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उपमुख्यमंत्री के ओएसडी को 1 करोड़ देने वाला गोगिया कौन:भोपाल के 8 क्लबों में इसका पैसा, कारोबारी किशन मोदी से 13.50 करोड़ ठगे

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचुरा को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर ₹930 करोड़ की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के उस बयान के बाद चर्चा में आई, जिसमें उसने रायचुरा को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने का दावा किया है। पंजाब की जेल में बंद मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों से ₹930 करोड़ की ठगी करने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों की पूछताछ में उसने भोपाल के कुछ कारोबारियों, अधिकारियों और नेताओं के नाम भी लिए हैं। टीटी नगर की शराब दुकानों के ठेके के बदले ₹1 करोड़ देने का आरोप दिल्ली पुलिस और ED को दिए बयान में मोहित गोगिया ने दावा किया कि तनुजा सेठी ने उसकी मुलाकात दीपम रायचुरा से कराई थी। गोगिया के मुताबिक, उस समय रायचुरा सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर तैनात थे। गोगिया ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024-25 में टीटी नगर की दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में रायचुरा ने मदद की। उसके मुताबिक, इसके बदले रायचुरा को ₹1 करोड़ दिए गए। भोपाल के क्लबों और रेस्टोरेंट में निवेश का आरोप EOW की FIR के मुताबिक, गोगिया ने भोपाल के आठ से नौ क्लबों और रेस्टोरेंट में निवेश किया था। इनमें उसकी हिस्सेदारी 33% से 50% तक बताई गई है। आरोप है कि टीटी नगर की शराब दुकानों के जरिए इन क्लबों में बिना लाइसेंस शराब की सप्लाई की जाती थी। इस काम में कारोबारी अमरीक सिंह की मदद का भी आरोप है। डेयरी कारोबारी किशन मोदी से ₹13.5 करोड़ की कथित ठगी भोपाल के डेयरी कारोबारी किशन मोदी और उनकी कंपनी मेसर्स गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पर PNB, SBI और यूनियन बैंक का करीब ₹240 करोड़ का कर्ज था। कर्ज चुकाने के लिए मोदी आशिमा मॉल के पास स्थित अपनी जमीन बेचना चाहते थे। उन्होंने यह बात परिचित संजय अग्रवाल को बताई। संजय ने राजकुमार पंजाबी के जरिए उनकी मुलाकात दिल्ली के मोहित गोगिया से कराई। QR कोड वाले दस्तावेज दिखाकर लोन सेटलमेंट का भरोसा देने का आरोप होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्टलेजा में किशन मोदी और मोहित गोगिया की मुलाकात हुई। गोगिया ने खुद को वन टाइम सेटलमेंट (OTS) का विशेषज्ञ बताया और QR कोड वाले दस्तावेज दिखाए। मोदी के मुताबिक, स्कैन करने पर इनमें बैंक से जुड़ी जानकारी दिखाई देती थी, लेकिन बाद में दस्तावेज फर्जी निकले। आरोप है कि गोगिया ने ₹240 करोड़ का कर्ज ₹100 करोड़ में सेटल कराने का प्रस्ताव दिया। इसके तहत ₹70 करोड़ बैंकों को देने और ₹30 करोड़ अपनी कंपनी M.G. Leasing Finance के खाते में जमा कराने की बात कही गई। ₹13.5 करोड़ लेने के बाद फर्जी NOC देने का आरोप किशन मोदी के मुताबिक, 6 अप्रैल 2025 से मई 2025 के बीच उन्होंने HDFC बैंक की बागमुगालिया शाखा से ₹11 करोड़ गोगिया की कंपनी के खातों में ट्रांसफर किए। इसके अलावा ₹2.5 करोड़ नकद दिए जाने का आरोप है। यह रकम राजकुमार पंजाबी की मौजूदगी में प्रतीक शर्मा के जरिए दी गई थी। आरोप है कि इसके बाद गोगिया ने दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में मोदी की पत्नी पायल और पिता राजेंद्र प्रसाद मोदी को बुलाया। वहां गोगिया की पत्नी श्वेता गोगिया और कर्मचारी भरत छाबड़ा ने SBI की NOC दिखाई और बाकी बैंकों के सेटलमेंट की प्रक्रिया जारी होने की बात कही। जांच रोकने के नाम पर ₹50 लाख मांगने का आरोप गोगिया ने अपने बयान में कहा कि भोपाल में ‘सोल क्लब’ के संचालन के दौरान उसकी मुलाकात पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा से हुई थी, जिन्हें उसने AIG बताया। गोगिया के मुताबिक, जांच एजेंसियों की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर उसने मिश्रा के कथित रिश्तेदार सिद्धांत ओझा से संपर्क किया। गोगिया के मुताबिक, सिद्धांत ओझा ने उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से कराई, जिसने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और कार्रवाई रुकवाने के बदले ₹50 लाख मांगे। गोगिया ने दावा किया कि उसने पहले इस प्रस्ताव पर भरोसा नहीं किया। इसके बाद सिद्धांत ने उसकी बात राजेश मिश्रा से कराई। गोगिया के अनुसार, मिश्रा के आश्वासन के बाद उसने ₹50 लाख दे दिए। हालांकि, उसके बयान में मिश्रा पर सीधे रकम मांगने का आरोप नहीं है।

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