मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव गुरुवार को भोपाल में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। यादव पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार हमलावर थे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी तथा संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाने के बाद चर्चा में आए थे। जीतू, हरीश पर उठाए थे सवाल राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करते हुए दावा किया था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी संगठन चलाने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि संगठन में मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं, असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की जा रही है। यादव ने संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि पंजाब में टिकट बेचने के आरोपों के बावजूद जीतू पटवारी ने उनका बचाव किया। हालांकि कांग्रेस ने यादव के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि अनुशासनहीनता के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है। इस संबंध में पार्टी की ओर से निष्कासन पत्र भी जारी किया गया था। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे यादव ने आरोप लगाया था कि वीर भूमि न्यास मामले में पार्टी नेतृत्व ने बिना पर्याप्त दस्तावेज और सबूत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। जब उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में प्रमाण मांगे तो जवाब देने के बजाय उन्हें नोटिस थमा दिया गया। उनका कहना था कि सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व इसे दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को रियायती दर पर जमीन आवंटित करने की परंपरा पहले की सरकारों में भी रही है। ऐसे मामलों को भ्रष्टाचार बताना तथ्यों से परे है और इससे पार्टी की साख को नुकसान पहुंचा है। राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में गलत लोगों को बढ़ावा दिया जा रहा है और संगठन सृजन अभियान व संगठनात्मक नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं है। उनका दावा था कि प्रदेश में कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है और यदि संगठनात्मक ढांचे में सुधार नहीं हुआ तो आगामी नगरीय निकाय चुनावों में भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। राकेश सिंह यादव के भाजपा में शामिल होने को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि सदस्यता लेने से पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए थे।
