मध्य प्रदेश के रीवा के नेशनल अस्पताल में मरीज पर लिफ्ट गिरने से मौत हो गई। मरीज का शरीर बुरी तरह कुचला गया। कई जगह चोटें आईं। मरीज स्ट्रेचर समेत लिफ्ट में फंसा नजर आ रहा है। पिता की लाश को पकड़कर बेटा चीख-चीखकर रो रहा है। घटना शनिवार रात की है। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान अमरपाटन के लालपुर निवासी सुरेश सेन (50) के रूप में की गई है। सुरेश सेन पेड़ से गिरकर घायल हो गए। गंभीर हालत में उन्हें शनिवार रात नेशनल हॉस्पिटल लाया गया था, जहां हॉस्पिटल स्टाफ उन्हें लिफ्ट में छोड़कर भाग गया था। परिजन अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। मरीज की मौत के बाद अस्पताल के बाहर हंगामा मरीज की मौत के बाद रविवार को अस्पताल के बाहर सैकड़ों लोग धरने पर बैठ गए। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के कारण अस्पताल के बाहर काफी देर तक हंगामा रहा। हादसे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति संभालने की कोशिश की। पुलिस ने परिजन और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाइश दी। हालांकि, मृतक के परिजन ने पुलिस पर मारपीट और बदसलूकी करने का आरोप लगाया। प्रबंधन की लापरवाही से जान गई मृतक के परिजन बृजेश सेन ने बताया- अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से जान गई है। मरीजों की सुरक्षा के लिए अस्पताल में पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। लिफ्ट की सुरक्षा और उसके रखरखाव की व्यवस्था नहीं है। आज सुरेश हमें छोड़कर चला गया। परिजन बोले- पुलिस ने हमें पीटा, जमीन पर घसीटा वहीं, परिजन सोनू सेन ने कहा- पुलिस ने हमें पीटा। जमीन पर घसीटा। हम न्याय के लिए धरने पर बैठे हैं, लेकिन पुलिस मारपीट पर उतारू है। परिवार को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और इंसाफ चाहिए। निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पटवारी बोले- ‘सरकारी हत्या’ का जवाब कौन देगा? मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के रीवा में अस्पताल में लिफ्ट में फंसकर एक निर्दोष की जान चली गई। यह कोई हादसा नहीं है, बल्कि ‘सरकारी हत्या’ है। इसका जवाब कौन देगा। उन्होंने कहा- प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। स्वास्थ्य मंत्री का अपना शहर में सिस्टम फेल हो चुका है। यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकारी हो या निजी, स्वास्थ्य सेवाओं में पर्याप्त नियम और मॉनिटरिंग नहीं है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया पुलिस ने बताया- आक्रोशित परिजन को शांत कराया जा रहा है। फिलहाल सुरेश सेन के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अस्पताल प्रबंधन ने नहीं दिया बयान नेशनल अस्पताल प्रबंधन की ओर से हादसे की वजह और आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। मृतक के परिजन और प्रदर्शनकारी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
