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पुत्र और ठेकेदार‎ अफसरों की कुर्सियों पर बैठकर देख-रहे फाइलें‎:नगरीय निकायों में महिला सशक्तिकरण की मंशा केवल औपचारिक बैठकों तक ही सीमित

नगरीय निकायों में महिला सशक्तिकरण की मंशा और प्रशासनिक नियमों को धता बताकर डबरा नगर पालिका में पति-पुत्र राज और बिचौलियों का बोलबाला है। निकाय की चुनी हुईं महिला जनप्रतिनिधि केवल औपचारिक बैठकों तक ही सीमित कर दी गई हैं, जबकि उनके दबंग परिजन और ठेकेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की कुर्सियों पर कब्जा जमाकर शासकीय कामकाज कर रहे हैं। शुक्रवार को दैनिक भास्कर की पड़ताल में निकाय के भीतर प्रशासनिक मर्यादा और शासकीय प्रोटोकॉल की सरेआम धज्जियां उड़ती मिलीं। वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद नारायणी मौर्य के पुत्र दिनेश मौर्य प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) मेंबर के लिए आरक्षित चेंबर में मुख्य कुर्सी पर बैठकर शासकीय फाइलों का अवलोकन करते हुए देखे गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियर उनके बगल की कुर्सी पर मूकदर्शक बनकर बैठे रहे। इसके बाद पार्षद पुत्र स्वच्छता विभाग के चेंबर में भी कर्मचारी (बाबू) की कुर्सी पर बैठकर रौब गालिब करते नजर आए। बाबू की मुख्य कुर्सी पर बैठा मिला ठेकेदार शासकीय दफ्तर में अनधिकृत कब्जे का यह खेल केवल जनप्रतिनिधियों के परिजनों तक ही सीमित नहीं है। नगर पालिका में निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार भी नियम-कायदों को ठेंगा दिखा रहे हैं। ठेकेदार राजन सिंह उर्फ रजनू चौहान लोक निर्माण विभाग के चेंबर में बाबू की मुख्य कुर्सी पर बैठकर फोन चलाते नजर आए। पीआईसी चेयरमैन के लिए बनाए गए चैंबर में मुख्य कुर्सी पर बैठे वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद नारायणी मौर्य के पुत्र दिनेश मौर्य, बाएं से बगल की कुर्सी पर बैठे है इंजीनियर शोभित मिश्रा। अनधिकृत व्यक्ति का कुर्सी पर बैठना शासकीय आदेशों का सीधा उल्लंघन राज्य शासन के नगरीय विकास विभाग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, निकायों की बैठकों, दफ्तरों एवं शासकीय कार्यों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पति, पुत्र या परिजनों का हस्तक्षेप पूर्णतः प्रतिबंधित है। अनधिकृत व्यक्ति का कुर्सी पर बैठना शासकीय आदेशों का सीधा उल्लंघन है। मप्र नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41 के तहत अपने संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर गैर-प्राधिकृत व्यक्ति (पुत्र/पति) को प्रशासनिक कार्यों में दखल देने की अनुमति देना कदाचार माना जाता है। इस आधार पर राज्य सरकार संबंधित पार्षद की सदस्यता रद्द कर सकती है। किसी ठेकेदार या अनधिकृत व्यक्ति को शासकीय फाइलों का अवलोकन कराना या दफ्तर की गोपनीयता भंग करने देना शासकीय सेवा नियमों के तहत गंभीर अपराध है। इसमें संबंधित अधिकारी व कर्मचारी पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। किसी भी जनप्रतिनिधि के पुत्र या पति का निकाय में अधिकारी एवं कर्मचारी की कुर्सी पर बैठना पूर्णतः अवैधानिक है। आपके द्वारा मेरे संज्ञान में मामला लाया गया है। जांच कर कार्रवाई करूंगी।’
-साक्षी वाजपेयी, सीएमओ, नगर पालिका, डबरा

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