तपोवन क्षेत्र में सामाजिक वानिकी के तहत एक बार फिर पर्यावरण से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। यहां कुछ अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से 4 माह पहले एक दर्जन से अधिक पेड़ों की कटाई की गई थी। अब उसी स्थान को समतल करने के नाम पर शहर का जहरीला कचरा डलवा दिया है। निगम की सांठगांठ से यहां 25 से अधिक डंपर कचरा डाला गया। जबकि वन विभाग के अधिकारी खुद मानते रहे हैं कि जमीन समतल करने के लिए करीब 150 डंपर साफ मिट्टी की जरूरत है। इसके बावजूद मिट्टी की जगह कचरा भरना कई सवाल खड़े कर रहा है। तपोवन द्वार से वन रक्षक से लेकर डीएफओ रोज गुजरते हैं, लेकिन उनको कचरा डालने की गतिविधि पर नजर नहीं गई। जब सुबह सैर पर निकले लोगों ने विरोध जताया। तब मामले का खुलासा हुआ। निगम का दावा फेल, लैंडफिल साइट तक नहीं पहुंचा कचरा
नगर निगम के डंपरों को डीजल लैंडफिल साइट तक कचरा पहुंचाने के नाम पर मिलता है, लेकिन इस मामले में कचरा केदारपुर स्थित आधिकारिक लैंडफिल साइट पर नहीं पहुंचाया गया। वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से निगम स्टाफ ने 25 से अधिक डंपर कचरा सीधे तपोवन क्षेत्र में खाली कर दिया। इसके बाद डंपर वहां से वापस होकर अपने निर्धारित रूट की ओर चले गए। नियमानुसार, नई जगह कचरा डालने या वैकल्पिक लैंडफिल साइट के उपयोग के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति आवश्यक होती है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में ऐसी किसी स्वीकृति के संकेत नहीं मिले हैं। सांठगांठ का खेल : 6 लाख बचाने या हजम करने की योजना
बाजार में एक डंपर मिट्टी की कीमत लगभग 4,000 रुपए है। यदि 150 डंपर मिट्टी डाली जाती, तो करीब 6 लाख रुपए का खर्च आता और उतने ही भुगतान के वाउचर बनते। सूत्रों की मानें तो इस खर्च से बचाने या गोलमाल के लिए नगर निगम से शहर का कचरा लाकर पहले गड्ढे में भर दिया गया, उसके ऊपर नाममात्र की मिट्टी डालकर उसे छिपाने की योजना थी। कचरा कहीं और नहीं डाल सकता, चेक कराएंगे
शहर का कचरा वाहनों से सामजिक साइट पर भेजा जाता है। कहीं और कचरा डालने के निर्देश किसी को नहीं दिए हैं। यदि तपोवन में कचरा डला है, तो इसे चेक कराकर कार्रवाई करेंगे।-संघ प्रिय, आयुक्त ननि मेरी जानकारी में नहीं है
तपोवन कैंपस के अंदर निगम के डंपरों ने आकर कचरा डाला है। ये मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इसे चेक कराते हैं। -सुरेश अहिरवार, एसीएफ सामजिक वानिकी तपोवन
