मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका खारिज कर दी है। गुरुवार को सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, ऐसे में इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष को किसी मामले में निर्णय लेने के लिए निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की ओर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जो याचिका के समर्थन में आवश्यक थे। ऐसे में याचिका में किसी प्रकार की तात्कालिकता (अर्जेंसी) भी प्रतीत नहीं होती। सदस्यता समाप्त करने के लिए लगाई थी याचिका दरअसल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने संबंधी याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष को समयबद्ध निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की थी। सिंघार का आरोप था कि कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुईं निर्मला सप्रे ने भाजपा सरकार के समर्थन में कार्य किया और मंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी विधानसभा की सदस्यता बरकरार रखी है, जो दल-बदल कानून का उल्लंघन है। मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पहले से कार्यवाही लंबित है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर ही लिया जाएगा।
