चाहती है, लेकिन जस्टिस विनय सराफ की ओबीसी आरक्षण मामले में व्यवस्था और सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की उपलब्धता को देखते हुए अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई दोपहर 2:30 बजे होगी। यह खबर भी पढ़ें… MP में प्रमोशन में आरक्षण पर अभी नहीं लगेगी रोक मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रमोशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच इसी सप्ताह करेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
