ग्वालियर के डबरा में पॉक्सो के एक मामले में नाम आने के बाद कथित ब्लैकमेलिंग से एक परिवार पूरी तरह बिखर गया। बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत 26 वर्षीय इंजीनियर लवजीत राणा ने 20 दिसंबर 2025 को जान दे दी। बेटे को न्याय दिलाने और कथित ब्लैकमेलिंग करने वालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आठ महीने तक पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटती रहीं उसकी मां चंद्रा राणा ने भी 22 अगस्त 2026 को जान दे दी। इसके बाद गोला का मंदिर पुलिस ने बच्ची के माता-पिता और एक वकील के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने कानपुर से आरोपी दंपती को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि वकील फरार है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने समय रहते उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। 22 अप्रैल 2025 को शुरू हुई थी कहानी लवजीत राणा 12वीं में डबरा का टॉपर रहा था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह गुरुग्राम की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर रहा था। 22 अप्रैल 2025 को वह छुट्टी पर डबरा आया था। वह अपने दोस्त आकाश गुप्ता के साथ उसकी कार से आकाश के मकान में किराए से रहने वाले कानपुर के एक परिवार की करीब तीन साल की बच्ची को चॉकलेट दिलाने ले गया था। पिता दलजीत सिंह के मुताबिक, करीब 20 मिनट बाद बच्ची को वापस छोड़ दिया गया। इसके बाद बच्ची की मां ने आकाश पर कार में उसके साथ गलत हरकत करने का आरोप लगाया और लवजीत को भी मामले में आरोपी बनाया गया। दोनों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। आकाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि लवजीत घबरा गया था। पिता का आरोप- राजीनामे के नाम पर 60 लाख रुपए मांगे लवजीत के पिता दलजीत सिंह का आरोप है कि मामले में राजीनामे के लिए बच्ची के माता-पिता और उनकी ओर से पैरवी कर रहे वकील ने उनसे 60 लाख रुपए की मांग की। उनका कहना है कि वह 30 लाख रुपए दे चुके थे, लेकिन इसके बाद भी 30 लाख रुपए और मांगे जा रहे थे। दलजीत के मुताबिक, लगातार रुपयों की मांग और केस को लेकर दबाव की जानकारी लवजीत को थी। इससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गया था। पिता का यह भी आरोप है कि 30 लाख रुपए लेने के बाद भी आरोपियों ने अदालत में अपने बयान बदलने की बात पूरी नहीं की और दोबारा रकम मांगी। 20 दिसंबर को बेटे की मौत, आठ महीने बाद मां ने भी जान दी परिवार के मुताबिक, लगातार तनाव के बीच 20 दिसंबर 2025 को लवजीत ने ग्वालियर के गोला का मंदिर क्षेत्र स्थित अपने चाचा के घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद उसकी मां चंद्रा राणा ने उसे न्याय दिलाने और कथित ब्लैकमेलिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। पिता का आरोप है कि वह करीब आठ महीने तक अधिकारियों के चक्कर काटती रहीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 22 अगस्त 2026 को उन्होंने डबरा में जान दे दी। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पिता का आरोप- पुलिस ने समय रहते नहीं सुनी दलजीत सिंह का आरोप है कि बेटे की मौत के बाद भी पुलिस ने उनकी शिकायत पर तत्काल मामला दर्ज नहीं किया। उनका कहना है कि मामले की जांच में एक एसडीओपी ने लवजीत को निर्दोष पाया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने उस रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं की। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते उनकी शिकायत पर कार्रवाई होती तो हालात अलग हो सकते थे। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। मामले में अब खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोपों की जांच की जा रही है। 14 सितंबर को कानपुर से पकड़ा गया दंपती मां-बेटे की मौत के बाद गोला का मंदिर पुलिस ने बच्ची के माता-पिता और वकील तपन चतुर्वेदी के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। एफआईआर के बाद आरोपी दंपति कानपुर चले गए थे। पुलिस टीम ने कानपुर में दबिश देकर भरत और शिवानी को गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मामले में नामजद वकील तपन चतुर्वेदी अभी फरार है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पिता बोला- मुख्य भूमिका वकील की, 30 लाख उसके हाथ में दिए दलजीत सिंह का आरोप है कि पूरे मामले में मुख्य भूमिका वकील तपन चतुर्वेदी की थी। उनका कहना है कि बेटे को बचाने और मामले में समझौते के लिए उन्होंने उसी के हाथ में 30 लाख रुपए दिए थे। इसके बाद भी उनसे 30 लाख रुपए और मांगे गए। दलजीत की मांग है कि आरोपी वकील को जल्द गिरफ्तार किया जाए। उनका कहना है कि दंपति की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें तब तक न्याय नहीं मिलेगा, जब तक मामले के तीसरे आरोपी पर कार्रवाई नहीं होती। डबरा का टॉपर था, विदेश जाने की तैयारी थी लवजीत ने 10वीं और 12वीं में डबरा में टॉप किया था। इसके बाद उसने इंदौर के आईपीएस इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और गुरुग्राम की बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करने लगा। परिवार के मुताबिक, मौत से कुछ दिन पहले वह नौकरी के सिलसिले में विदेश जाने की तैयारी कर रहा था। 19 सितंबर को वकील की तलाश में भिंड में दबिश पुलिस ने फरार आरोपी वकील की तलाश में 19 सितंबर को भिंड में भी संभावित ठिकाने पर दबिश दी। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगातार तलाश की जा रही है। पिता की जुबानी- ‘मेरा पूरा परिवार बिखर गया’ दलजीत सिंह ने कहा कि एक आरोप ने उनका पूरा परिवार बिखेर दिया। उनका कहना है कि यदि लव उस दिन दोस्त के घर नहीं गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं बनती। बेटे की मौत के बाद उसे न्याय दिलाने की कोशिश में पत्नी को भी खो दिया। अब उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मामले के सभी आरोपियों पर कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिले। ये खबर भी पढ़ें… इंजीनियर सुसाइड केस: वकील समेत तीन पर FIR ग्वालियर में इंजीनियर लवजीत राणा द्वारा जहर खाकर आत्महत्या करने के सनसनीखेज मामले में पुलिस की गहन पड़ताल के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। गोला का मंदिर थाना पुलिस ने मर्ग जांच पूरी करने के बाद अधिवक्ता तपन त्रिवेदी समेत तीन (एक दंपति) के खिलाफ आत्महत्या का मामला दर्ज किया है।पूरी खबर पढ़ें
